इसमें कोई शक नहीं कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद, विगत 12 साल में भारत का चौतरफा विकास हुआ है। वर्तमान GDP ग्रोथ रिकॉर्ड 7.8 के स्तर पर पहुँच चुकी है। किंतु इस विकास का फल जो लोग खा रहे हैं, वही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को जंतरमंतर ,जेएनयू, बिहार,केरल में बेबजह गालियां दे रहे हैं। दूसरी ओर सवर्ण समाज को न केवल आर्थिक विकास से बंचित किया गया है, बल्कि संवैधानिक बेडियों में जकड़ा गया है। मोदी सरकार द्वारा सवर्ण समाज की घोर उपेक्षा के बावजूद हम 'नरेंद्र मोदी' जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त करते हैं
शनिवार, 26 सितंबर 2026
ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दीर्घायु हों 🙏
जीवेत् शरदः शतम् ।
सुदिनं सुदिनं जन्मदिनम्।
भवतु मंगलं जन्मदिनम्॥
ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दीर्घायु हों 
परमात्मा उन्हें उत्तम स्वास्थ्य एवं निरंतर राष्ट्रसेवा की शक्ति प्रदान करें
उनके नेतृत्व में विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प निरंतर सशक्त होता रहे।
आइए, ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाकर आदरणीय प्रधानमंत्री जी के प्रति अपनी शुभकामनाएं एवं स्नेह अर्पित करें। जय श्री गणेश
UGC rollback
भारतीय वामपंथ ने सभी गैरभाजपा दलों को सनातन बिरोधी बना डाला!
एक आधे अधूरे उजबक अपरिचित वामपंथी ने फेसबुक पर बेबजह मेरी एक पोस्ट पर लिखा- "तुम्हारे बाप भी वामपंथ को खत्म नही कर सकते।
आप सभी को साक्षी मानकर निम्नलिखित पंक्तियों के माध्यम से मैं अपने उस वामपंथी मित्र को कहता हूँ कि सनातन संस्कृति और सनातन धर्म को बर्बाद करने के लिए विगत एक हजार साल तक लाखों बर्बर विदेशी हमलावरों ने मार काट मचाई। लेकिन वे सभी कमीने दोजख की आग में जल रहे होंगे। इधर धरती पर फलता फूलता सनातन धर्म अपने अतीत के बलिदानों की गाथा सुना रहा है।
आजादी के बाद भारत में सनातन हिंदू धर्म को नष्ट करने के लिए वामपंथ ने भी खूब एड़ी- चोटी का जोर लगाया। घोर नास्तिक पैरियार का पिछवाड़ा धोने वाले DMK को छोड़कर वामपंथ ने कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों को पहले नास्तिकता का पाठ पढाया, फिर भाजपा विरोधी सभी दलों को सनातन बिरोधी बना डाला। इस तरह तमाम विपक्ष को श्रीराम बिरोधी बनाकर मंदिरों का बिरोध किया और संपूर्ण विपक्ष को हिंदू समाज की नजरों से गिराकर सत्ता से बाहर करवा दिया। वामपंथ ने यह सब इसलिए किया ताकि भाजपा के सामने केवल वामपंथ ही मैदान में रहे। और एक दिन "लाल किले पर लाल निशान " का सपना पूरा कर सकें। गैरभाजपा
ऐंसा सपना देखना कतई गलत नहीं,जैसा कि मार्क्स ने कहा था कि "मजहब अफीम है,उसे मिटाकर ही सर्वहारा क्रांति हो सकती है। " किंतु मार्क्स ने न तो सत्य सनातन धर्म पर कुछ लिखा और न कहा, फिर भी तमाम मूर्ख भारतीय कम्युनिस्ट नेता मजहबी आतंकवाद और मजहबों को तो खाद पानी देते रहे तथा सनातन हिंदू धर्म की जड़ों में मठ्ठा डालते रहे। धिक्कार है! छि:
फेसबुक पर मेरे बाप को याद करने वाले उस बिगडैल बैल को मालूम हो कि:-
" 45 साल तक मैंने भी यही पाप किया है! मेरे हाथों ने लाल झंडा थामें रखा, गनीमत है कि मैं कट्टर बामपंथी होकर भी सनातन का और पूंजीवाद का कुछ नहीं उखाड़ पाया। इसीलिए अंग्रेजी कहावत पर अमल कर चला
" If you can't defeat, then you join them."
