सोमवार, 23 दिसंबर 2019

चुनाव में वही जीतेंगे-जिनका अहिंसा और भारतीयता में यकीन है!

जिस तरह संघ परिवार ने 2014 से पहले अन्ना हजारे,स्वामी रामदेव और अन्य गुरू घंटालों को अनशन का ड्रामा करने के लिये यूपीए की सुपारी दी थी,उसी तरह आगामी चुनाव तक विपक्ष को भी ऐंसा ही कोई शांति पूर्ण अहिंसक अनशन आंदोलन का ड्रामा करते रहना चाहिये!विपक्ष को समझना चाहिये कि किसी गरीब का ऑटो जलाने और पढ़ने वाले बच्चों के हाथ में पत्थर पकड़ाने से सत्ता नही मिलने वाली,आगामी चुनाव में वही जीतेंगे-जिनका अहिंसा और भारतीयता में यकीन है!

रविवार, 22 दिसंबर 2019

*शहीदों का स्थाई पता:-*


शस्य श्यामल धरा पर,
पुलकित द्रुमदल झूमते देवदार,
दहकते सूरज की तपन से,
जहां होती हो आक्रांत-
कोमल नवजात कोंपले!
धूल धूसरित धरतीपुत्रों का लहू,
अम्रततुल्य आषाढ़ के मेघ-
की नाईं रिमझिम बरसता हो,
जिन वादियों में और सुनाई दे,
रणभेरी जहां अन्याय के प्रतिकार की
तुम आ जाना-
मैं वहीं मिलूंगा.......!
देखो जहां भीषण नरसंहार,
सुनाई दे मर्मान्तक चीत्कार-
जलियांवाला बाग का जहां पर!
और शहीदों के सहोदर,
चूमते हों फांसी के तख्ते को,
प्रत्याशा में आज़ादी की-
ज्योति जलती रही निरंतर,
जिनके तेजोमय प्रदीप्त ललाट के समक्ष
-करते हों नमन बंदीजन खग वृंद,
देते धरा पर मातृभूमि को अर्ध्य,
और नित्य होता बेणीसंहार,
निर्मम जहां पर-
कारगिल,द्रास,बटालिक और हिमालय के-
उतंगश्रंग पर ,
तुमआ जाना-
मैं वहीं मिलूंगा.......!
सप्तसिंधू तटबंध तोड़कर
मिला दे प्रशांत को हिंद महासागर से,
सदियों के अविगलित हिमनद,
उद्वेलित,धरा पर दूषित लहू,निस्तेज शिरायें,
अनवरत करतीं प्रक्षालन विचार सरिताएं,
नेतृत्व राष्ट्र का और विश्व का,
महाद्वीप प्रलयगत प्रतिपल ,
पक्षी नीड़ में,
मनुज भीड़ में,
हो आतप-संताप दोष दुखदारुन
नैतिकता पतित पाताल गत,
मानव मति, गति, क्षतविक्षतहत,
हो मनुज मनुज में नैतिकता विस्तार,
बल पौरुष निरहंकार,
करे जगत जहां सत्य की जय-जयकार
तुमआ जाना -
मैं वहीं मिलूंगा......!
आल्पस से हिमालय तक,
वोल्गा से गंगा तक,
समरकंद से सिंधु के मुहाने तक ,
