सोमवार, 28 मार्च 2022

डर लगता है।

 *आमाशय*(જઠર) को डर लगता है जब आप सुबह का नाश्ता नहीं करते हैं।

*किडनी* को डर लगता है जब आप 24 घण्टों में 10 गिलास पानी भी नहीं पीते।
*गाल ब्लेडर*(પિત્તાશય) को डर लगता है जब आप 10 बजे रात तक भी सोते नहीं और सूर्योदय तक उठते नहीं हैं।
*छोटी आँत* को डर लगता है जब आप ठंडा और बासी भोजन खाते हैं।
*बड़ी आँतों* को डर लगता है जब आप तैलीय मसालेदार और मांसाहारी भोजन करते हैं।
*फेफड़ों* को डर लगता है जब आप सिगरेट और बीड़ी के धुएं, गंदगी और प्रदूषित वातावरण में सांस लेते है।
*लीवर* को डर लगता है जब आप भारी तला भोजन, जंक और फ़ास्ट फ़ूड खाते है।
*हृदय* को डर लगता है जब आप ज्यादा नमक और केलोस्ट्रोल वाला भोजन करते है।
*पैनक्रियाज*(સ્વાદુપિંડ) को डर लगता है जब आप स्वाद और फ्री के चक्कर में अधिक मीठा खाते हैं।
*आँखों* को डर लगता है जब आप अंधेरे में मोबाइल और कंप्यूटर के स्क्रीन की लाइट में काम करते है।
और
*मस्तिष्क* को डर लगता है जब आप नकारात्मक चिन्तन करते हैं।
आप अपने तन के कलपुर्जों को मत डरायें ।
ये सभी कलपुर्जे बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
जो उपलब्ध हैं,
वे बहुत महँगे हैं और शायद आपके शरीर में एडजस्ट भी न हो सकें।
इसलिए अपने शरीर के कलपुर्जों को स्वस्थ रखे।

शनिवार, 26 मार्च 2022

2024 के लोकसभा चुनाव में, भाजपा की यूपी में बम्फर जीत होगी!

 जिनके पास बेहतरीन विचारधारा है,जिनके पास व्यक्ति,समाज,प्रदेश और राष्ट्र को आगे ले जाने का ठोस कार्यक्रम है,जिनके पास बेहतर नीतियां हैं,उनके उम्मीदवार इस दौर के चुनाव में जमानत भी नही बचा पाते!

