बुधवार, 31 मार्च 2021

लडेंगे तो जीतेंगे भी

 भले ही भारत के अर्धसामंती,अर्धपूंजीवादी समाज में कई ग्रुपों में बिखरे पड़े वामपंथ को अतीत में पर्याप्त सफलता नही मिली!किंतु तब भी पूर्ववर्ती कॉ नम्बूदिरीपाद,कॉ.ज्योति बसु,कॉ.ए.के.गोपालन,कॉ.हरकिसन सिंह सुरजीत, कॉ इंद्रजीत गुप्ता,कॉ बीटीआर, कॉ.प्रमोद दासगुप्ता, कॉ ए. वी. बर्धन, कॉ. होमी दाजी जैसे सर्वहारा के असली हीरो जब तक जिंदा रहे, सारी दुनिया में भारतीय वामपंथ की तूती बोलती रही! पं.नेहरू और इंदिराजी ने वामपंथ को बहुत सताया,किंतु हमारे तत्कालीन कामरेड कभी भी श्रीहीन नही हुए!

किंतु मौजूदा वामपंथी नेता लगभग श्रीहीन हो चुके हैं! वे कैडरों को लगातार संघर्ष में झोंकते चले जाते हैं!जनवादी केंद्रीयताऔर केंद्रीय जनवाद सिर्फ अधिवेशनों में पारित किये जाने के कागजी प्रस्ताव मात्र रह गए हैं! वे भारत के निर्वाचित प्रधानमंत्री और सेवाभावी हिंदु संगठनों को आतंकी सिद्ध करने में लगे रहे! घोर अल्पसंख्यकवादी हो जाने का ही परिणाम है कि पूरा वामपंथ एकजुट होकर भी कन्हैयाकुमार जैसे एक पापुलर स्टारको एक दोयम दर्जे के भाजपाई नेता से नही जिता सके!
धर्मनिरपेक्षता (मुस्लिम परस्ती) से वामपंथ को क्या मिला? लगातार 'रामलला मंदिर' की जगह,बाबरी मस्जिद बताने से,कश्मीरी पत्थरबाजों पर अरण्यरोदन करने से,धारा 370 और CAA/NRC के गलत सलत इंटरपिटेशन से पढ़ा लिखा बंगाली हिंदू भी नाराज हो गया! नतीजा यह कि बंगाल में चौथे नंबर पर हैं!
मौजूदा वामपंथ की गलत सलत लाइन के कारण,वामपंथ त्रिपुरा में भी हार गया! मानिक सरकार जैसा ईमानदार नेता भी हारने को मजबूर कर दिया!वेशक भाजपा ने हर राज्य में चुनाव जीतने के घटिया तरीके अपनाए,तो क्या? केरल में सही लाइन से चलकर वामपंथ ने भाजपा को मैदान में धूल चटा दी!
वामपंथ के द्वारा कश्मीरी पत्थरबाजों की पैरवी और वर्ग विशेष के साथ देशभर में जुगलबंदी जनता को रास नही आई! अत: जब कभी जहाँ कहीं चुनाव होते हैं तो वामपंथ की मेहनत का फल कहीं कांग्रेस को कहीं,सपा-वसपा को,कहीं राजद को किसी और गैरभाजपाई दल को मिल जाता है। और वामपंथ हारने के बाद फिर नारा लगाता है कि
*लडेंगे तो जीतेंगे भी *
*सभी साथियों को क्षमा सहित सादर समर्पित *

पानी सिर से न गुजर जाये

 पी एम मोदीजी अब इस जुगाड़ में हैं कि पांच राज्यों में अपने दम खम पर बहुमत प्राप्त करके सरकारें बनाएं! ताकि उन अंतर्राष्ट्रीय आलोचकों का मुँह बंद कर सकें,जो मोदी जी को निरंकुश शासक घोषित कर चुके हैं! और जो मानते हैं कि मोदी सरकार के कतिपय कठोर निर्णयों से ,उनका जनाधार कम हुआ है!

तदुपरांत मौजूदा संविधान में कुछ आमूल चूल बड़े संशोधन कर दिए जायगेें ! ये संशोधन किस दिशा में होंगे यह सुविदित है! यह अकाट्य सत्य है कि जबतक मोदीजी पीएम हैं ,वे पूँजीवादी विकासवाद का दामन नहीं छोडेगे। लेकिन 'सबका साथ -सबका विकास' के लिये मोदी जी को *वास्तविक धर्मनिरपेक्षता* के पक्ष में खड़े रहने की बाध्यता रहेगी ! वैसे भी जब तक पानी सिर से न गुजर जाये उनके खांटी गुजराती वणिक संस्कार नही बदलने वाले!
वेशक मोदीजी ने अतीत में मुख्यमंत्री के रूप में 'हिन्दुत्वाद' को कुछ तरजीह दी होगी!और इसी की बदौलत वे पीएम भी बन बैठे!बेशक आइंदा भी उनकी इस सीट को किसीसे कोई खतरा नही! इसीलिये वे अब इससे भी ऊपर उठकर द्रुत बाजारीकरण को तरजीह देंगे! निजी क्षेत्र की ताकत को बढ़ाने में प्राणपण से सहयोग करेंगे!
दरअसल आर एस एस की हिंदुत्ववादी राष्ट्रवादी सोच और अहर्निश मशक्कत तो केवल हिंदू वोट कबाड़ने का मंतव्य मात्र रह गया है।अपर मिडिल क्लास की फर्मावरदार भाजपा के लिये असल चीज है,सरमाएदारों पूँजीपतियों की भरपूर सेवा! गरीबी, मेंहगाई बेरोजगारी और असमानता जैसे शब्द उनकी डिक्शनरी में *आंदोलनजीवी*हो गए हैं!

