गुरुवार, 8 अगस्त 2019

मरुभूमि में नख्लिस्तान और कार्पोरेट जगत

नव्य उदारवाद कहता है 'वही जियेगा जो शक्तिशाली है , वही जीतेगा जो ताकतवर है ' 'कर लो दुनिया मुठ्ठी में' ''छू लो आसमान को" इत्यादि अनुत्पादक और सफेदपोश - प्रबंधकीय नारों के कोलाहल में कमजोर वर्गों के आधुनिक युवाओं की वास्तविक संघर्ष क्षमता को सस्ते में खरीदा जा रहा है। उनके निजी और पारिवारिक भविष्य को अनिश्चितता की अँधेरी सुरंग में धकेला जा रहा है।
सभ्रांत लोक के भारतीय युवाओं की ऊर्जा अर्थात वास्तविक प्रतिभा अमेरिका ,इंग्लैंड और विदेशों में खपने को उद्द्यत रहा करती है।जबकि दूसरी ओर नकारात्मकता के संघर्ष में राजनैतिक भृष्टाचार उत्प्रेरक का काम कर रहा है। उदाहरण के लिए इधर मध्यप्रदेश में ही विगत १० सालों में हजारों योग्य,परिश्रमी और संघर्षशील युवाओं को उनके हिस्से का हक नहीं मिल पाया है , जिन्हें कोई आरक्षण नहीं ,जिनका कोई 'पौआ' नहीं उन बेहतरीन योग्य और मेघावी युवाओं की संघर्ष क्षमता को निजी क्षेत्र में १२-१२ घंटे खपकर सस्ते में समेटा जा रहा है। अयोग्य,मुन्ना भाई ,रिश्वत देने की क्षमता वाले - अयोग्य और बदमाश किस्म के लोग आरक्षण की वैशाखी या सत्ता का प्रसाद पाकर अपना उल्लू सीधा करने में सफल हो जाया करते हैं। भृष्टाचार के 'गर्दभ' पर सवार निक्म्मे लोग जब डॉक्टर ,इंजीनियर,पुलिस, प्रोफ़ेसर,प्रशासक,प्रोफेसनल्स ,खिलाडी या नेता होंगे तो देश और समाज की बदहाली पर आंसू बहाने का नाटक क्यों ?
व्यवस्था के उतार या 'मूल्यों की गिरावट' पर इतना कुकरहाव क्यों? भृष्ट अफसर मंत्री और नेताओं के निठल्ले-अकर्मण्य रिस्तेदार ही जब पूरे सिस्टम पर काबिज हो चुके हों तो ईमानदार,योग्य और चरित्रवान युवाओं के समक्ष संगठित 'संघर्ष' के अलावा कोई रास्ता नहीं। मध्यप्रदेश में विगत शिवराज सरकार के दौर में 'व्यापम' और खनन भृष्टाचार की अनुगूंज या मोदी सरकार प्रथम के जमाने में RBI, सुप्रीम कोर्ट जज की न्युक्ति इत्यादि के मुद्दे तो देश की भृष्टतम व्यवस्था की हाँडी के एक-दो चावल मात्र हैं।
