सोमवार, 26 अप्रैल 2021

जब लूटना ही था तो दिया क्यों?

 एक बार चम्बल में कुछ डकैतों ने कवि संमेलन करवाया!जब कवि संमेलन खत्म हुआ तो डकैतों ने कवियों को खूब धन और जेबरात दिये!जैसे ही कवि डकैतों की सरहद से बाहर हुए,वैसे ही डकैतों ने उनको लूट लिया और जो उनको दिया था वो तो लूटा ही उनके कपड़े और घड़ी चैन भी लूट लिये ......

कवि पुन: डकैतों के पास पहुंचे और उन्होंने पूछा- जब लूटना ही था तो दिया क्यों?
डकैत बोले:- पैसे देना हमारा फर्ज था और लूटना हमारा profession.....
नोट :-इसका बढ़ी हुई मेंहगाई के दौर में कर्मचारियों के महंगाई भत्ता रोके जाने से कोई संबंध नही !

अविद्या का रहस्य

 

एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा की बीरबल यह #अविद्या क्या है ?*
बीरबल ने बोला कि आप मुझे 4 दिन की छुट्टी दे दो फिर मैं आपको बताऊंगा !
अकबर राजी हो गया और उसने चार दिनों की छुट्टी दे दी !
बीरबल #मोची के पास गया और बोला कि भाई जूती बना दो,मोची ने नाप पूछी तो बीरबल ने बोला भैया ये नाप वाप कुछ नहीं। डेढ़ फुट लंबी और एक बित्ता चौड़ी बना दो,और इसमें हीरे जवाहरात जड देना,,सोने और चांदी के तारों से सिलाई कर देना और हाँ पैसे की चिंता मत करना जितना मांगोगे उतना मिलेगा।
मोची ने भी कहा ठीक है भैया तीसरे दिन ले लेना !
तीसरे दिन जूती मिली तब पारितोषिक देने के पहले बीरबल ने उस मोची से एक ठोस #आश्वासन ले लिया कि वह किसी भी हालात में इस जूती का कभी भी जिक्र नहीं करेगा यानि हर हालात में अनजान बना रहेगा ।
*अब बीरबल ने एक जूती अपने पास रख ली और दूसरी #मस्जिद में फेंक दी । जब सुबह #मौलवी जी नमाज पढ़ने (बाँग देने ) के लिए मस्जिद गए तो मौलवी को वो जूती वहाँ पर मिली।
मौलवी जी ने सोचा इतनी बड़ी और शानदार जूती किसी इंसान की तो हो ही नहीं सकती जरूर अल्लाह मियां नमाज पढ़ने आया होंगे और उसकी छूट गई होगी।*
उसने वह जूती अपने सर पर रखी, मत्थे में लगाई और खूब जूती को चाटा ।
*क्यों ?*
*क्योंकि वह जूती अल्लाह की थी ना ।*
*वहां मौजूद सभी लोगों को दिखाया सब लोग बोलने लगे कि हां मौलवी साहब यह जूती तो अल्लाह की रह गई उन्होंने भी उसको सर पर रखा और खूब चाटा।*
*यह बात अकबर तक गई।*
*अकबर ने बोला, मुझे भी दिखाओ ।*
*अकबर ने देखा और बोला यह तो अल्लाहमियां की ही जूती है।*
*उसने भी उसे खूब #चाटा, सर पर रखा और बोला इसे मस्जिद में ही अच्छी तरह अच्छे स्थान पर रख दो !*
*बीरबल की छुट्टी समाप्त हुई, वह आया बादशाह को सलाम ठोका और उतरा हुआ मुंह लेकर खड़ा हो गया।*
*अब अकबर ने बीरबल से पूछा कि क्या हो गया मुँह क्यों 10 कोने का बना रखा है।
बीरबल ने कहा जहाँपनाह हमारे यहां चोरी हो गई,,
अकबर ने पूछा- क्या चोरी हो गया ?
बीरबल ने उत्तर दिया - हमारे #परदादा की जूती थी चोर एक जूती उठा ले गया । एक बची है,
*अकबर ने पूछा--क्या एक जूती तुम्हारे पास ही है ?
*बीरबल ने कहा - जी मेरे पास ही है ।उसने वह जूती अकबर को दिखाई । अकबर का माथा ठनका और उसने मस्जिद से दूसरी जूती मंगाई और बोला *या अल्लाह मैंने तो सोचा कि यह जूती अल्लाह की है मैंने तो इसे चाट चाट के चिकनी बना डाली*
बीरबल ने कहा यही *अविद्या* है
पता कुछ भी नहीं और भेड़ चाल में जूती को चाटे जा रहे हैं,,
अपनी बात खुलकर कहो ..
जोर से कहो ..दम से कहो , सच को कहो ..... पार्टी , संगठन के हम बंधुवा नहीं हैं ।
नोट--इस कहानी का CAA और NRC का विरोध करने वालों से पूरा पूरा लेना देना है,,,

ये राजनीति करने का वक्त नही है!

