शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

जिंदगी खुद ब खुद मुस्कराती है!

हरएक स्याह रात के बाद ,नयी सुबह आती है। 
तलाश है ज़िसकी मुझे वो मौसमे बहार आती है ।।
निहित स्वार्थ से ऊपर उठा यत्किंचित कभी कोई,
तो धरती पर जिंदगी खुद ब खुद मुस्कराती है।
समष्टि चेतना को देकर नाम रूहानी इबादत जैसा ,
शुभ संवेदनाओं की बगिया महकने लग जाती है ।।
तान सुरीली हो और कदमताल सधे हों जिंदगी के ,
बज उठेंगे वाद्यवृन्द व्योम में भोर खिलखिलाती है !!
हर एक स्याह रात के बाद,नयी सुबह आती है !,,

शुक्रवार, 25 जनवरी 2019

"मेरा -भारत-महान "

मीडिया की ख़बरों के केंद्र में,
आजकल केवल हाहाकार है ।
दुनियामें "मेरा -भारत-महान "
हो रहा बेहद शर्मशार है ।।
जनताको नेता-नेताको जनता
ठहराती सदा कसूरवार है ।
धनाड्य वर्ग की भोग लिप्सा,
देख देख आवाम बेक़रार है!!
नारी देह प्रदर्शन बिना आज
विज्ञापन कोई टिकता नहीं!
प्रतिस्पर्धा के बाज़ार में इसके,
बिना माल कोई बिकता नहीं।।
झंडा सूचनातंत्र क्रांति का बुलंद,
फिरभी वैचारिक भ्रान्ति- बरकरार है।
मूल्यों का पतन-धरती की दुर्दशा ,
सर्वनाश के लिये कौन जिम्मेदार है!!

बुधवार, 23 जनवरी 2019

गीत हम रचते रहें

एकता के प्यार के सुर छंद में सजते रहें !
नित्य नव निर्माण के ,गीत हम रचते रहें !!
धर्मान्धता अज्ञानता,असमानता उच्छेद कर,
जो अकिंचन हैं खबर उनकी सदा लेते रहें !!

अज्ञानता और अँधेरे के खिलाफ.

जंग जरुरी हो जब काली ताकतों के खिलाफ,
संघर्ष के लिए कुछ 'शहीद' सदा तैयार रहते हैं !
खुदा ईश्वर गॉड मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारों में,
कुछ लोग अपनी दुकान चलाने को तैयार रहते हैं!
धर्म-मजहब कभी कमजोरों का साथ नहीं देते ,
ताकतवर लोग इश्तेमाल करने को तैयार रहते हैं।
अज्ञानता और अँधेरे के खिलाफ लड़ने के लिए,
दीपक जुगनू चाँद सितारे सूरज तैयार रहते हैं !

गुरुवार, 17 जनवरी 2019

बगुला भगतों का क्या कहना ?

भारत जन की नीति बन गई ,शोषण को सहते रहना ।
नये दौर के महाठगों का चाल चरित्र का क्या  कहना? 
सार्वजनिक सम्पत्ति खा गये , निजी क्षेत्र के छुट्टा सांड । 
जुमलेबाजी बेरोजगारी और महंगाई का क्या कहना ?
नोटबंदी और जीएसटी से ,बंद हो रहे लाखों उद्योग! 
भांड विदूषक नेताओं, बगुला भगतों का क्या  कहना ?

अच्छे दिन यों आ नही सकते !

कालाधन सफ़ेद हो गया बहुत सारा,
नोटबंदी जीएसटी कागजी फूलों से।
जीडीपी घट गई डालर हुआ महँगा,
गलत आर्थिक नीति भयंकर भूलों से!!
अच्छे दिन यों आ नही सकते केवल,
मुफ्त कनेक्शन उज्जवला गैस चूल्हों से!
नही होगा किसी भी आरक्षण से विकास,
क्रांति संभव है केवल जनवादी उसूलों से!!

दुनिया की तमाम बेटियों को समर्पित.....


बेटा बारिस है तो बेटी पारस है,
बेटा आनंद है तो बेटी ख़ुशी है,
बेटा ठहाका है तो बेटी हँसी है,
बेटा वंश है तो बेटी भी अंश है,
बेटा शान है तो बेटी आन है,
बेटा तन है तो बेटी मन है,
बेटा सुर है तो बेटी रागनी है,
बेटा संस्कार है तो बेटी संस्कृति है,
बेटा दवा है तो बेटी दुआ है,
बेटा पुरषार्थ है तो बेटी करुणा है,
बेटा शब्द है तो बेटी अर्थ है,
बेटा छंद है तो बेटी कविता है,
बेटा दीप-राग है तो बेटी मेघ मल्हार है,
बेटा भारत है तो बेटी भारतीयता है,
बेटा आत्मा है तो बेटी आत्मीयता है,
बेटा जायजसंघर्ष है तो बेटी क्रांति है,
बेटा पूर्णचंद्र है तो बेटी कांति है,

तो फिर नारी-उत्पीडन कन्या-भ्रूण हत्या क्यों?
असमानता -दुष्कर्म असामाजिकता क्यों!
(संकलित)

मंगलवार, 15 जनवरी 2019

फूल थे, रंग थे ,लम्हों की सबाहत हम थे ,
ऐंसे जिन्दा थे कि जीने की अलामत हम थे ,
अब तो खुद अपनी जरूरत भी नहीं है हमको ,
वो दिन भी थे कि कभी सबकी जरूरत हम थे।

शिशिर पवन जिया देह लहरावे है।

कटी फटी गुदड़ी घास फूस छप्पर ,
शिशिर पवन जिया देह लहरावे है।
सतयुग , त्रेता, द्वापर , कलियुग ,
हरयुग केवल निर्धन को सतावे है।
ऊनी वस्त्र वातानकूलित कोठियाँ और,
लक्जरी लाइफ सिर्फ बुर्जुआ ही पावे है।

चाल चरित्र का क्या कहना

निर्धन जन की आदत बन गई ,
शोषण उत्पीड़न सहते रहना !
ई वी एम निर्वाचित शासक,
चाल चरित्र का क्या कहना!!
सार्वजनिक उपक्रम बर्बाद कर,
खुद निजीक्षेत्र आबाद करना!
जुमलेबाजी बेरोजगारी और
महंगाई का क्या कहना !!
नोटबंदी हो या जीएसटी,
नये आरक्षण का क्या कहना!
जब भांड विदूषक नेता बन गये,
तो बगुला भगतों का क्या कहना ?