कैरियर निर्माण के व्यक्तिगत संघर्ष में - सामाजिकऔर राष्ट्रीय सरोकार पूर्णतः तिरोहित होते ही जा रहे हैं ,साथ ही मौजूदा नई दुनिया का उत्तर आधुनिक ग्लोबल युवा -अपने पूर्वजों से भी ज्यादा असंरक्षित धर्मभीरु,लम्पट और दिशाहीन होता जा रहा है। धूर्त शासक वर्ग द्वारा उसे प्रतिस्पर्धा की अँधेरी सुरंग में धकेला जा रहा है। उसे भौतिक और निजी सम्पन्नता कीमरुभूमि में नख्लिस्तान बनाकर दिखाने और कार्पोरेट जगत  के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। उसके हाथ पैर बांधकर गहरे कुँए में फेंककर तैरने और सबसे पहले आत्मउत्सर्ग के लिए हकाला जा रहा है। शातिर स्वार्थी प्रभूवर्ग का कहना है ' की बहाव के विपरीत तैरकर जो पहले बाहर आएगा उसे 'सफलता ' की सुंदरी वरमाला पहनायेगी।
व्यक्तिगत आकाँक्षा,महत्वाकांक्षा की मृग मरीचिका के मकड़ जाल में फंसे हुए युवाओं को यह समझने का अवसर ही नहीं दिया जा रहा कि नैसर्गिक -प्राकृतिक संसाधन , जीवकोपार्जन के संसाधन ,शैक्षणिक-प्रशिक्षिणक सुविधाएँ,प्रोन्नति के अवसर , जीवन यापन की मानवीय शैली और अभिरुचियाँ उनसे कोसों दूर होतीं चलीं जा रहीं हैं। उसे नहीं मालूम की उनके लिए नैगमिक और राज्य सत्तात्मक संरक्षण का अनुपात किस हालात में है। उत्तर भारत में और खास तौर से हरियाणा -पंजाब में स्त्री -पुरुष के लेंगिक अनुपात के क्षरण की ही तरह आधुनिक युवा पीढ़ी के लिए भी राज्य सत्ता के संरक्षण का अनुपात अर्थात संवैधानिक अधिकारों -अवसरों का अनुपात दयनीय है।
जिस तरह इंदौर सराफा बाजार की गन्दी नालियों से कुछ निर्धन और वेरोजगार युवा-नर -नारी बाल्टियों में कीचड भरभर कर अपने झोपड़ों में ले जाते हैं, ताकि उसमें तथाकथित 'संघर्ष' करते हुए गोल्ड' का कोई टुकड़ा या कण उन्हें मिल जाए। इसी तरह की हालात जिजीविषा के लिए संघर्षरत आधुनिक सम्मान आक्षांक्षी युवा पीढ़ी की है, जो अपराध जगत को पसंद नहीं करते जिन्हे शार्ट कट पसंद नहीं वे ही निरीह और मेघावी युवा प्रतिस्पर्धा की भट्टी में झोंके जा रहे हैं। ये युवा न केवल भारत में बल्कि दुनिया के उन तमाम राष्ट्रों में भी संघर्ष कर रहे हैं,जहाँ उनके किशोर हाथों में बन्दुक पकड़ाई जा रही है। उनके खून के प्यासे सिर्फ मजहबी उन्मादी ही नहीं हैं,बल्कि वे भी हैं जो नव बाजारीकरण -वैष्वीकरण तथा निगमीकरण के तलबगार हैं.उन्हें यह जानने की फुर्सत ही नहीं कि इस तरह के संघर्ष से इंसान नहीं हैवान पैदा हुआ करते हैं।
श्रीराम तिवारी