इसलिए छोड़ दिया मैने सीपीएम को और थाम लिया सनातन का भगवा झंडा! अब जिससे जो बने सो उखाड़ लो। और हाँ मेरे बाप की जिसे ज्यादा याद आ रही हो और उनसे मिलने की तमन्ना रखता हो तो उसे परलोक जाना पड़ेगा।जहाँ वे 38 साल से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं।भगवान् से निवेदन है कि जल्दी ही तुम्हारी इच्छा पूर्ण करें।
जय श्रीराम
जय सनातन
वंदेमातरम 

कम देखें
वतनपरस्त सवर्ण कब तक यों अपमानित होते रहेंगे ?
पाती प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी के नाम !
माननीय नरेंद्र भाई मोदी ! दीर्घायु भव !
आयुष्मान भव! यशस्वी भव ! हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी को ७६ वें जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएं ! मंगलम् जन्मदिनम् सुदिनम् भवतु।
आगे समाचार यह है कि हमें गर्व है की आप दुनिया के सबसे ईमानदार प्रधानमंत्री हैं। आप से पहले लोकतांत्रिक दुनिया में न ऐंसा कोई हुआ है और न आपके बाद कोई होगा,जो अपने वतन के लिए इतना सबकुछ ईमानदारी से कर सकेगा।स्पेस साईंस टेक्नोलॉजी और स्वदेशी आंत्रप्रन्योर में आपने भारत को दुनिया में मशहूर कर दिया है। आपने कोरोना काल में जो संघर्ष किया है,वो हम सबने देखा सुना है।
कौन नहीं जानता कि आपकी सरकार ने कश्मीर बचाया। आपकी पार्टी भाजपा ने असम,बंगाल और नार्थ ईस्ट को बचाया। आपकी सरकार ने अलगावबाद की कमर तोड़ दी। पाकिस्तान को प्रॉक्सी वार में धुल चटाई।आपकी सरकार ने नक्सलवाद को खत्म किया। आपने वैश्विक मंच पर सारी दुनिया में शांति बनाए रखने की कोशिश की है। सभी देशों को आपस में मैत्री भाव बनाने की कोशिश की। आपने भारत में केंद्रीय स्तर पर भृष्टाचार को रोका। डिफेंस और पावर सेक्टर को भृष्टाचार मुक्त किया।अतिक्रमण पर अंकुश लगाया।
गांवों के गरीबों को घर दिये। देश को गंदगी से मुक्त किया। शौचालय बनवाये। देश में गरीब महिलाओं को उज्जवला योजनान्तर्गत मुफ़्त LPG कनेक्शन दिए गये। चौतरफ़ा विकास की ही वजह रही है कि मौजूदा ग्रोथ रेट 7.8 पर आकर दुनिया के विकसित राष्टों की नींद उड़ा रही है।
आपकी इन तमाम महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बावजूद,आपके चुनावी घोषणा पत्र के कुछ काम पूर्ववत् अटके पड़े हैं। गंगा,जमुना अभी भी मैली हैं। न्याय पालिका का आलम ये है कि तारीख पै तारीख! जजों के घर में जले हुए नोट पाये जाते हैं।आप ने गरीबों,बेरोजगारों के खाते तो खुलवा दिये, किंतु खातों में पैसा नहीं है। ऊपर से तुर्रा ये कि मेंहगाई आसमान छू रही है।आपने मंदिर बनवा दिए अच्छा किया, किंतु इससे निर्धन बेरोजगार आवाम का पेट नहीं भर सकता। आपके शासनकाल में शिक्षा मेंहगी हो गई,जातिवाद और सामाजिक दुराव बढ़ा है।
सरकारी स्कूलों/अस्पतालों की दुर्दशा आपसे छिपी नहीं है। केंद्रीय वेतन आयोग की रिपोर्ट आ चुकी है। किंतु सार्वजानिक उपक्रमों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को न तो केंद्रीय वेतन आयोग से संबद्ध किया गया,न ही सार्वजनिक उपक्रमों की PRC से संबद्ध किया गया।इन अलहदा रखे गए पेंशनर्स को आप किस अपराध की सजा दे रहे हैं?देश के लाखों पेंशनर्स को पेसन रिवीजन से बंचित कर आप की ब्यूरोक्रेसी ने बड़ी भयंकर भूल की है।अगले चुनाव में परिणामघातक हो सकते हैं।
ज्ञातव्य है की देश में जो करोड़ों कुलीन सवर्ण हैं,वे जनसंघ के जमाने से ही राष्ट्रवादी विचार धारा से प्रतिबद्ध रहे हैं । जो सवर्ण १९८० के बाम्बे में संपन्न भाजपा स्थापना अधिवेशन में भाजपा के मूलाधार स्तंभ रहे हैं,आजादी के ७८ साल वाद उन्हें तोहफे में भाजपा की मोदी सरकार ने क्या दिया ? UGC !