हड़प्पा मोहन जोदड़ो से लेकर,
आधुनिक संचार क्रांति इंटरनेट तक,
उन्नत तकनीकि युग को विजित कर,
ज़मींदोज़ हुये संपूर्ण युगकालखंड,
पतनशील सभ्यताओं को करता स्वाहा,
निहारता खड़ा इक्कीसवीं सदी के-
उदगम पर,
भयभीत क्रूरकाल नरभक्षी यायावर,
भौतिक सभ्यताओं का सनातन शत्रू,
चले आना दाहिर की चिता पर,
आनंदपुर साहिब-अमृतसर-
की पावन माटी और अटक से कटक तक,
दिखे शक्ति जहां शहादत का अखण्ड तेज,
तुम आ जाना -
मैं वहीं मिलूंगा।
चले आना पानीपत-
वाया कुरूक्षेत्र!
सूंघते हुए लहलहाते खेतों की,
लाल माटी को चूमकर,
चले आना प्रागज्योतिषपुर,
राजपुताना मथुरा,कन्नौज,
प्रयाग-ग्वालियर-कालिंजर
और चले आना तक्षशिला,
विक्रमशिला देवगिरि हम्पी,
फेंकना एक-एक पत्थर वहां-
पुराने कुओं-बावड़ियों में,
सुनाई देगी तुम्हें तलहटी से,
खनकती चीखें इतिहास की!
देखना मर्घट की ज्वाला,
बर्बर जंगखोरों द्वारा धधकती आग में, चीखती ललनाओं की!
करुण क्रन्दन करती चिर उदात्त आहें,
मध्ययुगीन बर्बर सामंतों द्वारा,
पददलित विचार अभिव्यक्ति,
हवा पानी प्रकाश-हताश दिखे जहां पर ,
सुनाई दे बोधि-वृक्ष तले,
महास्थिर बोधिसत्व तथागत की
करुणामयी पुकार,
अप्प दीपो भव,
तुम आ जाना-
मैं वहीं मिलूंगा........!
नवागन्तुक वैश्विक चुनौतियां,
दुश्चिंतायें, चाहतें नई-नई!
नये नक्शे, नये नाम, नई सरहदें,
नई तलाश-तलब-तरंगे!
काल के गर्भ में धधकती युध्दाग्नि,
डूब जाये-मानवता उत्तंगश्रृंग
हो जाये मानव निपट निरीह नितांत!
रक्ताम्भरा विवर्ण मुख वसुन्धरा क्लांत!
करुणामयी आस लिये,
शांति कपोतों को निहारती हो-
अपलक जहां आशान्वित नेत्रों से,
तुम आ जाना-
मैं वहीं मिलूंगा........!
दब जाओ पाप के बोझ तले जब,
चुक जायें तुम्हारे भौतिक संसाधन,
अमानवीय जीवन के!
आतंक-हिंसा-छल-छद्म-स्वार्थ,
आकंठ डूबा पाप पंक में कोई,
सुनना चाहे यदि अपनी आत्मा की-
चीख-युगान्तकारी कराह!
और लगे यदि देवत्व की प्यास,
प्रेम की भूख,
चले आना स्वाभिमान की हवा में,
देखना आज़ादी का प्रकाश!
उतार फेंकना जुआ शोषण का,
मिले स्वतंत्रता-समानता-बंधुता जहां पर
और शील सौजन्य करुणा की छांव,
तुम आ जाना-
मैं वहीं मिलूंगा........!