मंगलवार, 30 मार्च 2021

हिंदुओं के कारण ही धर्मनिरपेक्षता है!

 हिंदुओं ने सैकड़ों साल पहले गंगा जमुनी तहजीव अपनाकर अपने नाम गजबसिंह, अजबसिंह,इकबालसिंह,उम्मेदसिंह,हिम्मत सिंग,फतेहसिंह जासमीन रख लिये! बड़े फक्र की बात यह है कि ये आधे मुस्लिम और आधे हिंदू नाम को मिलाकर सेक्युलर नाम खुद पंडितों ने ही रखे!

किंतु मुस्लिम समाज में कठमुल्ले तो दूर बल्कि जो धर्मातरण कर हिंदू से मुस्लिम बना,उसे भी हिंदू नाम नही रखने दिया गया,क्योंकि उनका मजहब खतरे में नजर आता है,वहाँ किसी में इतनी हिम्मत नही कि कठमुल्लावाद का मुकाबला कर सके!
लव जेहाद के लिये यदि किसी मुस्लिम युवा ने छिप छिपाकर हिंदू नाम रख भी लिया ,तो हिंदू लड़की से प्रेम विवाह करने उपरांत वह उस लड़की का धर्मांतरण करने में जुट जाता है! और खुद भी अपने असली रंग रूप में आ जाता है!
इसलिये वे लोग बिल्कुल सही हैं जो कहते हैं कि भारत में लव जेहाद जारी है और केवल हिंदुओं के कारण ही धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र परवान चढ रहा है!

ताबिश का सिद्धार्थ होना मेरे लिए बहुत ज़रूरी था-Tawish siddharth

  ये संभव था कि बुद्ध शाक्य रहते हुवे अपने वंश की धार्मिक परंपराओं को मानते हुवे "बुद्धत्व" प्राप्त कर लेते? ये छोड़ना क्यूं ज़रूरी था बुद्ध के लिए? क्यूं ज़रूरी था कि वो एकदम नई यात्रा पर निकलते सत्य की खोज में? क्यूं नहीं वो किसी भी ऋषि या मुनि से योग या वैसी कोई दीक्षा ले कर महल में बैठ कर ही "बुद्धत्व" पा लेते?

अपने कभी सोचा है कि आप का सम्पूर्ण "व्यक्तिव" क्या है? जैसे मैं अगर "ताबिश" हूँ तो ये "ताबिश" कौन है? "ताबिश" दरअसल कुछ भी नहीं सिवाए मेरे अतीत और भूत की "याद" या "स्मृति" के.. ताबिश वो है जो फ़लाने का बेटा है.. वो फलां जगह पैदा हुआ.. फलां स्कूल में पढ़ा और फलां धर्म मानता है.. बचपन से लेकर अब तक कि जितनी स्मृतियां हैं, वो मुझे ताबिश बनाती हैं.. अगर किसी तरह से मेरी याददाश्त चली जाय तो मैं ख़ुद भूल जाऊंगा कि मैं कौन हूँ.. आपको मुझे याद दिलाना पड़ेगा कि "ताबिश तुम्हें याद है हम और तुम वहां साथ जाते थे, उस स्कूल में साथ पढ़ते थे?".. ये अगर मुझे याद न आया तो मेरे लिए तो ताबिश का वजूद ख़त्म होगा ही, आपके लिए भी ताबिश का वजूद ख़त्म हो जाएगा.. क्यूंकि फिर आप जब मुझसे मिलेंगे तो तो नए आदमी से मिल रहे होंगे जिसके पास "ताबिश" की कोई याद नहीं होगी.. आप चाहते हुवे भी ताबिश को दुबारा नहीं पाएंगे
हमारा अतीत और हमारी यादें ही हमें हमारा "व्यक्तित्व" देती हैं.. इसको बड़े पैमाने पर देखें और समाज के परिपेक्ष्य में जाएं तो हर समाज, जाति, धर्म और पंथ का भी अपना एक व्यक्तित्व होता है जो उसके "अतीत" से बनता है.. मुसलमान समाज मतलब वो जो चौदह सौ साल पहले आये पैग़म्बर और उनकी किताब को मानता हो.. उस समाज से "पैग़म्बर" और उनकी किताब का "अतीत" अगर आप ग़ायब कर देंगे तो वो समाज मुस्लिम समाज नहीं होगा, वो कुछ दूसरा हो जाएगा.. ऐसे ही हिन्दू और ऐसे ही अन्य धर्मों के समाज का अपना अतीत है और वही उस समाज का "व्यक्तित्व" बनता है
सत्य की खोज का प्रथम चरण होता है उस "अतीत" से छुटकारा.. जितनी गहराई से आप अपने अतीत से छुटकारा पाएंगे उतनी जल्दी आप सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे.. आपने देखा होगा कि अगर आप किसी गुरु के पास जाते हैं और उसके शिष्य बनते हैं तो वो आपको एक नया "नाम" देता है.. एक नए तरह के कपड़े आपको पहनाएगा.. ये सारी कवायद आपको उस अतीत से बाहर ले जाने की होती है..मगर अगर आप सारी उम्र पूजा करते रहे हैं और आपका वो गुरु भी आपको बस पूजा का नया ढंग बता कर एक नए देवी या एक नए देवता को आपको पकड़ा देता है तो अतीत से छूटने की सारी कवायद बेमानी हो जाती है.. एक ढोंग होता है बस.. उस से ज़्यादा नहीं
बुद्ध इसी लिए अपने शिष्यों या भिक्खुओं को नया नाम देते थे.. नए कपड़े देते थे.. उनके रहन सहन का सारा ढंग बदल देते थे जहां वो पूरी तरह से अपने अतीत से छूट जाएं.. आस्तिक उनके पास आता था तो उस से कहते थे कि "कोई ईश्वर नहीं है".. नास्तिक आता था तो उसे ईश्वर के बारे में बताते थे.. जो व्यक्ति ये मान रहा होता था कि ईश्वर है भी और नहीं भी है उसके सामने ईश्वर के सवाल पर बुद्ध मौन हो जाते थे.. उनका काम था आपको आपके अतीत और मान्यताओं से छुटकारा दिला कर आपको "जाग्रत" करना.. ये बहुत ज़रूरी होता है सत्य की खोज के लिए.. आपको आपके कंफ़र्ट ज़ोन से बाहर लाने के लिए
पंडित अगर पंडित घर में पैदा होकर आध्यात्मिक है तो उसके "बुद्धत्व" पाने की संभावना न के बराबर होती है.. मुसलमान अगर मुसलमान घर मे पैदा होकर मुसलमान बने रहते हुवे "सूफ़ी" बनता है तो उसके "बुद्धत्व" पाने की संभावना नगण्य होती है.. वो बस खेलेगा एक पंथ से दूसरे पंथ.. थोड़ी बहुत विचारधारा का दांव पेंच.. बस.. उसके सत्य खोजने की संभावना "नगण्य" होती है... जो "बौद्ध" पैदा होते हैं वो कुछ ज़्यादा कमाल नहीं कर पाते हैं क्योंकि बुद्धिज़्म उनके लिए उनका "कंफ़र्ट ज़ोन" होता है.. मगर जो सिद्धार्थ पैदा होते हैं उनके बुद्ध बनने की संभावना बहुत बड़ी होती है
ये छोड़ने की परंपरा हमारे लिए ज़रूरी है.. क्योंकि आप जिस किसी भी धर्म और जिस किसी भी कुल में जन्म लेते हैं वो आपका कम्फ़र्ट ज़ोन होता है.. आप इस से बाहर नहीं निकलेंगे जब तक, आप किसी सत्य और किसी बुद्धत्व को पाने के लिए आगे नहीं बढ़ पाएंगे.. इसीलिए ताबिश का सिद्धार्थ होना मेरे लिए बहुत ज़रूरी था क्यूंकि मेरी यात्रा ये नहीं है जो आप फ़ेसबुक देख या जान रहे हैं.. आपकी भी यात्रा ये नहीं होती है.. होती तो आप न नमाज़ पढ़ रहे होते और न पूजा कर रहे होते.. ऐसे ही मुझे स्वयं को खोजना ही था.. चाहे सफ़ल होऊं या असफ़ल.. मगर स्वयं को खोजने के लिए ये पहला क़दम मुझे बढ़ाना ही था