 अव्वल तो बेईमान चोट्टे लोग राजनीति में घुस कर शासक बन बैठते हैं, आपदा निवारण में भयंकर लापरवाही कर बैठते हैं ! जनता उन्हें यदि आइना दिखाए तो वे सच के सामने लाजबाब हो जाते हैं!तब बचाव की मुद्रा में उनका तकिया कलाम होता है- "ये राजनीति करने का वक्त नही है!"

जबकि वे खुद रात दिन सत्ता की चुनावी राजनीति में व्यस्त रहते हैं!

 आशाजनक संदेश है कि अमेरिका, इंग्लैंड,यूरोप,चीन,

पाकिस्तान तथा दुनिया के अधिकांस देशों ने कोरोनाग्रस्त भारत की स्थिति को गंभीरता से लिया है! और सभी ने हमें मदद की पेशकश की है!चूंकि हमारे मुल्क के सत्ताधारी रहनुमा संकट से निपटने में बुरी तरह नाकामयाब रहे,अत: फासिस्ट
अंधभक्त उनको बचाने के लिये मुँहजोरी करने लगे हैं! जबकि भारत को बाकई मदद की सख्त दरकार है! भारत में ऐंसा कोई अस्पताल नहीं,ऐंसा कोई शहर नही,जहां चीत्कार न मचा हो!जहां हाहाकार न मचा हो! इस दारुण द्रश्य को देखकर भी कुछ जड़मति बेशर्म लोग सत्ता की पैरवी कर रहे हैं ! वे मरणासन्न विपक्ष का उपहास कर रहे हैं! जबकि मामूली अक्ल वाला भी जानता है कि सारे पॉवर सरकार के पास होते हैं, विपक्ष तो केवल सवाल कर सकता है या सुझाव दे सकता है! आंदोलन कर सकता है!

बहुत भयानक है,मंजर दुआ कीजिये!!

 कोई क़िस्त बाकी है जो अदा नहीं !

साँसे तो बाक़ी हैं लेकिन हवा नहीं !!
नसीहतें, सलाहें, हिदायतें तमाम हैं,
डॉ.प्रिस्क्रिप्शन भी है पर दवा नहीं !
नाक मुँह क्या आँख भी ढक लीजिये,
बहुत भयानक है,मंजर दुआ कीजिये!!
जिम्मैदार हैं जो कोरोना संकट के लिये,
सलामत वे भी नही यह मान लीजिये!
करते रहे कुदरत से निरंतर छेड़छाड़ नादां,
गुनहगार वे और हमसब समझ लीजिये!!
🙏🌹

अंगारक " ( कोरोना ) के इस दौर में ,

  अंगारक " ( कोरोना ) के इस दौर में ,

राजनेताओं की बेशर्म बेहयाई !
चुनाव की खातिर देश को झोंक दिया भट्टी में !
जनता हार रही जीवन ,
जीवन यापन का हर साधन !
अरबों उड़ गए बन कर धुआं
वोटों की जुगत और रैलियों
में !
इफ्तारों की दावतों ,
नमाज़ों की भीड़ों ने कर दिया
कोरोना का काम आसान !
बचा खुचा अनुष्ठान कर गया पूर्ण कुम्भ महान !
जो नित हो रहे काल कवलित छोड़
आश्रितों की भीड़
महान !
क्या कुछ धन जीवनयापन को
इनको भी देंगे ये
सत्तालोभी नेता असुरसमान ?
इनके ही जैसे नराधम आज बैठे दवाखानों अस्पतालों में !
बेच रहे जीवन रक्षक दवाएं ,
साधन मनमाने क्रूर दामों
में !
हद तो ये तड़प रहे लोग चंद सासों को
और ये बन्द करके
दरवाज़े बैठ गए तालों में !
आज तक हम लड़ते आये मंदिर मस्जिद नदी औ तालाबों पे !
अब वक्त है साथ उठो आवाज़ उठाओ इनसे छीन कर
लाओ जीवनदायी दवाएं ,
साधन दवाखानों ,अस्पतालों पे !
अफसोस ये नराधम तो हमने ही पैदा किये हैं जो कुचल
रहे हमारे ही अरमानों को !
कब ऊपर उट्ठेगे हम नफरतों के फरमानों से ?
जागो आवाज़ ए हक़ बुलन्द करो बचालो अपने तबाह
होते जन्नत से आशियाने को !
यही आखिरी तदबीर अब बाकी है उतार फेंकने को
कायर बेशर्माई !
" अंगारक " ( कोरोना ) के इस दौर में राजनेताओं की
बेशर्म बेहयाई .....