"अंधे पीसें कुत्ते खाएं"

शोषण की व्यवस्था के खिलाफ और अपनी बेहतरी के लिये लाल झंडा हाथों में लेकर भारत के मजदूर किसान दशकों से लगातार संगठित संघर्ष करते चले आ रहे हैं! किंतु स्थिति पहले से बदतर होती चली जा रही है!उसकी कई वजह हो सकती हैं, कितु एक खास वजह यह है कि 'जब कांग्रेस सत्ता में होती है,तब नीतियों को लेकर वामपंथ संघर्ष करता है और चुनाव में भाजपा जीत जाती है!इसी तरह जब भाजपा सत्ता में होती है, तब वामपंथ अल्पसंख्यकों को खुश करने के लि़ये हिंदु मान्यताओं और भारतीयता के खिलाफ लगातार संघर्ष करता रहता है!और बैठे ठाले सत्ता फिर कांग्रेस या पूँजीवादी क्षेत्रिय दलों को फोकट में मिल जाती है!एमपी,राजस्थान,छ.ग.,महाराष्ट्र के बाद अब झारखंड में और फिर बंगाल में भी यही होने जा रहा है! यही परम सत्य है!
"अंधे पीसें कुत्ते खाएं"

Muslims are not happy in the World.

Our Muslims Brothers & Sisters are not happy. I actually feel very sad for this as a human being.
They’re not happy in Gaza
They're not happy in Egypt
They're not happy in Libya
They're not happy in Morocco
They're not happy in Iran
They're not happy in IraqThey're not happy in Yemen
They're not happy in Afghanistan
They're not happy in Pakistan
They're not happy in Syria
They're not happy in Lebanon
*************************************
Lets Find The reason Why..So, where are they happy?
They're happy in Australia
They're happy in England
They're happy in France
They're happy in Italy
They're happy in Germany
They're happy in Sweden
They're happy in the USA & Canada
They're happy in INDIAThey're happy in almost every country that is not
Islamic! And who do they blame?
Not Islam.
Not their leadership..
Not themselves.
THEY BLAME THE COUNTRIES THEY ARE HAPPY IN!
And
they want to change the countries they're happy in, to be like the countries they came from where they were unhappy.
***
Buddhists living with Hindus = No Problem
Hindus living with Christians = No Problem
Christians living with Shintos = No ProblemShintos living with Confucians = No Problem
Confusians living with Bahai's = No Problem
Bahai's living with Jews = No Problem
Jews living with Atheists = No Problem
Atheists living with Buddhists = No Problem
Buddhists living with Sikhs = No ProblemSikhs living with Hindus = No Problem
Hindus living with Bahai's = No Problem
Bahai's living with Christians = No Problem
Christians living with Jews = No Problem
Jews living with Buddhists = No Problem
Buddhists living with Shintos = No Problem.
AndNow..
Muslims living with Hindus = Problem
Muslims living with Buddhists = Problem
Muslims living with Christians = Problem
Muslims living with Jews = Problem
Muslims living with Sikhs = Problem
Muslims living with Bahai's = Problem
Muslims living with Shintos = Problem
Andi
Muslims living with Atheists = Problem
MUSLIMS LIVING WITH MUSLIMS = BIG
PROBLEM !
Mind You ! :
Until today no one has told you the truth that ????
There are 3 lakh mosques in India.
No other country in the world has these many mosques.
And alsoThere are only 24 Churches in Washington.
71 Churches in London.
There are 68 Churches in the city of Milan in Italy.
While in Delhi alone there are 271 churches.
And you call a Hindu communal.
Further I have not come across an Indian Muslim opposing ISIS.
But we have millions of Hindus who are opposing views of RSS.
I have not seen any Muslim holding party on Holi or Diwali festivals for Hindus, but have seen Hindus holding iftar for Muslims during Ramadan.
AlsoI saw Indian flags being burnt in Kashmir by Indian Muslims.
But never saw an Indian Muslim burning a Pakistan flag.
I have seen Hindus wearing topis & visiting Mazars.
But I have neither seen nor heard an Indian Muslim applying tilak on his forehead and visiting temples
This is called Hindu tolerance and respect for other religious community.
साभार वॉट्सएप

