शुक्रवार, 29 जून 2018

खेतो में भी cc tv कैमरे लगाकर तो देखो !

  • ना मस्जिद की बात हो,न शिवालों की बात हो,*
    *जो बेरोज़गार हैं पहले उनंके निवालों की बात हो.*
    *मेरी नींद को दिक्कत, ना भजन से.है ना अज़ान से है,*
    *मेरी नींद को दिक्कत, खुदकुशी करते किसान से है*
    *किसी के बुझते चूल्हे को पुनह सुलगाकर देखो।*...
    *किसी के पांव के छालों पर दवा लगाकर देखो।।*
    *मजदूरों-किसानों  की मेहनत पर गुलछर्रे उडानेवालों*
    *समझ में आ जाएगा मूल्य श्रम का और फसलो का*
    *जरा कभी खेतो में भी cc tv कैमरे लगाकर तो देखो *

फर्क न रहा जहाँ नीति -अनीति का.....!

  • घर से तो निकले थे सारी खुशियाँ जुटाने,
    लम्हा लम्हा उदास वीराने में आ गए हम।
    होगा कबीलों में कभी जंगल का क़ानून,
  • किंतु उसी के मुहाने पर फिर आ गए हम।।
    हांकते हैं कारवाँ सत्ता के प्यादे जिस दौरमें,
  • उस पतनशील दौर की जद में आ गए हम।
    स्वार्थमें फर्क न रहा जहाँ नीति -अनीति का,
  • खरामाखरामा वो गली वो शहरआगए हम!!
  • लगती रही हैं दाँवपर हमेशा जिधर पांचाली ,
  • जाने कब दुर्योधन के उस शहर आ गए हम ।
  • चर्चा नहीं किसी जनसंघर्ष क्रांति की जहां,
  • ऐंसी बेजान महफ़िल में क्यों आ गए हम।।

और बोलो हर हर मोदी,,,,,,!

  • 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान बाबा रामदेव, अण्णा हजारे,मोदीजी,केजरीवाल और संघ ब्रिगेड ने शिद्दत से यह प्रचारित किया था कि स्विस बैंकों में 4 लाख करोड़ रुपये काला धन जमा है! ये वही रकम है जिस मद में से 15-15 लाख जन घन खातों में जमा होने थे! वो सब तो जुमलेबाजी ही सावित हुआ किंतु ताजा खबर है कि यह आंकड़ा कपोल कल्पित था ! कुल रकम 7 हजार करोड़ ही जमा है!और इस रकम का आधा,याने साढे तीन करोड़ रु.विगत 3 साल में याने मोदीजी के राज में ही जमा किया गया है! मोदीजी की ताजपोशी से देश के गद्दारों को यह लाभ हुआ कि चार सालों में काली रकम डबल हो गई है!और बोलो हर हर मोदी! झूठों ने लोकतंत्र की खूब जड खोदी!कालेधन और स्पेक्ट्रम संबंधी झूंठे दुष्प्रचार का लाभ भाजपा को या 'आप' जैसे गैर जिम्मेदारों को हुआ! उम्मीद है कि बेचारे सीधे सरल डा. मनमोहनसिंह को झूंठमूंठ बदनाम करने वालों को देश की जनता एक दिन उनके गुनाहों की सजा जरूर देगी!

जनता की शामत आयेगी....!

  • चालचरित्र चेहरे की कालिख,क्या साबुन से धुल पाएगी,
    बड़बोले बकरों की अम्मा,कब तक खैर मनाएगी ?
    खरदूषण निशिचर भगनी हों,राक्षस कुल की सूर्पनखायें ,
    लोकतंत्र की पंचवटी में,अब मृगया काम न आयगी ।
    छद्मवेश सत्ताधारी समझेंगे कब अपनी जन वैदेही को,
    तनी हुई ये भृकुटि काल की,क्या लंकाकाण्ड करायेगी?
    पूंजीवाद और धर्मान्धता दोनों हैं कुम्भकरण रावण जैसे ,
    यदि अच्छे दिन आये इनके,तो जनता की शामत आयेगी! 
  • जनता की शामत आयेगी....! 

श्रीराम तिवारी

गुरुवार, 28 जून 2018

Modi ji ke 15 lakh,,,,!