*विनाशकाले विपरीत बुद्धि*

 कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने दुनिया में जितनी जाने लीं,उतनी अकेले भारत ने खो दीं हैं!यह भारतीय इतिहास की सबसे दारुण और शर्मनाक स्थिति है! किसी एक व्यक्ति के भरोसे सरकार चलाने का यह भयानक नतीजा है! *विनाशकाले विपरीत बुद्धि*

रविवार, 25 अप्रैल 2021

कश्तियाँ खड़ी कर दो दरिया किनारे पर

 जिंदगी फिर न बटोर सकोगे बिखर जाने के बाद !

फिर न लौटे सकोगे महफ़िलमें ठुकराये जानेके बाद !!
वक़्त रहते कश्तियाँ खड़ी कर दो दरिया किनारे पर,
वर्ना हटा न सकोगे इन्हें तूफान आ जाने के बाद!
डरावनी ख़बरें हैं दुनियां में आजकल कोरोना की,
रोज बढ़ता जाता है बी.पी.अखवार पढ़ने के बाद !
डाल पर जब तक खिले हैं फूल ख़ूब महकेंगे लेकिन
ख़ुशबू दे न सकेंगे गुलशन मुरझा जाने के बाद !!
झंझावतों में दिया जलाये रखें यही फलसफा है
इसे कब समझोगे पानी सर से गुजर जाने के बाद ?
ज़िन्दगी का सफ़र सूना होता है जद्दोजहद के बिना,
सुर्खरू होता है इंसा खुद कई ठोकरें खाने के बाद!
समझ लो कि ये रास्ता काँटों भरा है ज़िंदगी का,
नासमझ हैं वे जो समझ नही रहे समझाने के बाद!.
-श्रीराम तिवारी

हमारा इम्यून सिस्टम क्या करता है,वायरस को हराने के लिए ? .

 ज्यादातर लोग कोरोना वायरस से इन्फेक्ट होके अपने आप ठीक हो जा रहे हैं। कैसे ? .

