गुरुवार, 17 जनवरी 2019

बगुला भगतों का क्या कहना ?

भारत जन की नीति बन गई ,शोषण को सहते रहना ।
नये दौर के महाठगों का चाल चरित्र का क्या  कहना? 
सार्वजनिक सम्पत्ति खा गये , निजी क्षेत्र के छुट्टा सांड । 
जुमलेबाजी बेरोजगारी और महंगाई का क्या कहना ?
नोटबंदी और जीएसटी से ,बंद हो रहे लाखों उद्योग! 
भांड विदूषक नेताओं, बगुला भगतों का क्या  कहना ?

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