बुधवार, 18 दिसंबर 2019

NDTVऔर रवीशकुमार

10-12 साल पुरानी बात है,सुबह सुबह जब मैं अखवार पढ़ रहा था,तभी अचानक दिल्ली से मेरे पुत्र डॉ. प्रवीण तिवारी (जर्नलिस्ट एवं टीवी एंकर) का फोन आया!
'बधाई हो पापा'-उधर से आवाज आई!
मैने सोचा कि शायद प्रवीण ने प्रकाशन के लिये विलंबित मेरी पांडुलिपि प्रकाशित करवा दी हो या उसकी ही कोई नयी पुस्तक प्रकाशित हुई हो!अत: खुश होते हुए :-
मैने उत्तर दिया-अरे वाह! शाबाश!!!
किंतु जब प्रवीण ने बताया कि किसी राष्ट्रीय अखवार के फ्रंट पेज पर बोल्ड कॉलम में आपकी भूरि भूरि प्रशंसा की गई है,और लिखने वाले हैं -रवीशकुमार!
तो मैने कहा:- 'मैंने रवीशकुमार का नाम तो कहीं पढ़ा सुना है किंतु निश्चय ही हम एक दूसरे को कतई नही जानते!देश के ख्यात अखवार में रवीश ने जिनकी तारीफ लिखी है,वे श्रीराम तिवारी कोई और होंगे!क्योंकि मेरा उस नामी गिरामी अखवार या श्रीमान रवीशकुमार से कोई लेना देना नही!'
प्रवीण ने बताया :- 'पापा मैने अखवार वालों और रवीशकुमार से भी तफशीश कर ली है, जिसके बारे में ही लिखा गया है, वह आप ही हैं! चूँकि आप नियमित क्रांतिकारी ब्लागर हैं और रवीश कुमार टीवी एंकर के अलावा उस अखवार के फ्रीलाँस कॉल्मनिस्ट भी हैं,चूँकि उनकी विचारधारा भी प्रगतिशील -वामपंथी है,अत: उन्होंने आपके ब्लॉग-: www.janwadi.blogspot.com में कई आर्टिकल पढ़े हैं,और वे आपके मुरीद हो गये हैं'
मैने खुश होकर रवीश को धन्यवाद दिया और बेटे प्रवीण से कहा कि अखवार में प्रकाशित 'प्रशंसा पत्र' की कटिंग भेज दे!
बेटे ने कटिंग भेज दी और लगे हाथ उसकी स्कैन कापी भी मेरे ब्लॉग के मुखपृष्ठ पर जड़ दी!जो अबएक ऐतिहासिक दस्तावेज जैसी है!
उसके उपराँत मेरे तीन पसंदीदा एंकर हो गये- बेटा प्रवीण,पुत्रबधू अर्चना और रवीश!समय निकालकर मैं रवीशकुमार को टीवी पर ज्यादा देखने सुनने लगा!
किंतु 2014 में संपन्न भारत की भगवा प्रतिक्रांति के बाद 'संघ'द्वारा NDTV और रवीशकुमार के साथ अछूत जैसा व्यवहार किया जाने लगा!इंदौर के भगवा क्षेत्रों के और खास तौर से मैं जिस 2- नंबर क्षेत्र में रहता हूँ,उस एरिया में कोई भी केबल ऑपरेटर NDTV चैनल चलाने को तैयार नही था! हमारे सतत प्रयास से जैसे तैसे एक केबल ऑपरेटर महोदय बड़ी मिन्नत खुशामद के बाद NDTV चलाने को तैयार भी हुए! धीरे धीरे मेरे इर्द गिर्द पास पड़ोस के नर नारी NDTV और रवीश के मुरीद भी बन गये!
किंतु जैसा कि सुविदित है कि अति हर चीज की बुरी होती है,वैसा ही NDTV और रवीश के साथ हुआ! धारा-370 और CAB/NRC के संदर्भ में उनके एकपक्षीय अतिवादी रवैये से तमाम लोगों का मोह भंग हो गया है और वे शिकायत भी करने लगे हैं!
"कि NDTV और रवीश तो विपक्ष से भी ज्यादा विरोध की राजनीति कर रहे हैं! सारे चैनल एक तरफ हैं जो केवल सरकार की भाषा बोलते हैं और NDTV दूसरी तरफ है, जो केवल सरकार के विरोध की भाषा बोलता है!जन मानस का विवेक कहता है कि 'लोकतंत्र में पत्रकारों और टीवी चैनल्स को तटस्थ भूमिका अदा करना चािये!"

मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

गद्दारों की तरफदारी

हम मानते हैं कि मोदी सरकार मजदूर विरोधी है! किंतु जब कुछ लोग भारत की बर्बादी के नारे लगाएं, राष्ट्री़य संपत्ति को आग लगाएं,तो हमें मोदी विरोध की खुमारी से बाहर आकर देश के दुश्मनों को पहचानना चाहिये!मोदी विरोध में हमारा जमीर इतना नही गिरना चाहिये कि गद्दारों की तरफदारी करने लग जाएं! देश में हो रही आगजनी और हिंसा की घटनाओं के लिये जिम्मेदार बदमास तत्वों को उजागर करने के बजाय कुछ कूड़मगज नर नारी उसी डाली को काट रहे हैं,जिस पर बैठे हैं!आग लगाने और हिंसा फैलाने वाले गुमराह छात्रों को बचाने के लिये कुछ लोग सोशल मीडिया पर केवल पुलिस को कोस रहे हैं! विपक्ष की यह शर्मनाक हरकत संघ परिवार को और ज्यादा मजबूत करेगी,जो फासीबाद का सबब होगी!

