मंगलवार, 2 अक्तूबर 2018

सब कुछ विदेशी है!

जिस तरह रिस्टवाच और दीवाल घड़ी,पर्श, मोबाइल,चश्मा,पैन,बैल्ट लेपटाप,कम्प्यूटर ट्रक,टैक्टर,बस,रेल,हवाई जहाज,टीवी और पनडुब्बी इत्यादि सब विदेशी हैं, जिस तरह RSS की उग्र राष्ट्रवादी नस्लवादी विचारधारा जर्मनी और इटली के नाजीवाद से प्रेरित है,जिसतरह भारतीय संविधान और लोकतंत्र का प्रत्येक लफ्ज विदेशी है, ऐलोपैथी की दवाएं और इलाज के औजार विदेशी हैं तथा इलाज की पद्धति विदेशी है ! भारत में सिर्फ निर्धनता,अशिक्षा और आरक्षण ही शद्ध देशी है बाकी सब कुछ विदेशी है! इसलिये मजूरों -किसानों की विचारधारा साम्यवाद भी यदि विदेशी है तो किसके पेट में दर्द हो रहा है?

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