शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

अर्नेस्ट रेनन और राष्ट्र का विचार - भारत के लिए एक संदे

जोसेफ अर्नेस्ट रेनन (1823-1892) - फ्रांस का दार्शनिक, इतिहासकार, और भाषाविद। बचपन में कैथोलिक पादरी बनने गया, हिब्रू सीखा तो बाइबिल पर सवाल उठे और चर्च छोड़ दिया। उसकी किताब _Life of Jesus (1863)_ ने पूरे यूरोप में तूफान ला दिया - उसने कहा यीशु भगवान नहीं, एक ऐतिहासिक मनुष्य था।

रेनन अपने समय का सबसे बड़ा नस्लवाद-विरोधी विचारक था, जबकि उसी समय यूरोप में जर्मनी कह रहा था - राष्ट्र का आधार खून और भाषा है।
*11 मार्च 1882 को Sorbonne में दिया गया उसका लेक्चर - "राष्ट्र क्या है?" - आज भी राष्ट्रवाद पर दुनिया की सबसे जरूरी टेक्स्ट है।*
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*रेनन की विचारधारा - राष्ट्र खून से नहीं, संकल्प से बनता है*
रेनन ने 5 झूठ तोड़े:
1. *राष्ट्र नस्ल नहीं है* - फ्रांस में सेल्ट, जर्मन, रोमन सबका खून मिला है।
2. *राष्ट्र भाषा नहीं है* - इंग्लैंड और अमेरिका एक भाषा बोलते हैं पर एक राष्ट्र नहीं।
3. *राष्ट्र धर्म नहीं है* - आज तुम फ्रांसीसी होते हुए कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट, यहूदी या नास्तिक कुछ भी हो सकते हो।
4. *राष्ट्र भूगोल नहीं है* - नदी-पहाड़ राष्ट्र नहीं बनाते।
5. *राष्ट्र हित नहीं है* - हित से व्यापार होता है, वतन नहीं।
तो फिर राष्ट्र क्या है? रेनन कहता है - राष्ट्र एक आत्मा है, दो चीजों से बनी:
*पहली आत्मा - पीछे की ओर: साझा विरासत*
हमने साथ में गौरव देखा है, साथ में दुख झेला है।
*दूसरी आत्मा - आगे की ओर: साथ रहने की रोज़ की इच्छा*
उसका प्रसिद्ध वाक्य - *"राष्ट्र एक रोज़ का जनमत संग्रह है।"* रोज़ सुबह हम तय करते हैं कि हम साथ रहेंगे।
*पर इस आत्मा के लिए एक शर्त है - "एक साथ भूलना।"*
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*"एक साथ भूलना" क्या है? - सेंट बार्थोलोम्यू हत्याकांड से समझें*
24 अगस्त 1572 - फ्रांस।
देश दो हिस्सों में बंटा था - बहुसंख्यक कैथोलिक और अल्पसंख्यक प्रोटेस्टेंट (Huguenots)। 10 साल से गृहयुद्ध। सुलह के लिए राजा ने अपनी कैथोलिक बेटी की शादी प्रोटेस्टेंट नेता Henry से करा दी। शादी देखने हजारों प्रोटेस्टेंट पेरिस आए।
चार दिन बाद कैथोलिक गुट ने प्रोटेस्टेंट नेता Admiral Coligny पर हमला किया। रानी Catherine de Medici डर गई कि विद्रोह होगा। राजा Charles IX ने आदेश दिया - "सबको मार दो।"
सेंट बार्थोलोम्यू के दिन सुबह चर्च की घंटी बजी - संकेत था कत्लेआम का। पहले Coligny को बेडरूम में मारा, खिड़की से फेंका, भीड़ ने लाश को तीन दिन तक घसीटा। फिर 72 घंटे तक पेरिस में घर-घर घुसकर प्रोटेस्टेंटों को काटा गया। लाशें Seine नदी में फेंकी गईं - नदी खून से लाल हो गई। पेरिस में 3,000 और पूरे फ्रांस में 20,000 लोग मारे गए।
*रेनन इसी हत्याकांड पर कहता है - हर फ्रांसीसी को इसे भूला होना चाहिए।*
भूलना मतलब किताब से पन्ना फाड़ना नहीं। इतिहासकार को तो याद रखना ही है।
भूलना मतलब - नागरिक के तौर पर, हर रोज़ उस खून को याद करके अपने पड़ोसी से बदला लेने की आग में न जलना।
अगर फ्रांस का हर कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट आज भी 1572 का बदला याद रखता, तो क्या फ्रांस एक राष्ट्र बन पाता? कभी नहीं।
राष्ट्र तभी बना जब दोनों ने कहा - हाँ, हमारे पूर्वजों ने एक-दूसरे को मारा, बहुत बुरा हुआ। पर अब हमें उस घाव को कुरेदकर नहीं, उसे भरकर साथ चलना है।
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*भारत के लिए संदेश*
रेनन का विचार भारत के लिए जर्मनी के खून वाले राष्ट्रवाद से ज्यादा जरूरी है।
भारत नस्ल से नहीं बना - यहाँ द्रविड़, आर्य, मंगोल, शक सबका खून मिला है।
भाषा से नहीं बना - 22 भाषाएँ, 19,500 बोलियाँ।
धर्म से नहीं बना - यहाँ 9 बड़े धर्म रहते हैं।
भूगोल से नहीं बना - हिमालय से कन्याकुमारी तक भूगोल एक जैसा नहीं।
भारत रेनन के अनुसार राष्ट्र है क्योंकि:
*1. हमारे पास साझा विरासत है - और साझा भूलने की हिम्मत भी चाहिए।*
1947 का बंटवारा, दंगे, 1984, 1992, 2002, कश्मीर का दर्द - अगर हम रोज़ सुबह उठकर अपने पड़ोसी में अपने दादा के हत्यारे को देखेंगे, तो राष्ट्र रोज़ मरेगा।
*2. हमारा रोज़ का जनमत संग्रह है।*
जब एक तमिल और एक कश्मीरी एक ही क्रिकेट टीम के लिए चिल्लाता है, जब केरल का डॉक्टर असम में बाढ़ में मदद करता है, जब तुम टैक्स भरते हो, वोट डालते हो - तुम रोज़ तय कर रहे हो कि तुम्हें साथ रहना है।
रेनन कहता है - राष्ट्र अमर नहीं है। वो बनता है और बिगड़ता भी है।
भारत का राष्ट्र होना इस बात पर टिका है कि हम "एक साथ याद रखना" और "एक साथ भूलना" - दोनों कर पाते हैं या नहीं।
याद रखना - ताकि अन्याय दोबारा न हो।
भूल जाना - ताकि साथ रहना संभव हो सके।

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