भारतीय सनातन समाज सहज धर्मनिरपेक्षतावादी ही है। -[भाग -1]

मेरा ऐसा मानना है कि अधिकांस प्रबुद्ध भारतीय जन-गण अपने देश और उसके संविधान को सबसे अहम और पवित्र मानते हैं !किन्तु कुछ अपवाद भी हैं। कुछ नागरिक जो भारत में जन्में हैं, भारत में ही पले -बढ़े है वे अपने देश से बढ़कर अपने मजहब को ही बड़ा मानते हैं , कुछ लोग अपने देश के संविधान से ऊपर अपनी जाति -खाप और अपने समाज के दकिनूसी बर्बर उसूलों को ही तरजीह दे रहे हैं। कुछ लोग अपनी तथा कथित पिछड़ी-दलित जाति की वैचारिक संकीर्णता को राष्ट्र से ऊपर मानते हैं। कुछ जातियां ठाकुरों ब्राह्मणों से किसी बात में कमतर नहीं किंतु मंडल कमीशन की गलत व्याख्या के परिणामस्वरूप वे अपने आप को सनातन काल तक पिछड़ा,दलित और महादलित कहलाने के लिए तैयार हैं!

कुछ लोग तो देश से ऊपर आरक्षण और जातीय गिरोहबंदी को भी बड़ा मानते हैं। कुछ लोग अपनी खाप के क़ानून को देश के कानून से भी ऊपर मानते हैं । यदि कोई शख्स इन तत्वो के खिलाफ आवाज उठाये तो असली राष्ट्रप्रेम और असल प्रगतिशीलता वही है। किंतु इन बेहूदा नकारात्मक तत्वों को जिन की देश में भरमार है,उनके वोट की खातिर राष्ट्रीय हित दाव पर लगाने में माहिर हैं!
लोकतंत्र में चुनावी जीत के लिये जाति धर्म मज़हब की फ़िक्र करने मात्र से भारत को चीन- जापान या अमेरिका जैसा ताकतवर नहीं बनाया जा सकता। वर्तमान राजनैतिक बिडंबना यही है कि देश के प्रति जिनको रंचमात्र आश्था नहीं ,वे ही धर्म-जाति -मजहब -खाप -आरक्षण और अलगाववाद की ज्वाला सुलगा रहे हैं। कुछ लोग इन नकारात्मक तत्वों की तुलना 'संघपरिवार ' से कर बैठते है जो की हास्यापद है।
वेशक 'संघी' चिंतन के मूल में फासिज्म की बू आती है। किन्तु 'संघ' की तुलना न तो नक्सलवादियों से की जा सकती है और न ही उनसे जो देश और संविधान से ऊपर अपनी ढपली -अपना राग छेड़ते रहते हैं। अक्सर कहा जाता है कि आईएसआईएस- तालिवान और 'संघ' सभी एक जैसे हैं !क्योंकि ये सभी अमेरिका की खूब आलोचना करते हैं। ये सभी पाश्चात्य सभ्यता के विरोधी हैं।ये सभी मजहबी संगठन अतीतगामी हैं।किन्तु इस दुनिया में भारत के अलावा शायद ही कोई अन्य मुल्क होगा जहाँ के मजहबी बहुसंख्यक लोग सत्ता में आने पर किसी अन्य मुल्क में भी आतंकी कार्रवाइयों में लिप्त न हों।आईएस के बारूद की दुर्गन्ध इराक , सीरिया , लेबनान यमन और लीबिया ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान पाकिस्तान और हिन्दुस्तान तक आ रही है। क्या 'संघ परिवार' का कोई प्रमाण दुनिया में इस प्रकार का है ? भारत में अक्सर धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील चिंतक संघ को ही निशाना बनाते रहते हैं। जबकि अल्पसंख्यक वर्गों के मुखिया खुद ही संघ के सौजन्य और सामाजिक 'समरसता' की तारीफ़ करते रहते हैं। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक लोग 'माकपा' और वामपंथ का उपहास कर रहे हैं। वहां के अधिकांस हिन्दू अब भाजपा की ओर खिसक रहे हैं।अल्पसंख्यक - मुस्लिम केवल ममता का गुणगान कर रहे हैं। क्या वजह है कि न केवल कांग्रेस या वामदल बल्कि अधिकांस धर्मनिरपेक्ष पार्टियों का जनाधार तेजी से खिसक रहा है।
