गुरुवार, 23 जुलाई 2015

व्यापम के दोहे ;-श्रीराम तिवारी



 [१]  मामागिरी  के फेर में ,पस्त  हुए सरकार।

   मध्यप्रदेश का कर चले ,जमकर बंटाढार।।


[२]  झूँठ-कपट छल -छंद के ,चूके तीर कमान।

       व्यापम गच्चा दे गया ,चूक गए चौहान।।


[३]   सत्ता मद का सदा ही ,होता सूरज अस्त।

      पाप की हाँडी  फोड़ने ,नियति रही अभ्यस्त।।


[४]     भृष्टाचार के ताप की , रंग लाएगी आँच।

         अभी तो ये शुरुआत है ,सीबीआई जाँच।।


[५]  कर-कर वादे खोखले ,नेता  ठोकें  पीठ।

     भारत के  इतिहास में ,हुए न ऐंसे  ढीठ।।


                    श्रीराम तिवारी


     

       

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