इन तमाम हरल्ले दलों को चाहिये कि मोदी योगी,अमित शाह या भाजपा की निंदा करने के बजाय,उनकी राजनैतिक सफलता और लोकतंत्र में उनके वास्तविक सामाजिक समभाव से सबक सीखना चाहिये! मैने फेशबुक पर यूपी विधान सभा चुनाव से पूर्व अनुमान व्यक्त किया था कि बसपा साफ होगी,सपा हॉफ होगी एवं योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने रहेंगे! जो लोग नियमित रूप से मेरी पोस्ट पढ़ते हैं, वे गवाह हैं कि जो कहा ,वही हुआ! इसका अभिप्राय यह नही कि यह मेरी आकांक्षा थी बल्कि यह यथार्थ बोध कहा जा सकता है!
आज यूपी मंत्रिमंडल शपथ समारोह में नव मंत्रिमंडल के चेहरे देखकर मैं दावे से कह सकता हूँ कि 2024 के लोकसभा चुनाव में, भाजपा की यूपी में बम्फर जीत होगी!
क्योंकि भाजपा ने दलित पिछड़े,अगड़े, तगड़े-बनिया, ठाकुर निषाद,बाल्मीकि और ब्राह्मण एक मंच पर जमा कर लिये हैं!
एक खास जाति वाले,अल्पसंख्यकों को हिंदुओं सै लड़ाकर, भारतीय समाज में जहर घोलने वाले,सैफई वाले,कैराना वाले,रामपुर कन्नौज वाले आइंदा 30 साल तक सत्ता में नही आ सकेंगे!
केवल कांग्रेस और कम्युनिस्ट ही भाजपा का विकल्प बन सकते हैं! बशर्ते वे हिंदू मुस्लिम में फर्क करने के बजाय, अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक की राजनीति करने के बजाय, भाजपा की तरह वास्तविक धर्मनिर्पेक्ष नीति का अनुशरण करें! और तथाकथित किसी टुकड़ टुकड़े गैंग का समर्थन करने के बजाय आतंकवाद की खुलकर निंदा करें! कश्मीरी हिंदुओं की दुर्दशा का मजाक उड़ाने के बजाय उन पर हुए अत्याचार के लिये आँसू बहायें तो शायद भाजपा को हराया जा सके!
भाजपा के रूप में चुनाव जीतकर सत्ता में आने वाले संगठित हिंदू समाज को आप आँदोलन,हड़ताल और जुलूस से नही हरा सकते! जब तक गरीब हिंदू या मुसलमान लोकतंत्र या धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर नही बल्कि अपनी कौम के नाम पर वोट देते रहेंगे, तब तक किसान मजदूर सर्वहारा की एकता असंभव है और बिना सर्वहारा की एकता के वर्तमान हिंदुत्ववादी पूँजीवाद को हरा पाना असंभव है! भारत में कोई क्रांति तभी सफल हो सकेगी,जब क्रांतिकारी लोग भारतीय अस्मिता और भारतीय बहुसंख्यक समाज का आदर करना सीख लेंगे! कोरी शाब्दिक लफ्फाजी से द्वंदात्मक संघर्ष तेज नही होगा! यह पूँजीवाद और उग्र राष्ट्रवाद एक आग का दरिया है, इसमें कई पीढ़ियों को डूबकर जाना होगा,तब शायद सपनों का सर्वप्रिय समाज और राष्ट्र बन पाएगा!
बहरहाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गये उत्तरप्रदेश के नये मंत्रिमंडल को
बधाई
! योगीजी और मोदी जी को
बधाई
!


टैक्टिकल वोटिंग

 कांग्रेस की लगातार हो रही हार का कारण सिर्फ परिवारवाद,जातिवाद और भ्रस्टाचार ही नही है! बल्कि अतीत में भारत समेत शेष विश्व में इस्लामिक आतंकवाद ने जो कहर बरपाया है,उसी मजहबी उन्माद का परिणाम है कि भारत में कांग्रेस और वाम धर्मनिर्पेक्ष दलों की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज हुई है !

भारत की निरीह अहिंसक जनता ने मजहबी आतंकवाद का जो दंश भोगा है, कश्मीरी हिंदूओं का जो कत्लेआम हुआ है और यूपी समेत पूरे भारत में विदेशी ऐजेंटों की करतूत से भारतीय समाज में जो अलगाव और वर्ण संघर्ष तेज हुआ है,उसीके आक्रोष ने भाजपा को सत्ता में बिठाने का काम किया है!
बाबा रामदेव,अन्ना हजारे के छद्म आंदोलन, संघ की अनवरत चुनावी तैयारी,रथयात्राएं, और *रामलला मंदिर* ये सब तो भाजपा की जीत के निमित्तमात्र हैं! दरसल कांग्रेस और वामपंथ को हरवाने में इस्लामिक आतंकवाद और अल्पसंख्यक वर्ग की टैक्टिकल वोटिंग का विशेष हाथ रहा है ! बंगाल में वामपंथ ने अल्पसंख्यसकों के लिये क्या नही किया? किंतु वाम को छोड़ ममता के साथ हो लेना अल्पसंख्यक वर्ग की टैक्टिकल वोटिंग का जीवंत प्रमाण है!

बुधवार, 23 मार्च 2022

भारतीय युवा पीढ़ी को मंडूक बना कर रख दिया है

 आधुनिक युवाओं को शहीद भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे महान संघर्षशील शहीदों के क्रांतिपथ और व्यवस्था परिवर्तन के सिद्धांत-सूत्रों के बारे में पर्याप्त जानकारी नही है ! यदि होती तो आज लाखोंकी संख्या में शहीदों की मजारों पर,उनकी मूर्तियों के समक्ष लाखों युवाओं की भीड़ होती! और आसमान में इंक्लाब जिंदाबाद का नारा गूँजता !