धारा 370 और 35A काल कवलित

मैं कांग्रेस और इंदिरा गांधी की रीति नीति का हमेशा विरोधी रहा हूँ और वर्षों तक मुर्दाबाद के नारे भी लगाये!किंतु जब इंदिरा गांधी के निर्देश पर 'ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार' हुआ तो उसका तहेदिल से समर्थन किया!और इससे पूर्व जब उन्होंने सोवियत संघ से दोस्ती की और बांग्लादेश बनाया,पाकिस्तान के बलात्कारी फौजियों को सरेंडर कराया एवं सिक्किम का जबरन भारत में विलय कराया तब मैने उनके जिंदावाद के नारे भी लगाये !
भाजपा,संघ परिवार,नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ हम 20 साल से लगातार लिख-बोल रहे हैं!किंतु जब देखाकि हाफिज सईद,अजहर मसूद,पाकिस्तान की आर्मी, आईएसआई,हुरियत,अल कायदा,और अन्य अनेक इस्लामिक आतंकियों,अलगाववादियों की जम्मू कश्मीर पर बाकई बुरी नजर रही है,तो भारत की जनता ने नरेंद्र मोदी को एक और मौका दिया जिसका परिणाम यह है कि धारा 370 और 35A अब काल कवलित हो चुके हैं! भारत का नागरिक होने के बावजूद जो लोग इस कार्यवाही का विरोध कर रहे हैं और विधवा विलाप कर रहे हैं, वे इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिये जाएंगे!
जो लोग इस तथ्य से बाकिफ नही कि जम्मू कश्मीर वालों को तमाम सुख सुविधाएं देने के बावजूद वे भारत के खिलाफ बग़ावत का स्वर बुलंद कर रहे थे, वे महामूर्ख हैं! अब यदि पीएम नरेंद्र मोदी ने एनएसए डोबाल, गवर्नर सतपाल मलिक और ग्रहमंत्री अमित शाह की काबिलियत से जम्मू कश्मीर का रणनीतिक पुनर्गठन किया है तो पाकिस्तान के पेट में दर्द क्यों ? पाकिस्तान की चिंता तो फिर भी समझ में आती है, किंतु इस राष्ट्रीय संकट की घड़ी में कुछ गैर कश्मीरी भारतियों का कश्मीर पुनर्गठन विरोध न केवल समझ से परे बल्कि नितांत निंदनीय है।