हिन्दुओं के अलावा अन्य मजहबों के लोग अपने सर्वोच्च धार्मिक सत्ता केंद्र से निर्देशित होते हैं। जबकि अधिकांस हिन्दू सहज सरल और धर्मनिरपेक्ष ही होते हैं । भले ही विगत कुछ सालों से 'संघ' परिवार ने हिन्दुओं का राजनैतिक शोषण किया है। किन्तु दुनिया भर में आग मूत रहे हिंसक मजहबी संगठनों के सामने संघ की तस्वीर किसी शुतुरमुर्ग से ज्यादा नहीं है। यही कारण है कि अधिसंख्य हिन्दू का दवाव है कि 'संघ' भाजपा पर लगाम कसके रखे । उसे अपनी अनुषंगी -भाजपा की कटटर कार्पोरेट परस्त नीतियों के विरोध का ढोंग नहीं करना चाहिए। संघ पर हिंदुत्व की प्रगतिशील कतारों का दवाव है कि अपनी छवि को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद सीमित रखे। जो हिन्दू 'संघ ' से जुड़े हैं उन्हें भी यह भी याद दिलाना चाहिए कि वे शहीद भगतसिंह ,आजाद,सुखदेव ,राजगुरु ,सुभाषचन्द्र वोस और उनके साथियों-सहगल- ढिल्लों -शाहनवाज से बड़े देशभक्त नहीं हो सकते। हमारे ये सभी 'नायक' धर्मनिरपेक्षता के तरफदार थे। उनकी तरह का राष्ट्र प्रेम होना या राष्ट्रीय स्वाभिमान होना वेशक बड़े गर्व और प्रतिष्ठा की बात है।किन्तु इन राष्ट्र निर्माताओं के सिद्धांतों की अनदेखी कर या गलत व्यख्या कर अपनी राजनैतिक रोटी सेंकना कहीं से भी युक्तिसंगत नहीं है। यह कृत्य किसी भी तरह से देशभक्तिपूर्ण नहीं कहा जा सकता।
भारत में जबसे मोदी सरकार को लोक सभा में बम्फर बहुमत मिला है। तभी से हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करने का चलन सड़क छाप हो चुका है। इस आरोप पर 'हिंदुत्व' के अलंबरदारों का कुतर्क होता है कि 'सब यही कर रहे हैं '। उनका तर्क है जापानियों ,ज्रर्मनों यहूदिओं ,ईसाइयों ,अंग्रजों और मुसलमानों की तरह हमे भी कौम की कटटरता सीखनी चाहिए। उनका कहना है कि चूँकि भारत के मुसलमान,ईसाई तथा अन्य अल्पसंख्यक वर्ग के लोग अपनी मजहबी सोच के वशीभूत होकर टैक्टिकल वोटिंग किया करते हैं ।चूँकि इमाम बुखारी और ओवैसी जैसे अल्पसंख्यक कतारों के नेता इस्लामिक कटटरवाद में अपना राजनैतिक स्वार्थ साधते रहते हैं। इसलिए हिन्दुओं को भी धर्म-और राजनीति का घालमेल कर सत्ता पर काबिज रहना चाहिए । अव्वल तो कोई भी सच्चा भारतीय[हिन्दू] यह कतई स्वीकार नहीं कर सकता कि अपने अमर शहीदों की 'धर्मनिरपेक्षतावादी' अवधारणा को ध्वस्त करे।दूसरी बात हिन्दुओं को किसी 'विधर्मी' से उसका हिंसक और लूट पर आधारित उधार का ज्ञान लेने की आदत ही नहीं है ! तीसरी बात 'हिंदुत्व' की श्रेष्ठता तो पहले से ही वाकई दुनिया में बेजोड़ है। चूँकि वह क्षमा,करुणा ,परोपकार,सत्य ,अहिंसा ,अपरिग्रह और सहज सहिष्णुता इत्यादि महानतम मूल्यों का उतसर्जक -उत्प्रेरक और धारक है। अतएव इन श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों को ध्वस्त कर राज्य सत्ता प्राप्त करना भारतीय [हिन्दू] परम्परा के अनुकूल नहीं है। जिस तरह एक शुद्ध शाकाहारी हाथी कभी आदमखोर भेड़िया नहीं हो सकता उसी तरह हिंदुत्व जैसी किसी सहिष्णु और उदार चरित्र की हिन्दु कौम को दुनिया के हिंसक -उन्मादी -लम्पट और आवारा कबायलियों जैसा नहीं बांया जा सकता। नहीं किया जा सकता।जो निर्धन गरीब मजदूर -किसान हिन्दू संघ के प्रभाव में आकर भाजपा के साथ चले जाते हैं , जो शोषित -पीड़ित मुस्लिम किसान -मजदूर -कारीगर अपने कठमुल्लों के प्रभाव में-कांग्रेस , मुफ्ती ,मुलायम ,मायावती , ,केजरीवाल ,लालू ,नीतीश और ममता के साथ टैक्टिकल वोट करने में बिखर जाते हैं वे भारत के प्रगतिशील आंदोलन को बर्बाद करने के लिए जिम्मेदार हैं। जो हिन्दू किसी अन्य मजहब या कौम से नफरत करे वो हिन्दू हो ही नहीं सकता। क्योंकि असली हिन्दू जानता है कि "ईश्वर सब में है और सब में सब है " वैसे भी हिन्दू शब्द ही आयातित और परकीय है। वरना भारतीय समाज तो सनातन से सहज धर्मनिरपेक्षतावादी ही है।
श्रीराम तिवारी