शहीदों के बारे में किसी को यदि न्यूनाधिक ज्ञान है भी,तो उन्हें शहीदों के त्याग-बलिदान मानवीय मूल्य और क्रांतिकारी साधन बहुत जटिल और डरावने मालूम पड़ते हैं! निहित स्वार्थ लिप्त बुर्जुवा वर्ग की प्रतिस्पर्धात्मक जीवन शैली और आधुनिक भारत के क्षेत्रिय भाषायी युवाओं की साम्प्रदायिकता एवं जातीय सामाजिक आरक्षण व्यवस्था ने अपने प्रभाव से भारतीय युवा पीढ़ी को मंडूक बना कर रख दिया है!
लालू, मुलायम परिवार मायावती,अखिलेश, ममता,नवीन पटनायक,नीतीष,बादल,ठाकरे, करुणानिधी,देवैगोड़ा,पासवान,चंद्रबाबू जैसे विचारधारा विहीन नेताओं ने कभी भूल से भी शहीदों का नाम नहीं लिया! इन लोगों ने जिस तरह की कुटिल राजनीति की है उससे भगतसिंह जैसे महान क्रांतिकारी के विचारों का दूर दूर तक कोई लेना देना नही है!
इसी तरह उत्तरभारत के अधिकांस हिंदी भाषी आधुनिक युवाओं को अमर शहीदों के क्रातिकारी विचार या तो विदित ही नहीं या व्यवहारिक जमीन पर 'दूर के ढोल सुहावने' जैसे लगते हैं।इसीलिये अधिकांस आधुनिक उत्तर भारतीय युवा-खास तौर से जन्मना हिन्दू युवा जय श्राराम का नारा लगाते लगाते हर हर मोदी- घर घर मोदी के नारों में लीन हो गये! धीरे धीरे ये हिंदू युवा भाजपा की राजनैतिक नाव पर सवार होकर किसी खास नेता के अँधभक्त हो गये !
यह युवावर्ग मोदी जी के विकासवाद और चाय,पकौड़ा बनाम झाड़ू,और चौकीदारी से आगे नही सोच पा रहा है ! उनका अभीष्ट केवल रामलला मंदिर पुर्निर्माण मात्र नही था,बल्कि इस बहाने हिंदुत्व का ध्रुवीकरण करते हुए, उसके बलबूते पर सत्ताहस्तांतरण करने का लक्ष्य था !
दुनिया का आधुनिक उच्च तकनीकि में दक्ष युवा अपने अपने सपनों का देश बनाने में जुटा है,किंतु भारतीय हिंदू युवा एक भयंकर अनजानी राह पर आगे बढ़ने का ख्वाब देख रहा है।भले ही यह मोदीयुगीन नाव कहीं भी न जाती हो, या किसी अज्ञात भंवर की ओर ही ले जाती हो ! इसीलिये यह बहुत जरुरी है कि आधुनिक युवा वर्ग शहीद भगतसिंह को पढ़े,समझे और अपना आदर्श भी बनाये !


पुतिन -जेलेंस्की नल्ले नल्ले!

 रंगपंचमी पर हो गई रंगों की भरमार बल्ले-बल्ले।

दिनमें होली-रात दीवाली राजनीति के हल्ले हल्ले!!
विश्वयुद्ध पर आमादा पुतिन -जेलेंस्की नल्ले नल्ले!
यूक्रेन रूस की जंग देख सक्रिय हैं बाजार के दल्ले !
रूसी क्रूड़ आयल मिला भारत को सस्ता बल्ले बल्ले!
क्यों हुए गैस डीजल पेट्रोल मंहँगे,बात पड़ी न पल्ले!!
श्रीराम तिवारी

गयी भैंस जब पानी में !