मुसलमानों का "अज़हर सिंड्रोम"

मैं जामिया के “शांतिदूतों” का दो वजह से शुक्रगुज़ार हूं... एक तो ये बार-बार मेरी विचारधारा को सही साबित कर देते हैं और दूसरा ये कि इनकी वजह से मैं रोज़ नया लिखने की मेहनत से बच जाता हूं...विगत दिनों जामिया में जो भी हुआ उसकी वजह से मैं आज फिर अपना एक ढाई साल पुराना पोस्ट चेप (रिपोस्ट) रहा हूं... 2017 में मैंने लिखा था कि इस देश के मुसलमान "अज़हर सिंड्रोम" से पीड़ित हैं... आइये मैं आज फिर से आपको बताता हूं कि "अज़हर सिंड्रोम" होता क्या है?
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन पर जब मैच फिक्सिंग के आरोपों के बाद बैन लगाया गया तो उन्होंने कहा कि - "इस देश ने मुझे मुसलमान होने की सज़ा दी है"... दरअसल तब अज़हर से ये सवाल पूछा जाना चाहिए था कि तुम्हे उस दिन अपने मुसलमान होने का अहसास क्यो नही हुआ, जब 3 शतक लगाने के बाद इस देश ने तुम्हे "Wonder boy" का तमगा दिया? तुम्हे अपने मुसलमान होने का अहसास उस दिन क्यो नही, हुआ जब तुम्हारी जादुइ कलाई से निकले शॉट्स से स्टेडियम अज्जू-अज्जू के नारों से गूंजता था? तुम्हे उस दिन मुसलमान होने का अहसास क्यो नही हुआ, जब टीम में तुमसे 4 सीनियर प्लेयर (कपिल, वेंगसरकर, शास्त्री, श्रीकांत) होने के बाद भी तुम्हे कप्तान बनाया गया? तुम्हे अपने मुसलमान होने के अहसास उस दिन क्यो नही हुआ, जब 125 करोड़ लोगों के "देवता" सचिन तेंदुलकर से बेहद अपमानजनक तरीके से कप्तानी छीन कर तुम्हे वापस कप्तान बना दिया गया? तुम्हे अपने मुसलमान होने का दुख उसी दिन ही क्यो हुआ जब तुम पर बैन लगाया गया??? जबकि तुम्हारे साथ मनोज प्रभाकर, अजय शर्मा, अजय जडेजा, निखिल चोपड़ा को भी सज़ा हुई थी और जबकि ये सारे हिन्दू थे।
खैर मुद्दे की बात पर आते है... तो ये है "अज़हर सिंड्रोम" जिससे हमारे देश के मुसलमान ग्रस्त है, और उनकी इसी बीमारी को खाद पानी देते हैं हमारे "सिक-लुर" लोग... जैसे अभी रात में JNU का "डफली गैंग" PHQ पहुंच गया है... जब भी कोई घटना होती है उसके बाद पूरे 20 करोड़ मुसलमान खुद को victim-hood साबित करने लगते है... सिर्फ किसी भी एक घटना पर बिना सोचे समझे पूरे 20 करोड़ मुसलमानों को असुरक्षित घोषित कर दिया जाता है... नागरिकता संशोधन बिल पर जो हिंसा हुई वो भी "अज़हर सिंड्रोम" का ही नतीजा है... आज भी "अज़हर सिंड्रोम" इस कदर हावी हो गया कि मुसलमान ये नही सोच रहे कि इस देश मे उन्हें कितनी आज़ादी है... क्या नहीं दिया इस देश ने ??? तुमने पाकिस्तान मांगा, तुम्हे मिल गया !!! तुमने शरिया मांगा, तुम्हे मिल गया !!! तुमने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदलना चाहा, वो फैसला भी बदल दिया गया !!!
#Prakhar_Shrivastava
मुझे समझ नहीं आता कि ये "अज़हर सिंड्रोम" वाली मानसिकता आखिर कब खत्म होगी ??? जब तक आपको हिस्सा मिल रहा हो चौड़े पर उसका आनंद उठाते रहो और जब किसी दूसरे को उसके हक का हिस्सा मिले तो victim-hood का मास्टरकार्ड खेल दो... छाती पीटपीटकर कहो कि हमारा हिस्सा हमें नहीं मिल रहा... अरे भैय्या, ये बिल आपके लिए नहीं था और इसका ये भी मतलब नहीं है कि इस बिल से आपको कोई नुकसान हो रहा हो... आप कल भी इस देश में आराम से रह रहे थे और आनेवाले कल में भी आप यहां आराम से रहेंगे... इसलिए अल्लाह के वास्ते अपने "अज़हर सिंड्रोम" से बाहर निकलिए... और दिल्ली और देश में अमन बनाये रखिये।
#CAB - NRC