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

Donald Trump,Imaran khan and Narendra modi....


विगत शनीचर की रात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मुलाकात के दौरान एक ऐसा बयान दिया कि कूटनीति के विशेषज्ञों की रातों की नींद उड़ गयी.......
ट्रम्प ने इमरान से कहा कि दो हफ्ते पहले ( G20 देशो के सम्मेलन में ) मैं मोदी से मिला था, उन्होंने पूछा था कि आप कश्मीर पर मध्यस्थता करना चाहेंगे?.......ट्रम्प का अगला वाक्य था.... 'मुझे लगता है कि भारत मसला सुलझाना चाहता है और आप भी, मुझे मध्यस्थता में खुशी होगी'
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह एक ऐसा बयान था जो देश विदेश में फैले करोड़ो भारतीयों को गहरा ज़ख्म दे गया क्योंकि अभी तक भारत पाकिस्तान संबंधों में खासतौर पर कश्मीर विवाद को लेकर हमारा रुख यह है कि इस विवाद को हम आपस में बैठकर सुलझाएंगे किसी तीसरे पक्ष की इसमे कोई भूमिका नही होगी यह बात शिमला समझौते के तहत पाकिस्तान भी स्वीकार कर चुका है,
1974 के बाद पहली बार किसी बड़ी महाशक्ति के प्रमुख ने सार्वजनिक मंच से इतनी बड़ी बात कही है और यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ट्रम्प ने यह कहा है कि किसी तीसरे पक्ष को शामिल करने की बात मैंने नही कही बल्कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने उनसे अनुरोध किया कि आप कृपा करके इस बातचीत में शामिल हो जाए
रातोरात विदेश मंत्रालय ने इस बयान का खंडन जारी किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसी कोई बात ट्रम्प से नही कही लेकिन यह कोई किसी जिले या छोटे मोटे राज्य की पॉलिटिक्स नही है यह अंतराष्ट्रीय कूटनीति है यहाँ जो भी बाते होती है वह इतनी आसानी से दब नही जाती, एक एक बात का, यहाँ तक कि बॉडी लैंग्वेज तक का गहरा मतलब निकाला जाता है
भारत के विदेश मंत्रालय के खण्डन किये जाने के बाद आप यह सोच रहे हैं कि ट्रंप आसानी से अपनी बात से पलट जाएंगे ओर बोलेंगे की 'हे हे है मैं तो मजाक कर रहा था' तो माफ कीजिएगा आप बिल्कुल गलत सोच रहे हैं
पिछली कुछ घटनाओं पर गौर करे तो आप पाएंगे कि ट्रम्प के बड़बोलेपन को बढ़ावा हमने स्वयं दिया है हमने ही उसे सिर पर चढ़ाया है जिसका परिणाम यह है कि वो आज कान में मूतने की गुस्ताखी कर रहा है
खासतौर से आप याद कीजिए पुलवामा के बाद का घटनाक्रम भारत द्वारा एयर स्ट्राइक करने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहते हैं कि इस हमले में करीब 50 जवानों को खोने के बाद 'भारत कुछ बड़ा करने की सोच रहा है' इसके बाद ही भारत ने एयर स्ट्राइक की थी आप क्या सोचते है कि कुछ 'बड़ा करने'की बात का ट्रम्प को इतना सटीक अंदाजा कैसे लग गया होगा
उस वक्त यह भी खबर आई थी कि अजित डोभाल ने अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो से बात की है
उसके ठीक बाद जब भारतीय पायलट अभिनंदन को पाकिस्तान ने कैद कर लिया........अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प उस वक्त उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ वियतनाम में शिखर वार्ता में भाग ले रहे थे वही से उन्होंने बयान जारी कर के कहा कि 'भारत-पाकिस्तान के बीच जारी संघर्ष को लेकर जल्द ही अच्छी खबर आने वाली है' ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने भारतीय पायलट अभिनंदन को रिहा करने का ऐलान कर दिया
इसी दौरान ट्रम्प ने एक ओर बयान दिया था जिस पर भारत को उसी वक्त आपत्ति लेनी चाहिए थी जिसका दुष्परिणाम आज सामने आया है.......... ट्रम्प ने उस वक्त ही साफ कर दिया था कि कि इस 'सब में वह मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है'. यह उसका ऑफिशियल बयान था जाहिर है कल रात दिए गए बयान की भूमिका पूरी तरह से पहले ही तैयार कर ली गयी थी ओर हो सकता है कि ट्रम्प ने उस वक्त इमरान खान को तभी कश्मीर पर मध्यस्थता का आश्वासन दे दिया हो,......
हमें यह भी ध्यान देना होगा कि ट्रम्प का रुख इस वक्त पाकिस्तान के पक्ष में नजर आ रहा है अफगानिस्तान में तालिबान के साथ चल रहे 17 वर्षो से अधिक संघर्ष को समाप्त करने की कोशिशों में पाकिस्तान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.........पाकिस्तान ने पिछली बार ही भारत पाक तनाव के मद्देनजर अफगानिस्तान के मुद्दे पर अमेरिका को चेतावनी दे दी थी............. उसने कहा कि अगर तनाव बना रहता है तो इस्लामाबाद अफगान शांति वार्ता का समर्थन करने में असमर्थ होगा। यही नहीं पाकिस्तान ने तालिबान के साथ मध्यस्थता नहीं करने की भी धमकी दी थी
अमेरिका की ट्रम्प सरकार अफगानिस्तान में युद्ध भरा माहौल को समाप्त करने के लिए उत्सुक है. एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 45 बिलियन डॉलर सालाना इसमें खर्च होता है, और वहां तैनात 14,000 अमेरिकी सैनिकों में से अधिकांश या सभी को वो वापस बुलाना चाहता है और अगर पाकिस्तान इसमें अमेरिका का साथ देता है तो ये उसके पक्ष में जा सकता हैं..... यानी अमेरिका की भी गोटी वहाँ दबी हुई है.......
चीन पहले ही पाकिस्तान का मित्र बना हुआ है ऐसे माहौल में अमेरिका द्वारा कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष के बयान देना भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक असफलता है ..............पता नही! हम कब समझेंगे कि कोई डंका नही बज रहा है बल्कि हम ही अंतराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर पड़ते जा रहे है.............