अधिकांश सवर्ण वतनपरस्त सनातनी कट्टर हिन्दू हैं, आप बचपन से ही ब्राह्मण क्षत्रियों के बलिदान की गाथा गाते गाते शिखर पर पहुँच गये। याने भारत भाग्य विधाता बन गये। आज ब्राह्मण बेचारे भगवान श्रीकृष्णजी के जमाने वाले सुदामा से भी गये बीते हो गये।अतीत में ब्राह्मण की गरीबी केवल भूखा रखतीं थी,किंतु अब तो निर्दोष ब्राह्मण को भी जेल भेज दिया जाता है।
ब्राह्मण क्षत्रिय हजारों साल से हर कालखंड में विदेशी बिधर्मी बर्बर आतताइयों के अत्याचारों से लड़ते ही आ रहे हैं। लेकिन आजाद भारत में जब उनकी अपनी ही सरकार गले में फंदा डालने लग जाए, तो सहन करना मुश्किल है। बामन ठाकुर अपने देश और धर्म के लिए चाहे जितना कष्ट झेल लेंगे। किन्तु जंतर मंतर नुमा काकरोची भीड़ की बदजुबानी कतई सहन नहीं करेंगे। वे कब तक यों अपमानित होते रहेंगे ?
सत्ता के चुनावी रण में कुछ लोगों को अपने संख्या बल का बहुत गुमान है। सो आप जातीय जन गणना करवा ही लीजिये। देखें वामन बनिया ठाकुर कितने हैं? फिर जिसका जितना गरीबी पर्सेंटेज हो,उस वर्ग को उतना दे दिया जाए। पता करें कि देश भर में सवर्णों पर कितनी झूंठी शिकायतें दर्ज हो रही हैं ? पूरेदेश भर के पुलिस थानों से आंकड़े इकठ्ठे करवा लिए जावें और तदनुसार आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू हो।यदि भाजपा की सरकार अभी नहीं सम्भली,तो आने वाले हर चुनाव में राजस्थान के मौजूदा स्थानीय चुनाव का रिजल्ट आप के सामने है। इति श्री
!
पुनश्च जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं 
जय श्री राम
जय सनातन धर्म
जय भारत
वंदेमातरम् 
सवर्णों को चाहिए की अपनी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम खुद करें!
संसद में राहुल गाँधी,अखिलेश यादव और अधिकांश विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार UGC rollback को तैयार है। और कांग्रेस ऐसा होने नहीं देगी। इस आरोप के जबाब में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा हम UGC वापस नहीं लैंगे और न कांग्रेस को SC/ST/OBC के खिलाफ सवर्णों को लामबद्ध करने दैंगे।
इस आरोप प्रत्यारोप का अभिप्राय क्या है? सभी सवर्ण जन ध्यान दीजिये! जो ब्राह्मण हैं, क्षत्रिय वैश्य हैं वे शायद इस मुगालते में हैं कि भाजपा तो अब SC/ST/OBC के लिए पूरी तरह समर्पित हो चुकी है,अत : क्यों न हम सवर्ण जन कांग्रेस/ सपा और अन्य विपक्षी दलों को आजमाएं ? गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हम ST/SC /OBC पर किसी तरह जुल्म ज्यादती नहीं होने देंगे।
सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों द्वारा संसद में की गई इस बयानबाजी का मतलब क्या है? मतलब सवर्णों को समझना होगा कि UGC को हल्के में न लें। सभी राजनैतिक दल और नेता सवर्णों के वोट तो चाहते हैं,लेकिन सवर्णों पर हो रहे अमानवीय हमलों को रोकने की मंशा किसी की नहीं है।
अब तमाम सवर्णों को चाहिए की अपनी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम खुद करें। या तो बहिन मायावती से बात करो, वे ही सवर्णों को सुरक्षा की गारंटी दे सकती हैं।बाकी किसी भी पार्टी को वोट देने का मतलब है खत्म हो जाने के लिए विनाश को निमंत्रण देना!
दूसरी तरफ नोटा की व्यवस्था नकारात्मक तरफदारी करने जैसा है अर्थात संघर्ष से दूर भागने जैसा है । कृपया नोटा की पैरवी कतई न करें ! इससे बेहतर है कि बहिन जी को एक मौका देना अथवा अपनों (संघ परिवार) के राजनैतिक खेल का खिलौना बनते रहना।अर्थात आरक्षण की बैशाखी पर भारत राष्ट्र के विकास के सपने देखना और जातीयता की वैशाखी के हाथों सवर्ण इंसान की काबिलियत का बेमौत मर जाना। 
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