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

NRC

भाजपा पूँजीवादी साम्प्रदायिक पार्टी है!उसके नेता पूँजीपतियों के हितैषी हैं!वे NRC बिल के मार्फत वोट की राजनीति कर रहे हैं!यह सब सच है!
किंतु वे बीस साल से हर चुनाव में वादा कर रहे थे कि घुसपैठियों को भगाएंगे और शरणार्थियों को शरण दैंगे!अब यदि इस बात पर उन्हें बम्फर जनादेश मिला है तो विपक्ष को विरोध नही करना चाहिये! सत्ता पक्ष का यह कहना सही है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान बांग्लादेश में वहाँ के अल्पसंख्यकों>(हिंदू+बौद्ध+ईसाई+सिख+पारसी+जैन) को बेहद सताया गया! अत: सवाल उठता हैकि उनमें से जो अल्पसंख्यक जान बचाकर भारत आ गये,उन्हें,भारत में वैधानिक नागरिकता क्यों नही मिलनी चाहिये?और जहाँ तक उक्त तीनों इस्लामिक पड़ोसी मुल्कों के मुसलमानों का भारत में आगमन रोकने की बात है,तो सारे संसार को मालूम है कि इंडोनेशिया के बाद भारत में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है! वैसे तो भारत की बढ़ती आबादी और सिकुड़ते संसाधनों के चलते किसी को भी यहाँ जगह नही है,क्योंकि यहाँ तो भारत के मूल निवासी ही गरीबी,बेरोजगारी और भुखमरी के शिकार हो रहे हैं,किंतु पड़ोसी इस्लामिक मुल्कों के मजहबी आतंकियों ने जिनका जीना हराम कर दिया,वे हिंदू,जैन, सिख,ईसाई,बौद्ध और पारसी भारत के अलावा और कहाँ जाएं?

सोमवार, 9 दिसंबर 2019

'भज्जों कौर" बनाम 'शकीना बी'

देश बंटवारे के समय बचपन में बिछुड़े भाई- बहिन!भाई रणजीतसिंह तो जिंदा बचकर भारत आ गया,किंतु चार साल की बच्ची 'भज्जो कौर' पाकिस्तानियों के हाथ लग गई! सोशल मीडिया की बदौलत 72 साल बाद विगत दिनों करतारपुर में जब बचपन के बिछुड़े भाई बहिन मिले तो 'भज्जों कौर' 'शकीना बी' हो चुकी है!उसके चार लड़के हैं, एक दर्जन पोते पोतियाँ हैं!निसंदेह शकीना बी के लड़के,लड़कियां और नाती पोते सब सिख तो अवश्य नही होंगे!
इस घटना से बखूबी समझा जा सकता है कि पाकिस्तान में किस कदर हिंदुओं/सिखों और खास तौर से हिंदू/ सिख लड़कियों को मजहब बदलने पर मजबूर किया गया अथवा खत्म कर दिया गया!  