 भारतवर्ष की सही दिशा है,

भगतसिंह की वाणी में !
माल समेटकर भागे चोट्टे ,
रिजर्व बैंक हैरानी में!!
मंद-मंद मुस्कराएं हुक्मराँ,
गयी भैंस जब पानी में !
सुरा सुंदरी माल मुल्क का,
चौकसी माल्या ब्रितानी में !!
तब ईपीएफ का पैसा डूबा,
कामगारों की नादानी में !
अब अच्छे दिन हैं रंग रंगीले,
और भ्रस्टाचार मस्तानी में।
बेकारी का काल सर्प है,
मुफ्तखोरी की छानी में !!
लुटिया डूबी लोकतंत्र की ,
दल -दल की नादानी में !
जाति मजहब उन्माद बढ़ा,
चुनावी वोट बैंक शैतानी में !!
कॉरपोरेट पूँजी के जलवे,
निजीक्षेत्र कारस्तानी में!
निर्धन -निबल लड़े आपस में,
धर्म-जाति की सानी में!!
भारतवर्ष की सही दिशा है,
भगतसिंह की वाणी में !
अमर शहीदों का बलिदान,
संघर्षों की अमर कहानी में !!
श्रीराम तिवारी

सोमवार, 21 मार्च 2022

*हर शख्स अपने आपसे कुछ दूर हो गया! *

 कोविड ओमिक्रान वायरस मशहूर हो गया!

हर शख्स अपने आप से कुछ दूर हो गया!!
लॉकडाउन में पिछड़ गए सबके जरूरी काम,
परिंदा भी घोंसलेमें रहने को मजबूर हो गया !
कोरोना का खौप दुनिया में जब से है चल पड़ा,
सामाजिक सरोकार सब चकनाचूर होगया!!
इटली,चीन,ईरान,भारत,ब्राजील,यूके-यूएसए,
सारी दुनिया में बूहान का लैब मशहूर हो गया!
दुनियाके वैज्ञानिक खोजते रहे वायरस का टीका,
किंतु कोरोना वायरस पहले से भी क्रूर हो गया !!
हानि लाभ जीवन मरण जश अपजश विधि हाथ,
मानों कार्य कारण का सिद्धांत नामंजूर हो गया!!
:- श्रीराम तिवारी

न रहेगा बाँस और न बजेगी बाँसुरी"

 एक बार आचार्य महीधर अस्वस्थ हो गए। उनके आश्रम के शिष्य अनुष्ठान करने प्रयाग गए थे। कोई औषधि लाने वाला नहीं था। आचार्य रोग की प्रर्बलता और आलस्य के कारण आश्रम से बाहर जाना नहीं चाहते थे। उन्होंने सोचा कि भगवान कृष्ण से प्रार्थना की जाए, वे अवश्य ही ठीक कर देंगे।

आचार्य ने काठ की एक मूर्ति का मनोहारी श्रृंगार किया और विधिवत उपासना करने के बाद प्रार्थना की कि हे कृष्ण, आप मुझे स्वस्थ कर दें। भगवान ने तथास्तु कहा और आचार्य ठीक हो गए।
कुछ समय बीता। आचार्य फिर से बीमार पड़ गए। इस बार भी उन्होंने पहले की ही तरह काठ की मूर्ति का श्रृंगार किया और पूजा करने के बाद प्रार्थना की कि हे कृष्ण! आप मुझे स्वस्थ कर दें। इस बार प्रार्थना सुन कर श्रीकृष्ण स्वयं ही प्रकट हो गए। और नाराज हो कर कहा कि
" जितना समय और श्रम मूर्ति को सजाने और पूजा-अर्चना करने में लगाया,उससे कम परिश्रम में वैद्य के पास जाया जा सकता था ! आइंदा पूजा पाठ उपासना कर फिर से मुझे परेशान किया,तो मैं तुम्हें वहीं बैकुण्ठ या (गोलोकधाम) बुला लूँगा! फिर तुम्हारी यह बार बार बीमार होने वाली भौतिक देह यहीं छूट जाएगी!"
"न रहेगा बाँस और न बजेगी बाँसुरी"
Honey Tiwari, Sabita Singh and 4 others

रविवार, 20 मार्च 2022

E. M. S. Namboodiripad

 सर्वहारा वर्ग के महानायक ,महामानव महान क्रांतिकारी,दुनियाके इतिहास में सबसे पहले निर्वाचित वामपंथी मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) के पूर्व महासचिव कॉ. E. M. S. Namboodiripad की पुण्यतिथि पर सादर नमन!

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