रविवार, 28 मार्च 2021

एक फोन काल की दूरी

 स्वाधीन भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है जबकि प्रधानमंत्री जी का अधिकांस समय अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार में व्यतीत हुआ करता है! देश आर्थिक दल दल में धस रहा है,जो किसान अन्नदाता हुआ करता था,वह चार महिनों से सड़कों पर है और 'एक फोन काल की दूरी' अभी तक समाप्त नही है! खुदा खैर करे!

शुक्रवार, 26 मार्च 2021

Happy birth day shri Ratan Tata ji.....jeevet shardah shatam...

 सेवानिवृत्त होने से पूर्व मैने 35 साल तक हर मंच से टाटा बिड़ला की जागीर नही.. हिंदुस्तान हमारा है के नारे लगाये! तब टाटा बिड़ला ही भारतीय पूंजीवाद के प्रतीक माने जाते थे! किंतु जब कुछ नये चोट्टे खरबपति बन गये और टाटा बिड़ला पिछड़ गये तब मुझे यह नारे लगाने में झिझक होऩे लगी!

खैर रतन टाटा बड़े भाग्यशाली निकले क्योंकि वे पहले पूंजीपति थे जिसने सीपीएम को लाखों रुपयों का चंदा चैक से भेजा था! हालाँकि तत्कालीन सीपीएम महासचिव कॉ. हरकिसनसिंह सुरजीत ने धन्यवाद सहित चैक टाटा को वापिस भेज दिया था! उनका तर्क था कि हम वामपंथी पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ हैं, और चूँकि टाटा समूह राष्ट्रीय पूँजीपति वर्ग का हिस्सा है! अत :हम आपसे चंदा नही ले सकते!
वेशक टाटा समूह वामपंथ के साथ नही था ! किंतु रतन टाटा ने वामपंथ का और मजदूरों का हमेशा सम्मान किया!वे अपने कामगारों की नजर में भगवान हैं! आज रतन टाटा जी को उनके जन्म दिन पर उन्हें हार्दिक
बधाई
!
जीवेत शरद:शतम्!

 


कौन कहता है कि मर्द को दर्द नही होता?

 कौन कहता है कि मर्द को दर्द नही होता?

बहुत दर्द होता है मर्द को -
कोई माने या न माने!
घर बना कर भी,
वो कहाँ चैन की नींद सोता है?
अपनी जिम्मेदारियों को समेटने में,
न जाने कितने ख़ुशी के पल वो खोता है!
अपने बदलते नकारात्मक हालातों पर,
और अपनों को कष्ट में देखकर,
हर मर्द को दु:ख होता है

रविवार, 21 मार्च 2021

धर्म मज़हब को धंधा बनाना हाराकिरी है

 *चर्च के पास अरबों डॉलर कहाँ से आए ? मस्जिद के पास अरबों रुपये कहाँ से आये ? मंदिरों के पास अरबों खरबों रुपये का चढ़ावा कहाँ से आया ? यह सब आपका हमारा ही दिया हुआ पैसा है, पर साइंस और रिसर्च के लिए कुछ भी नहीं, आज वैश्विक कोरोना महामारी के समय आपके दिए हुए अरबों खरबों रुपये लेकर यह सारे धर्म स्थान बंद हो गए हैं और अस्पताल खुलें है. सारे *धर्म गुरु* *अपने बिलों में छुप गए हैं और डाक्टरों, नर्सों और अस्पताल के अन्य स्टाॅफ अपनी ज़िन्दगी की परवाह किए बिना काम पर लगे हुए हैं.