हैदराबाद एनकाउंटर:

हैदराबाद एनकाउंटर: पुलिस को कंधे पर बैठाने से पहले ये ज़रूर पढ़ें
आपको ऐसी गलतफहमी क्यों है कि ये गोली किसी बलात्कारी को खत्म करने के लिए चलाई गई. गोली तो वो इसलिए चला रहे हैं कि आपका मुंह बंद हो जाए. आप देश में महिलाओं की सुरक्षा पर आवाज़ उठा रहे थे. गोली आपकी आवाज़ को खामोश करने के लिए चली है.
वाह रे देश ! हैदराबाद पुलिस के जवानों को कंधे पर बिठा रहे हो. मिठाई खिला रहे हो और फूल बरसा रहे हो. ये वो ही हैदराबाद पुलिस है ना जिसने पीड़िता के परिवार वालों को थाने से भगा दिया था. दो किलोमीटर दूर उसे ढूंढने को तैयार नहीं थी. ये वही पुलिसवाले हैं ना जिन्होंने पीड़िता के घरवालों को थाने से ये कहकर लौटा दिया था कि वो किसी के साथ भाग गई होगी.
ये वही हैदराबाद पुलिस है ना जो कोर्ट से सुपुर्दगी में मिले चार लोगों को संभालकर नहीं रख पाई. वही पुलिस है ना जिससे किसी अपराधी ने नहीं पहली बार केस में फंसे ट्रकवालों ने बड़ी आसानी से हथियार छीन लिए (खुद पुलिस की कहानी है) ये वही पुलिस है ना जिसकी ट्रेनिंग इतनी घटिया थी कि दौड़कर उन निहत्थों को नहीं पकड़ पाई. वही पुलिस है ना जो अपराधियों को आधी रात को सीन रिक्रियेट करने के लिए लेकर गई और उनके हाथ तक नहीं बांधे.
हैदराबाद पुलिसकी बताई कहानी पर क्या यकीन किया जा सकता है?
ये वही पुलिस है ना जो अपराधियों के पैर में ठीक से निशाना तक नहीं लगा सकी. लेकिन आप तो उसे सिंहम से लेकर पता नहीं क्या क्या समझ रहे हैं. आप जो भी समझकर इस पुलिस की आरती उतार रहे हैं. लेकिन वो चारों आरोपियों को वो आधी रात को लेकर गई और गोली से उड़ा दिया. पर ये तो अपराध है. अगर ये अपराध भी आपको मंजूर है तो अकेले इस केस में बेहद घटिया तरह की हरकतों से एक्सपोज हुई पुलिस पर आप कैसे भरोसा कर सकते हैं कि उसने केस में सही लोगों को ही उठाया था.
लेकिन आपका क्या, आप कुछ भी कर सकते हैं. उन्माद इसी को तो कहते हैं. आप किसी की मौत पर मिठाई बांट सकते हैं. बताइये किस धर्म के किस ग्रंथ में लिखा है कि किसी की मौत पर मिठाई बांटी जाएं. महाभारत युद्ध जीतने के बाद मिठाई बंटी थी क्या. रामायण में कम से कम बीस राक्षस मारे गए. मिठाई बंटी क्या? और तो और किसी दानव ने किसी देवता की मौत पर मिठाई बांटी क्या?
लेकिन आप समझेंगे नहीं आपको लगता है गोली से उड़ा दिया तो रेप की समस्या खत्म हो गई. आपको ऐसी गलतफहमी क्यों है कि ये गोली किसी बलात्कारी को खत्म करने के लिए चलाई गई. ऐसे कितने केस हैं जिनमें पुलिस ने बलात्कारी पर गोली चलाई. अरे गोली तो वो इसलिए चला रहे हैं कि आपका मुंह बंद हो जाए. आप देश में महिलाओं की सुरक्षा पर आवाज़ उठा रहे थे. गोली आपकी आवाज़ को खामोश करने के लिए चली है. ऐसी गोलियां चलाने से क्या रेप कम हो जाएंगे. क्या अपराधियों के हौसले कम हो जाएंगे. दिल्ली के नज़दीक नोएडा और गाजियाबाद में रोज एक एनकाउंटर होता है. कभी कभी दो दो. न तो छीना झपटी की वारदातें कम हुई हैं न लूट की. बल्कि असली अपराधी मजे में रहते हैं.