  • मरणासन्न पिता के पास दो भाई और एक बहन बैठी थी!
  • पिता ने कहा- "मैंने जिनसे उधार लिया था, सबको चुका दिया है। जिनसे पैसे वापस लेने थे, उनसे ले भी चुका हूँ। सिर्फ एक जगह बड़ी रकम फंसी है। तुमलोग वसूल सको, तो आपस में बांट लेना।"
  • तीनों संतान एक साथ बोली- "जी बाबूजी, जैसी आपकी आज्ञा। किससे कितने पैसे लेने हैं?"
  • ...
  • पिताजी बोले- "पता नहीं कब मेरे प्राण निकल जाएं, इसलिए मैंने घर के नीचे वाले कमरे की अलमारी में एक खत लिख कर रखा है। मेरी मृत्यु के बाद देख लेना।"
  • थोड़ी देर बाद पिताजी ने अंतिम सांस ली। सब काम निपटाने के बाद बच्चों ने घर के कमरे में रखा खत निकाला। लिखा था-
  • "2014 में मोदी ने 15 लाख देने का वादा किया था। मेरे हिस्से के रुपये मिल जाऐं तो तुम तीनों पांच-पांच लाख बांट लेना!"
    # हरि ओम् #नमो नमो #

पांच वरदान !

  • यदि अचानक कभी किसी दैवी शक्ति से अर्थात ब्रह्मतत्व से आपका भी युधिष्ठिर की तरह साक्षात्कार हो जाए,और वो पराशक्ति आपसे पांच मन वांछित वरदान मॉंगने को कहे,तो आप क्या वरदान मांगेंगे ?
  • आपकी सुविधा के लिए बतौर उदाहरण मैं यहाँ अपनी च्वाइस बता देता हूँ !
  • पहला वर :-हे प्रभु ! यदि बाकई पुनर्जन्म होता है,तो मेरा हर जन्म भारत भूमिपर ही हो!जिस घर में जन्म हो वहाँ विवेकानंद, भगतसिंह ,चेगुवेरा,मुस्तफा कमाल अतातुर्क के विचारोंऔरआदर्शों का सम्मान होता हो!
  • ...
  • दूसरा वर :-जो लोग भारत में पैदा हुए,यहाँ की खाते हैं,यही जिनकी मातृभूमि है ,वे सभी अपने धर्म,मजहब और जाति से ऊपर उठकर भारत देश को ही अव्वल माने !प्रभु !
  • तीसरा वर :-जो दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी तत्व सत्ता में आकर पूँजीपतियों की चरण वंदना करते हैं,मजदूरों,किसानों और वामपंथ को गाली देते हैं,उन्हें थोडी सद्बुद्धि देना प्रभु !
  • चौथा वर :-जो लोग भारतभूमि पर हिंदू, सिख,जैन,बौद्ध,ईसाई और मुसलमानों को बरगलाते हैं ,जातिवाद के नाम पर सत्ता हथियाते हैं, देश भक्ति के नाम पर विपक्ष को खत्म करने के सपने देखते हैं,उन दुष्टों का सत्यानाश हो प्रभु !
  • पाँचवाँ वर :-जो लोग स्वयंभू देशभक्त हैं ,वे भारत के दलितों,कम्युनिस्टों, मुसलमानों पर अनावश्यक संदेह न करें हैं,उन्हें आतंकी न समझें,हे ईश्वर उन्हें सही दॄष्टि प्रदान करो !

पापी पेटका ही सवाल है!

चूंकि प्रतिक्रियावाद और साम्प्रदायिकता इस देश के आधुनिक पूँजीपतियों की जुडवा पसंद हैं, इसलिए अधिकांस न्यूज चैनल या तो मंदिर मंदिर चिल्ला रहे हैं या मोदी मोदी रटते रहते हैं! उनके पास वे ही सूचनायें हैं जो गोदी मीडिया उपलब्ध कराता है! और वे वही बोलते हैं जो उनके आका बुलवाते हैं! क्योंकि इधर भी पापी पेटका ही सवाल है!
अंबानी,अडानी के उपकार मोदीजी भला कैसे भूल सकते हैं?उन्ही के दम पर तो उन्होंने पहले अपने गुरूवर आडवानी जैसे दिग्गजों को और बाद में कांग्रेस सहित पूरे देश को पछाड़ा है! अब तो झक मारकर वही करना पड़ेगा जो धन्ना सेठ और बाबा लोग कहेंगे !

पाकिस्तान कोई बालू की लकीर नही है!

