रविवार, 28 अक्तूबर 2018

क्षुद्र लोग अपनी ही 'सभ्यता- संस्क्रति' पर लठ्ठ लेकर पिल पड़ते हैं!

दुनिया की हर सभ्य कौम ने मौसमी बदलाव होने या फसल की उपलब्धि के अवसर पर खुश रहनेके कुछ बहाने ईजाद किये हैं,जिन्हें हम पर्व या त्यौहार कहते हैं!प्राय: देखा गया है कि हर त्यौहार पर जब आम और खास आदमी खुशी मनाने की तैयारी करताहुआ नजर आता है, तभी कुरीतियों और गलत परंपराओं को नष्ट करने के बहाने कुछ क्षुद्र प्रमादी, कूड़मगज,असभ्य और अल्पज्ञ लोग अपनी ही 'सभ्यता- संस्क्रति' पर लठ्ठ लेकर पिल पड़ते हैं!जन सभ्यता और संस्क्रति पर हमला करने वालों को गलतफहमी है कि वे क्रांतिकारी हैं! भारतीय सभ्यताऔर संस्क्रति का विरोध करने वाले यदि वामपंथी नहीं हैं, तो उन्हें भारत विरोधी,सांस्क्रतिक दुश्मन ही माना माना जाये!और किसी पर्व का या रीति रिवाज का विरोध करने वाला यदि कोई वाम पंथी है,तो निवेदन है कि जन भावनाओं का आदर करे और इन सवालों को हल करने के लिये अंध विरोध करनेके बजाय कार्ल मार्क्स और लेनिन की शिक्षाओं का अनुशरण करे!

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