दान धर्म बुरा नही है, किंतु कुपात्र को दान और धर्म मज़हब को धंधा बनाना हाराकिरी है! मजहबी भीड़ में शामिल होने से पहले और चंदा देने से पहले अपने दिमाग़ से सोचना ज़रुर कि कोरोना महामारी के इस कठिन समय में आपके साथ कौन खड़ा है?

ईश्वर ने मानो एक संदेश दिया है ;- जय कोरोना

  धन्य है ,कोरोना वायरस, एक झटके में घुटनों पर ला दिया समस्त मानव जाति को। उड़े जा रहे थे, उड़े जा रहे थे । कोई चाँद पर कब्जे की तैयारी कर रहा है तो कोई मंगल पर। कोई सूरज को छूने की कोशिश कर रहा है तो कोई अंतरिक्ष में आशियां ढूँढ रहा है । चीन पड़ोसी देशों की जमीन हड़पने की तैयारी में तो रूस और अमेरिका nuclear power के नशे में पूरे विश्व को ध्वस्त करने की कोशिश में लगे हैं ।

कहीं धर्म के नाम पर नरसंहार चल रहा है तो कहीं जाति के नाम पर अत्याचार ।छोटे छोटे बच्चों के बलात्कार किये जा रहे हैं । मानव जाति तो जैसे समाप्त हो चुकी है ।
ईश्वर ने मानो एक संदेश दिया है - जय कोरोना
"मैंने तो तुम लोगों को रहने के लिए इतनी खूबसूरत धरती दी थी । तुम लोगों ने इसे बर्बाद करके नर्क बना दिया । मेरे लिये तो आज भी सब एक छोटे से प्यारे से परिवार की तरह हो। मुझे नहीं पता कि कहां चीन की सीमा खत्म हो कर भारत की सीमा शुरू होती है । मुझे नहीं पता कि कहां ईरान है और कहां इटली और कहां जर्मनी । ये सब तुम लोगों ने बनाया है ।
मुझे नहीं पता कि कौन ईसाई है, कौन मुस्लिम, कौन हिन्दू, कौन यहूदी और कौन बौद्ध है । मुझे नहीं पता कि कौन ऊँची जाति का है तो कौन नीची जाति का ।
मैंने तो सिर्फ़ इन्सान बनाया था । क्यों एक दूसरे को मार रहे हो? प्यार से नहीं रह सकते क्या? जानते हो कि सब छोड़ कर मेरे पास ही आना है तब भी छीना झपटी, नोचा खसोटी, कत्ले-आम मचा रखा है ।

अभी तो मैंने तीसरा नेत्र थोड़ा सा ही खोला है । संभल जाओ और सुधर जाओ, फिर मत कहना कि मैंने मौका नहीं दिया । एक बार वसुधैव कुटुंबकम की तरह रह कर तो देखो, सब ठीक हो जाएगा ।"
💐💐🌷💖💝💖🌷💐💐

शनिवार, 20 मार्च 2021

राग कोरोना कहर .

जबसे दुनिया में कोरोना मशहूर हो गया!

हर शख्स अपने आप से कुछ दूर हो गया!!
गर्त में सब जा चुके हैं जग के जरूरी काम,
परिंदों का घोंसले में रहना मजबूर हो गया !
कोरोना की कीर्ति जगमें जबसे है चल पड़ी,
सामाजिक सरोकार सब चकनाचूर हो गया!!
इटली,चीन, ईरान,भारत अमेरिका जख्म गहरे,
चंद दिनों में ही हर जख्म नासूर हो गया!
सिर झुकाए सोचते यूरोप,अमेरिका,भारत,
ये कोरोना वायरस क्यों इतना क्रूर हो गया !!

काक: काक : पिक: पिक:!!

 कुछ अनुभवी बुजुर्ग लोगों से सुना है कि *कम बोलने से बहुत सारे मसलें सुलझ जाते है,जीवन निरापद रहता है!

लेकिन आचार्य चाणक्य कह गए हैं कि :-
काक: कृष्ण पिक : कृष्ण ,कोभेद पिक काकयो?
बसंत समये शब्दै काक: काक :
पिक: पिक:!!
मतलब जब तक मौन रहोगे कोयल भी कौआ नजर आएगी! और कौआ कोयल आभासित हो सकता है! किंतु बसंत आने पर वे चुप नही रह सकते इसलिए कौए की पोल खुल जाती है!

ज़िन्दगी बदलने के लिए लड़ना पड़ता है!

 -ज़िन्दगी बदलने के लिए लड़ना पड़ता है!

और आसान करने के लिए समझना पड़ता है!
*वक़्त आपका है,चाहो तो सोना बना लो और*
*चाहो तो सोने में गुज़ार दो..*
*अगर कुछ अलग करना है तो भीड़ से हटकर चलो!*
*भीड़ साहस तो देती है पर पहचान छीन लेती है!*
*मंज़िल ना मिले तब तक हिम्मत मत हारो और ना ही ठहरो..*
*क्योंकि*
*पहाड़ से निकलने वाली नदियों ने आज०त तक रास्ते में किसी से नहीं पूछा कि...*
*"समन्दर कितना दूर है.*