दम्भ -पाखंड की जद में आ गए हम :-


निकले थे घर से जिनकी बारात लेकर ,
उन्ही के जनाजे में क्यों आ गए हम ?
चढ़े थे शिखर पर जो विश्वास् लेकर ,
निराशा की खाई में क्यों आ गिरे हम ?
गिराते हैं गाज जो नाजुक दरख्तों पै,
उन्हीकी पनाहों में क्यों आ गए हम ?
फर्क ही नहीं जहाँ नीति -अनीति का ,
ऐंसी संगदिल महफ़िल में क्यों आगए हम ?
खींचते हैं चीर गंगा-जमुनी तहजीव का ,
ऐंसे कौरवों के झांसे में क्यों आ गए हम ?
सदा लगती रहीं जिधर दावँ पर पांचाली,
उस शकुनि की द्यूतक्रीडा में आ गए हम ?
कर नहीं सकते कद्र अपने ही बुजुर्गों की ,
दम्भ -पाखंड की जदमें क्यों आ गए हम ?
अमानवीय बर्बर- भयानक अँधेरी है जो,
उस विषधर की वामी में क्यों आ गए हम ?
-श्रीराम तिवारी

राष्ट्रवाद ,समाजवाद,धर्मनिरपेक्षता !

भारत में गनीमत है कि संसद 'मॉब लिंचिंग' के खिलाफ कानून बना रही है!जबकि उधर कराची में एक मौलाना महाशय जियो टीवी चैनल पर बड़े गर्व से स्वीकार कर रहे थे कि पाकिस्तान में खुद उन मौलवी महाशय ने दर्जनों हिंदू लड़कियों का निकाह जबरन मुस्लिमों से करके उनका उद्धार किया!
कराची से कैराना तक जो कुछ होता रहा वह सबको मालूम है!किंतु सच स्वीकार करने का साहस बहुत कम लोगों में है! इस दौर का इतिहास बताता है कि दुनिया के तमाम असभ्य यायावर आक्रमणकारी और बर्बर मजहबी लुटेरे भारत को लूटने रौंदने में इसलिये सफल रहे,क्योंकि इस उपमहाद्वीप में यूरोप,चीन,जापान की तर्ज पर 'राष्ट्रवाद' नहीं था! और तब इसकी रक्षा के लिए कुछ करने का सवाल ही नही था!वेशक कभी- कभी आचार्य चाणक्य जैसे उद्भट विद्वानों के मार्गदर्शन पर चंद्रगुप्त मौर्या और उसके पौत्र अशोक जैसे महान जननायकों ने अवश्य राष्ट्रवाद का कुछ अवगाहन किया!किंतु बाकी सब तो भगवान भरोसे ही बैठे रहे!
ऐंसा नही था कि विदेशी हमलावरों से कोई हिंदुस्तानी लड़ा ही नही! किंतु यह सही है कि लड़नै वाले कम और जयचंद ज्यादा रहे!
1857 में या उसके पहले जो राजा रजवाड़े लड़े,वे अपने छोटे से गुलाम राज्य या जागीर के लिये ही लड़े!जैसे दुर्गावती,शिवाजी,राणा प्रताप ,झांसी की रानी !जो नही लड़े वे दोनों दीन से गये,क्योंकि वे न तो कुल मर्यादा बचा सके और न गुलामी से बच सके!जैसे राजा भारमल,राजा मानसिंह,वीरसिंहदेव बुंदेला! विदेशी हमलों को न रोक पाने वाले ये देशी राजा रजवाड़े अपने आपको भगवान से कम नही समझते थे!बल्कि शास्त्रानुसार तो वे इस धरती पर साक्षात विष्णु के प्रतिनिधि के प्रतिनिधि और प्रजापालक ही कहलाते थे !
किसान-मजूर -कारीगर के रूप में आम जनता की भूमिका केवल 'राजा की सेवा' करना ही था। जिन्हे यह कामधाम पसंद नहीं थी वे दंडकमंडल लेकर बाबा वैरागी हो गये!वे''अजगर करे न चाकरी ,पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए सबके दाता राम।।
''गा -गा कर ईश्वर आराधना के बहाने विदेशी आक्रांताओं को कोसते रहे या जुल्म -सितम को आमंत्रित करते रहे !इस भारतीय उपमहाद्वीप की समस्त कार्मिक और वैज्ञानिक ऊर्जा विदेशी आक्रमणों ने निगल ली!इसीलिये यहां वैज्ञानिक आविष्कारों और राष्ट्रवाद ,समाजवाद,धर्मनिरपेक्षता जैसे क्रांतिकारी विषयों पर सोचने का अवसर ही नही मिला! वैसै भी हजार साल गुलाम रही कोई कौम इन लोकतींत्रिक शब्दों का महत्व इस देश की जनता उस सामन्ती दौर में कैसे समझ सकती थी ?
आजादी के 72 साल बाद भी इस देश की हालत वैसी ही है ,जैसी गुलामी के दौर में थी! अभी तक स्वतंत्र निष्पक्ष न्याय और चुनाव प्रणाली भी विकसित नहीं कर पाये! अतीत में इस धरती के मूल और आयातित यायावरों ने आजादी का दुरुपयोग करते हुये इस देश को बिखराव के गर्त में धकेला है!
बिडम्बना ही है कि अत्याधुनिक तकनीकी दक्ष,एंड्रॉयड फोनधारी आधुनिक युवा पीढ़ी नशेड़ी,गंजेड़ी तो आसानी से हो सकती है! किंतु 'गूगल सर्च 'का सहारा लेकर भी वह लोकतंत्र ,धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद जैसे क्रांतिकारी शब्दों की सटीक परिभाषा ठीक से पढ़ लिख नही सकती।इसीलिये तो फेंकू नेता लोग,वर्तमान युवा पीढ़ी को चाय पकौड़े बेचने से ज्यादा का महत्व नही देते!
श्रीराम तिवारी!