पुलिस गलत लोगों को फंसाकर गोली से उड़ा देगी तो फायदा किसका होगा. असली अपराधी का ही होगा ना. अब ये मत कहना कि पुलिस असली अपराधी को ही पकडती है. देश में एक से एक बड़े मामले हैं जिनमें बेकसूरों को पुलिस ने उड़ा दिया. छत्तीसगढ़ में पुलिस ने सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया और कह दिया कि नक्सली थे. गुरुग्राम में बच्चे की स्कूल में हत्या हुई तो बस के क्लीनर को फंसा दिया. इतना टॉर्चर किया कि उसने गुनाह कबूल कर लिया. बाद में मृतक बच्चे के पिता ने न्याय की गुहार लगाई. असली अपराधी को पकड़े जाने को कहा तो सीबीआई जांच हुई. हत्यारा निकला एक बेहद पहुंच वाले बड़े आदमी का बेटा.
पुलिस की कारगुजारियों की लिस्ट गिनाने बैठेंगे तो आप के कान से धुआं निकलने लगेगा. आपको याद होगा कि कैसे यूपी पुलिस ने बिना पूछताछ किए बड़ी अंतर्राष्ट्रीय आईटी कंपनी के एक अफसर को उड़ा दिया था.
बाकी की तो छोड़िए सत्ताधारी पार्टी के नंबर दो नेता और देश के गृहमंत्री खुद कई मुकदमों में छूटे हैं. इन मुकदमों में जो भी आरोप थे वो पुलिस के ही लगाए हुए थे ना. साध्वी प्रज्ञा को निर्दोष बताने वाले भी तो सोचें कि उनके खिलाफ मुकदमे पुलिस ने ही लिखाए थे. इसलिए पुलिस की हैसियत समझो. पुलिस सरकार की तरफ से रखे गए बाहुबलियों का एक इजारा है. वो सरकार के अखाड़े के पहलवान हैं. भारत के संविधान में व्यवस्था है कि ऐसे पहलवान किसी को नाजायज न सता सकें. इसीलिए न्यायपालिका बनीं है. पकड़कर पेश करना पड़ता है. पुराने जमाने में भी राजा के सामने पेश किया जाता था. पहले चेक करते थे कि बात सही है या गलत. इल्जाम सच्चा है या झूठा. तब सज़ा होती थी.
इसलिए ज़रा सोचें. जब भी कोई गलत आदमी फंसता है तो वो बेकसूर आदमी ही होता है. आप भी बेकसूर हैं. किसी अज्ञात मामले में कोई आपको अचानक कसूरवार कहना शुरू कर दे तो आपके पास कहने को कुछ होना चाहिए. आपकी सुनवाई होनी चाहिए. इसलिए सुनवाई के हक के खत्म होने पर तालियां न बजाएं. थोड़ा समझ से काम लें. अदालत में अगर वक्त भी लगता है तो होती तो फांसी ही है. पुलिस वक्त पर रिपोर्ट लिख ले. समय पर एक्टिव हो जाए. जो उसकी जिम्मेदारी है ठीक से निभाने लगे तो लड़कियों के अपहरण और हत्या की आधी से ज्यादा वारदात खत्म हो जाएं. अदालत में फैसला भी जल्दी हो क्योंकि केस पुख्ता बना होगा. समस्या ही खत्म हो जाएगी. याद रखिए हो सकता है कि पुलिस वाले अच्छे इनसान होते हों लेकिन पुलिस उतनी अच्छी नहीं होती. उसे कानून की जकड़ में रखना जरूरी है.