शुक्रवार, 19 मार्च 2021

नाराज़ है... "ज़िन्दगी

 कभी तानों में कटेगी,*

*कभी तारीफों में;*
*ये जिंदगी है यारों,*
*पल पल घटेगी !!*
*-पाने को कुछ नहीं,*
*ले जाने को कुछ नहीं;*
*फिर भी क्यों चिंता करते हो,*
*इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,*
*ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी!*
*बार बार रफू करता रहता हूँ,*
*..जिन्दगी की जेब !!*
*कम्बखत फिर भी,*
*निकल जाते हैं...,*
*खुशियों के कुछ लम्हें !!*
*-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...*
*ख़्वाहिशों का है !!*
*ना तो किसी को गम चाहिए,*
*ना ही किसी को कम चाहिए !!*
*-खटखटाते रहिए दरवाजा...,*
*एक दूसरे के मन का;*
*मुलाकातें ना सही,*
*आहटें आती रहनी चाहिए !!*
*-उड़ जाएंगे एक दिन ...,*
*तस्वीर से रंगों की तरह !*
*हम वक्त की टहनी पर...*,
*बेठे हैं परिंदों की तरह !!*
*-बोली बता देती है,इंसान कैसा है!*
*बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!*
*घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है।*
*संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!*
*-ना राज़* *है... "ज़िन्दगी",*
*ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी"😘
*बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!*
*-जीवन की किताबों पर,*
*बेशक नया कवर चढ़ाइये;*
*पर...बिखरे पन्नों को,*
*पहले प्यार से चिपकाइये !!*

यह राष्ट्रवाद है.

 जब जापान में सुनामी आयी तो एक बूढ़ी औरत वहाँ पर छाते लगाकर कुछ इलेक्ट्रिक सामान बेच रही थी. BBC के रिपोर्टर ने उससे रेट मालूम किए तो अंदाज़ा हुआ कि बूढ़ी औरत मार्केट से सस्ते दाम पर सामान बेच रही है. जब रिपोर्टर ने उस बूढ़ी औरत से उसकी वजह पूछी तो उसने कहा कि मैं मार्केट से होलसेल पर सामान लाती हूँ और अपने मुसीबत में फंसे लोगों को उसी रेट पर सामान बेच देती हूँ. यह मेरा, मेरे देश के लिए योगदान है. यह राष्ट्रवाद है.

हमारा राष्ट्रवाद नारे लगाने भर का है. हैंड सेनिटाईज़र और फ़ेसमास्क हमारे यहाँ दस गुना क़ीमत पर मिल रहे हैं. जरा सी अफ़वाह उड़े तो पड़ोस की दुकान पर आटा, चावल, दाल की दरों में बढ़ोतरी हो जाती है. हद तो यह है कि उत्तराखंड में बाढ़ में फँसे लोगों को आसपास के गाँव वालों ने 500-500 रुपये की एक पानी की बोतल बेची थी. 26 जुलाई की बाढ़ में फंसे लोगों को अपने घर संपर्क करने के लिए फोन बूथ वाले एक कॉल करने के 10 से 20 ₹ तक लिए थे.
सत्यता यही है कि हम सब मुनाफ़ाखोर और संवेदनहीन हो गए है. हमारा राष्ट्रवाद किस काम का यदि हम अपने समाज को बुरे समय में सहायता न करें.

गुरुवार, 18 मार्च 2021

*100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए*

1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।

2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है ।
3. *हाई वी पी में* - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।
4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।
5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी ।
6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं
7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी ।
8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन , कैल्शियम की कमी ।
9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* ।
10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* ।
11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी ।
12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।
14. *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है ।
16. *अस्थमा , मधुमेह , कैंसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।
17. *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।
18. *परम्परायें* वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
19. *पथरी* - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है ।
20. *RO* का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है ।
21. *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
22. *पेट के बल सोने से* हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।
23. *भोजन* के लिए पूर्व दिशा , *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
24. *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
25. *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
26. *चीनी* के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है ।
27. *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
28. *वात* के असर में नींद कम आती है ।
29. *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।
30. *कफ* के असर में पढाई कम होती है ।
31. *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है ।
33. *आँखों के रोग* - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।
34. *शाम को वात*-नाशक चीजें खानी चाहिए ।
35. *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए* ।
36. *सोते समय* रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
37. *व्यायाम* - *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम , *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
38. *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
39. *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
40. *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है , मालिश से *वायु* शांति होती है , उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास* ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।
41. *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।
42. *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों ,
43. *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
44. *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
45. *छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।*
46. *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
47. *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।
48. *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
49. *भोजन के पहले* मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।
50. *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें ।
51. *अवसाद* में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है
52. *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
53. *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
54. *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
55. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
56. *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
57. *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।
58. *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।
59. *अस्थमा में नारियल दें ।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
60. *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।
61. *दूध* का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
62. *गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।*
63. *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए
64. *गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।*
65. *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।
66. *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।
67. *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।
68. *भोजन के* बाद बज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है ।
69. *भोजन* के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।
70. *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है
71. *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें
72. *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।
73. *रास्ता चलने*, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।
74. *जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।*
75. *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।
76. *स्वस्थ्य व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।
77. *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
78. *सुबह के नाश्ते* में फल , *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए ।
79. *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।
80. *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।
81. *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए ।
82. *जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।*
83. *जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।*
84. *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।
85. *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।
86 . *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग ।
87 . *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए
88. *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है ।
89. *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।
90. *चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।*
91. *गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।*
92. *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है ।
93. *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा
94. *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए*।
95. *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।
96. *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।
97. *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है*।
98 . *तेज धूप* में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है
99. *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात, पित्त , कफ* तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।
100. इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा। लार* है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूके ।

बुधवार, 10 मार्च 2021

क्रांतिकारी विचारधारा कभी अप्रासंगिक नही होती"

 अस्सी के दशक में ट्रेड यूनियंस के ज़रिये मार्क्सवाद से मेरे परिचय के बाद से मेरा झुकाव बढ़ता चला गया!नई आर्थिक नीतियों और वैश्वीकरण/भूमंडलीकरण के विरोध में उठे जनांदोलनों से जुड़ाव ने मजदूर किसान के हितों के साथ संबंधों को जहाँ मज़बूती प्रदान की,वहीं साम्प्रदायिक और जातिवादी राजनीति के उभार के विरोध में वामपंथ को सिरमौर देख उसकी नीतियौं को ह्रगयगम्य कर लिया!

