मंगलवार, 2 अक्तूबर 2018

पाकस्तानी शायर यास्मीन हमीद की ग़ज़ल:-

हम सब जैसा समझते हैं पाकिस्तान सिर्फ वैसा आतंकी मुल्क नही है!वहां भी मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत इंसानियत के गीत गाये जाते हैं!वहां भी अमन और इंकलाब की निर्झरणी बह रही है!
प्रस्तुत है -पाकस्तानी शायर यास्मीन हमीद की ग़ज़ल:-
पर्दा आंखों से हटाने में बहुत देर लगी!
हमें दुनिया नज़र आने में बहुत देर लगी!!
नज़र आताहै जो वैसा,नहींहोता कोई शख्स,
खुद को यह बात बताने में बहुत देर लगी!
एक दीवार उठाई थी बड़ी उजलत में,
वही दीवार गिराने में बहुत देर लगी!!
आग ही आग थी और लोग बहुत चारोंतरफ,
अपना तो ध्यान ही आने में बहुत देर लगी !
जिस तरह हम कभी होना ही नहीं चाहते थे ,
खुद को फिर वैसा बनाने में बहुत देर लगी!!
पर्दा आंखों से हटाने में बहुत देर लगी
हमें दुनिया नज़र आने में बहुत देर लगी
(असगर वजाहत की वाल से )

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