एक बड़ा युद्ध होता है बाकायदा !
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वायरस आया शरीर में, 4 दिन गले में रहा, फिर लंग्स में उतर गया, लंग्स में एक सेल के अंदर घुसा और उसके रिप्रोडक्शन के तरीके को इस्तेमाल करके खुद की copies बना ली, फिर सारी copies मिलके अलग अलग सेल्स को अंदर घुसकर ख़त्म करना शुरू कर देती है। अब बहुत सारे वायरस हो गए हैं फेफड़ों में, मौत के करीब पहुँचने लगता है इंसान। शुरू में वायरस फेफड़ों के epithelial सेल्स को इन्फेक्ट करता है।
वायरस अभी जंग जीत रहा होता है।
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हमारे शरीर का सेनापति होता है हमारा इम्यून सिस्टम,
इम्यून सिस्टम के पास सभी दुश्मनों का लेखा जोखा होता है की किसपर कौनसा अटैक करना है,
एंटी-बॉडीज की एक सेना तैयार की जाती है और वायरस पर हमले के लिए भेज दी जाती है।
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एंटीबाडी सेना की रचना अटैक के तरीके को देखकर होती है,
अगर वो वायरस पहले अटैक कर चुका है तो उसकी एंटीबाडी रचना पहले से मेमोरी में होगी और उसे तुरत वायरस को मारने के लिए भेज दिया जाता है।
अगर वायरस नया है जैसा की कोविद 19 के केस में है तो इम्यून सिस्टम हिट एंड ट्रायल से सेना की रचना करता है।
सबसे पहले भेजा जाता है हमारे शरीर के सबसे फेमस योद्धा "इम्मुनोग्लोबिन g" को,
ये शरीर की सबसे कॉमन एंटीबाडी है और ज्यादातर युद्धों में जीत का सेहरा इसी के बंधता है।
इम्मुनोग्लोबिन g सेना शुरूआती अटैक करती है वायरस सेना पर और उसे काबू करने की कोशिश करती है।
इम्मुनोग्लोबिन g सेना को कवर फायर देती है एंटीबाडी इम्मुनोग्लोबिन m सेना जो अटैक की दूसरी लाइन होती है।
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भीषण युद्ध छिड़ता है दोनों ही पार्टियों में,
इम्मुनोग्लोबिन g वायरस पर टूट पड़ता है और उसे बेअसर करने की कोशिश करता है,
जो सेल्स अभी तक ख़त्म नहीं हुए होते हैं उन्हें बचाने की कोशिश की जाती है ताकि वो सुसाइड ना कर ले,
लेकिन वायरस क्यूंकि अभी ताकतवॉर है इसलिए वो इम्यून सेल्स को भी इन्फेक्ट करना शुरू कर देता है, जो की वायरस को अपनी जीत के तौर पर लगता है। लेकिन...
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इम्मुनोग्लोबिन g और इम्मुनोग्लोबिन m के अलावा हमारा इम्यून सिस्टम एक गुरिल्ला आर्मी भी छोड़ देता है खून में,
जिसमे की तीन टाइप के प्रमुख योद्धा हैं,
पहले हैं B सेल्स, जो जनरल सेना टाइप है, जैसे हर मिस्त्री के पास एक बंदा होता है जो सब कुछ जानता है,
दुसरे हैं हेल्पर T सेल्स, जो मददगार सेल्स होते हैं, और बाकी सेल्स को हेल्प करते हैं,
तीसरे और सबसे इम्पोर्टेन्ट होते हैं किलर T सेल्स, जो शिवाजी और मालिक काफूर की तरह चुस्त योद्धा होते हैं और आत्मघाती हमला टाइप करते हैं जिस से वायरस के छक्के छूट जाते हैं।
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जितना युद्ध लम्बा खिंचता जाता है उतनी ही मात्रा में B और दोनों टाइप के T सेल्स की मात्रा खून में बढ़ती जाती है।
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इंसानी मौत के ज्यादा चांस तब हैं जब उसका इम्युनिटी का सेनापति पहले से किसी और बीमारी से लड़ रहा हो, इसलिए उसकी सेना को दो या ज्यादा fronts पर लड़ना होता है, और कुछ केसेस में हार भी हो जाती है।
वायरस इम्यून सेल्स को इन्फेक्ट करता रहता है और ट्रैप में फंसता रहता है, फिर इम्मुनोग्लोबिन g और इम्मुनोग्लोबिन m, खून से सप्लाई हो रही वानर सेना से मिल के वायरस को बुरी तरह रगड़ना शुरू कर देती है,
इस लड़ाई ट्रैप वगैरह में कई दिन लग जाते हैं, इसलिए बीमार और वृद्ध व्यक्ति इतना अगर झेल गया तो बच जाता है वरना lung बर्बाद हो जाता है मौत हो जाती है, लेकिन स्वस्थ इंसान में मौत का सवाल ही पैदा नहीं होता, वायरस की ही जीभ बाहर फिंकवा देता है हमारा इम्युनिटी सेनापति ।
इस युद्ध के दौरान इंसान को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए ताकि सेनापति को युद्ध के अलावा बाकी चीज़ों की टेंशन ना लेनी पड़े।
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जीत के बाद जश्न होता है, इस समय आपके खून में बी और टी सेल्स भारी मात्रा में होते हैं और सारे इकट्ठे "इंक़लाब ज़िंदाबाद" बोल देते हैं,
जीत होते ही ये वाक़या इम्यून सिस्टम की मेमोरी के इतिहास में दर्ज़ हो जाता है,
कुछ वायरस जो की ताकतवर होते हैं उनका इतिहास हमेशा के लिए लिख लिया जाता है जैसे की चिकनपॉक्स और पोलियो वाले का, की जब भी ये शरीर पर दुबारा हमला करे तो कैसे जल्दी से निपटाना है इसको, ताकि देर ना हो जाए !
कुछ वायरस फालतू टाइप्स भी होते हैं जैसे जुकाम टाइप्स, उनको इम्यून सिस्टम मेमोरी महीना दो महीना रख के रद्दी में फेंक देती है, की फिर आएगा तो देख लेंगे दम नहीं है बन्दे में। इसीलिए इंसान को जुकाम होता रहता है साल दर साल, क्यूंकि ये सेनापति के हिसाब से हल्का वायरस है, कभी भी आसानी से ख़त्म किया जा सकता है इसे।
नोट:- यह आलेख कोरोना वैक्सीन से पूर्व का है,वैक्सीन आ जाने से एक तरफ बचाव के काफी बदलाव हुए हैं,दूसरी तरफ कोरोना वायरस ने भी अपना पुराना ट्रेंड बदला है !
सौजन्य से:-Dr. S. K. Singh, director super max gastro liver and maternity center Gandhi nagar moradabad
Opbhatt, Rajeev Rawat and 9 others
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