सोमवार, 8 जुलाई 2019

फिर बन गई सरकार!

आम चुनाव में हारकर,क्यों भरते हो आह!
नैतिकता आदर्श की,किसको है परवाह!!
कांग्रेस यदि भृष्ट थी,सो गई इसीलिए हार।
पाकसाफ़ है भाजपा,फिर बन गई सरकार !!
भृष्टाचार में लिप्त हैं,अफसर बाबू बदकार!
फिर भी हाँडी काठ की ,चढ़ती बारम्बार !!
घोर कुशासन व्याप्त है,हर विभाग में आज!
नवरत्नों पर गिर रही, निजीक्षेत्र की गाज!!
श्रीराम तिवारी

उसे क्या खबर कि दवा है क्या?

वो जो रूढियो का गुलाम है उसे क्या पता कि नया है क्या?
जिसे टोटको मे यकीन हो उसे क्या खबर कि दवा है क्या?
ये कमाल भी क्या कमाल है कि जो मरीज है वो हकीम है!
जिसे खुद खुदा का पता नही, वो बता रहा है खुदा है क्या?
है रगो मे उसके सफेद खूं और  वो करे है वादा खिलाफियाँ,
जिसे बेवफाई पे नाज हो, उसे क्या पता कि वफा है क्या?

यों ही मुस्कुराया कर!

खुद को इतना भी मत बचाया कर!
बारिशें हों कभी तो भीग जाया कर!!
चाँद लाकर कोई नहीं देगा तुझे,
खुद अपने चेहरे से जगमगाया कर!
दर्द हीरा है, दर्द मोती है,पन्ना है,
दर्द को आँखों से मत बहाया कर!!
काम ले कुछ हसीन होंठो से भला,
बातों-बातों में यों ही मुस्कुराया कर!
धूप मायूस हो लौट जाती है तन्हा,
छत पे तन्हाई मिटाने आया कर!!
कौन कहता है तुझसे दिल लगाने को,
फासले मंजूर पर हाथ तो मिलाया कर !

गुरुवार, 27 जून 2019

अच्छे दिन कब आएंगे ,जनता करे पुकार?

बिजली संकट बढ़ चला,अफसर भये मक्कार!
अधिभारों के नाम पर,लूट रही सरकार।!
भारतवर्ष में बढ़ रहे,हिंसा रेप व्यभिचार।
अर्से से कश्मीर में, रुका न गोली बार।।
डीजल पैट्रोल महँगे हुए,कीमत बढ़ी अपार।
अच्छे दिन कब आएंगे ,जनता करे पुकार।।
वादों जुमलों का भरा,जैसे मेला कुम्भ!
जो सेवक थे राम के, हो गये शुंभ निशुंभ!!

गुरुवार, 6 जून 2019

कारी घटा घिर आये,खेतों में बरस जाए,

बोनी की वेला में जो देर करे मानसून,
निर्धन किसान मन शोक उपजावै है!
बंगालकी खाड़ीसे न आगे आवें इंद्रदेव,
बानियां बक्काल दाम दुगने बढ़ावै है!!
वक्त पै बरस जाएं खूब मानसूनी बदरा,
तो दादुरों की धुनि पै धरनि हरषावे है!
कारी घटा घिर आये,खेतों में बरस जाए,
सारंग की धुनि संग सारंग भी गावै है!!
बोनी की बेला में जो देर करे मानसून ,
निर्धन किसान मन शोक उपजावे है !