यदि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम (क्षत्रिय), सोलह कलाओं के धारक भगवान् श्रीकृष्ण ( यादव), महर्षि बाल्मीकि ( दलित) चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त (दासी पुत्र) चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य, स्कंदगुप्त, समुद्रगुप्त (सभी वैश्य), संत सिरोमणी श्री रविदास जी ( मोची) गुरु गोविन्दसिंह जी (जाट सिख) स्वामी विवेकानंद ( कायस्थ ),स्वामी रामदेव (यादव),सम्मानित करणी सेना के पदाधिकारी (राजपूत),सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सनातनी अंजलि यादव, सामाजिक एक्टीविष्ट -बंटी बादल ( चमार ), इत्यादि सभी समाजों के जाज्वल्यमान हिन्दू नर रत्न ब्राह्मणों का भरपूर सम्मान करते देखे गये।
अब ब्राह्मणों की भी जिम्मेदारी बनती है कि आरक्षण विवाद से दूर रहैं और देश दुनिया में अपनी ब्राह्मण शक्ति एवं ब्राह्मणत्व को जगाने के लिए -त्याग तपस्या और बलिदान के नये कीर्तिमान स्थापित करें, अपनी वैश्विक श्रेष्ठता सिद्ध करें।
जय श्री महाकाल
जय माँ भवानी
जय भारत
जय शिवाजी
जय महाराणा प्रताप
जय भगवान् परशुराम
जय सनातन
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