आज वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में जब आवारा पूँजी के भूखे भेड़ियों और मध्ययुगीन मजहबी धर्मांध कूप मंडूकों ने अपनी हबस के कारण दुनिया में कट्टर पूंजीवादी शासकों को सत्ता में प्रतिष्ठित किया है,तब मार्क्सवादी विचारधारा की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।
कार्पोरेटवाद,अंधराष्ट्रवाद के दौर में दुनिया भर में साम्यवाद का 'अंतर्राष्ट्रीयतावाद' सिद्धांत हासिये पर है! इसलिये जन संघर्ष की जिम्मेदारी है कि मध्यम वर्ग और आम जनता के दिमाग में सामंप्रदायिक तत्वों द्वारा भरे गये जहर को मारने के लिये अलगाववादियों और आतंकियों के खिलाफ भी लड़े और खुद भी राष्ट्रवादी शब्दावली का प्रयोग करें!
ऐसे दिग्भ्रमित दौर में वैचारिक साम्य वाले प्रगतिशील एवं रचनात्मक लोगों को अलग अलग झंडे और खेमे बनाये रखने के बजाय मिलकर प्रतिरोध की आवाज़ बुलंद करना अत्यंत आवश्यक हो गया है! बहुसंख्यक समाज को यह नही लगना चाहिये कि वामपंथी दल केवल अल्पसंख्यक वर्ग के हितैषी हैं! इसके अलावा वामपंथ को अपने पुराने पेंडिंग लोकप्रिय जनहितैषी कार्यक्रम एवं नीतियाें से नई युवा और सुशिक्षित पीढ़ी को भी परिचित कराना चाहिये!

गीता के किस अध्याय और श्लोक में लिखा है कि धन्ना सेठों का साथ दो और मजूर किसान को बेमौत मरने दो?

 श्रीमद्भगवद्गीता की जब कोई खास शख्स तारीफ करता है,तो मुझे अच्छा लगता है! क्योंकि मैं भी भगवद् गीता का प्रशंसक हूँ! और इसीलिए मैं 7 साल की उम्र से नियमित पढ़ रहा हूँ! गीता के किसी भी श्लोक पर मैं कम से कम एक घंटा बोल सकता हूँ! जब तक जीवित हूँ, तब तक गीता पढ़ता रहूंगा! और उस पर अमल करने की भी निरंतर कोशिश करता रहूंगा! दरसल भगवद् गीता कोई स्वतंत्र रचना नही है अपितु इसे महान कालजयी ग्रंथ महाभारत के भीष्म पर्व से उद्धृत किया गया है, यह वेदों उपनिषदों का सार है, ब्रह्मज्ञान है! किसी ने बहुत सही कहा है :-

"सर्व उपनिषद गावो गोपाल नंदन :"
हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी ने आज
भगवदगीता की जो प्रशंसा की उससे मैं पूर्णत: सहमत हूँ! किंतु उन्होंने गीता की जो व्याख्या की उससे गीता का कोई लेना देना नही! इससे अच्छी तारीफ तो महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक,बिनोबा भावे,प्रो.मैक्स मूलर,भगतसिंह,आजाद,पं.नेहरु जार्ज बर्नाड शा,फादर कामिलबुल्के,रस्किन बांड,श्रीपाद अम्रत डांगे और कामरेड नम्बूदिरीपाद करते रहे हैं! वे सिर्फ तारीफ ही नहीं,बल्कि जीवन में आचरण भी करते रहे हैं!
सवाल उठता है कि श्री मोदीजी ने अपने जीवन में गीता का अनुसरण कब कहां किया?सवाल उठता है कि गीता के किस अध्याय और श्लोक में लिखा है कि धन्ना सेठों का साथ दो और मजूर किसान को बेमौत मरने दो?
मोदीजी के जीवन में ज्ञान -कर्म -सन्यास का कब कहां उद्दीपन हुआ ? और वे गीता के किस सिद्धांत या दर्शन के अनुशीलन कर्ता हैं? गीता के 18 अध्याय और 700 श्लोकों में से कोई एक बताएं, जिस पर भाजपा और मोदी जी अमल कर रहे हैं?
दरसल देश की जनता ने उन्हें भगवदगीता की तारीफ के लिये नही चुना,बल्कि कांग्रेस की काली करतूतों से परेशान होकर, अन्ना हजारे, बाबा रामदेव और भाजपा के अतिरंजित दुष्प्रचार के झांसे में आकर भाजपा को सत्ता में बिठाया है और मोदी जी को पी एम बनाया है! नौजवानों को गीता तो गीता प्रेस गोरखपुर वाले और इस्कान वाले पढ़ा ही रहे हैं,मोदीजी का काम है,कि आर्थिक और सामाजिक असमानता मिटाने के लिये अपने घोषित चुनावी एजेंडे पर अमल करें! गीता पढ़ाने और उसकी महिमा गाने के लिये इस देश में 5 करोड़ परजीवी साधु संत मौजूद हैं! जय श्री कृष्ण