भारत -पाकिस्तान के कुछ मूर्ख लोग शगूफा छोड़ रहे हैं कि 2019 में यदि मोदी जी फिर से जीत गये तो पाकिस्तान खत्म हो जायेगा!वेशक भारतीय आवाम मोदी और भाजपा से बेहद नाराज है,किंतु भाजपा को हरा पाने की विपक्ष की ही अभी कोई तैयारी नही है! माया,ममता,शिवसेना और आप जैसे क्षेत्रीय दल जबतक कांग्रेसऔर वामपंथ से दूरी नही मिटाते तब तक भाजपा की बल्ले बल्ले है! इसलिये मोदी और भाजपा को सीटें भले ही कम मिलें,किंतु 2019 में सरकार एन डी ए की ही बनेगी!जहां तक पाकिस्तान का प्रश्न है तो वह कोई बालू की लकीर नही है कि हवा के झोंके से मिट जायेगा! वहां भी तो मजदूर हैं, दलित-अल्पसंख्यक हैं,वामपंथी हैं और भारत से दोस्ती चाहने वाले लाखों हैं! यदि पाकिस्तान के खिलाफ जंग लडने का किसी को शौक है तो खुद जाकर लड़ मरे! भारत पाकिस्तान को जंग में धकेलकर पूरे दक्षेस को बर्बाद करने का मंत्र जपने वाले सावधान -'नमो नमो' सिर्फ मन में ही जपा करो! पालिटिक्स में 'नमो नमो'मत पढ़ो!


धर्म और राजनीति !

  • यदि कोई सभ्य सुशिक्षित मनुष्य 'भाववादी उटोपिया' की असफलताओं को समझना चाहता हो तो उसे विश्व मानव सभ्यताओं के इतिहास को वैज्ञानिक नजरिये से समझना होगा! मानव इतिहास में ऐंसा कोई भी धर्म-मजहब,पंथ,दर्शन या विचार नहीं है,जिसने अपने आपको स्थापित कराने में या दूसरों पर थोपने के लिए शक्ति का इस्तेमाल न किया हो ! भारत के वैदिक मन्त्रदृष्टा मुनियों ऋषियों,बौध्दों,जैनों,वैष्णवों और इस्लाम की सूफी धारा में भले ही 'अहिंसा परमो धर्मः' और 'अनलहक 'का जाप किया जाता रहा हो,किन्तु कट्टरपंथी अनु...यायीयों ,संरक्षकों शासकों और चक्रवर्ती सम्राटों ने अपने[अ ] धर्म के लिए अपने सहोदर भ्राताओं का खून बहाने में भी परहेज नहीं किया।भले ही बाद में अनगिनत लाशों को देखने के बाद किसी राजा या सेनापति को आत्मग्लानि हो गयी हो !और वह अपने बुढापे में अहिंसावादी' हो गया हो ! अतीत के भारत,चीन,और यूनान में आधुनिक लोकतांत्रिक बहस से भी बेहतर और सभ्य तरीके से पक्ष-विपक्ष के मध्य, विद्वान गुरुओं और उनके पट्ट शिष्यों के मध्य,प्रश्नोत्तर अथवा शास्त्रार्थ हुआ करते थे! धर्म और राजनीति के क्षेत्र में आलोचनात्मक मत व्यक्त करने का इतिहास आष्चर्यजनक रूप से बहुत पुराना है। किन्तु इस आलोचना अथवा 'मतखण्डन'को कट्टर पंथी इस्लाम ने और भारत के भाववादी -परम्परावादियों एवं स्वार्थी शासकों ने कभी पसंद नहीं किया।

मेरी नजर में आपातकाल !

  • आपातकाल की घोषणा के एक माह पहले ही मैं सीधी से ट्रांसफर होकर गाडरवारा आया था! गाडरवारा आने के तीन महीने बाद ही मुझे चार्ज सीट दी गई कि आप 24 घंटे में चार्जसीट का जबाब दें!अन्यथा क्यों न आपको पी & टी विभागकी सेवाओं से बर्खास्त कर दिया जाये? आरोप था कि आप नाइट ड्युटी के दौरान टेलीफोन एक्सचेंज में ताला डालकर घर चले गए! चूँकि उस दिन तत्कालीन संचारमंत्री स्व.शंकरदयाल शर्मा किसी काम से,दिल्ली से जबलपुर जा रहे थे! और गाडरवारा रास्ते में पड़ता है!उनसे सौजन्य भेंट के लिये इंतजार कर र...हे रामेश्वर नीखरा और नीतिराजसिंह इत्यादि नेताओं तथा अफसरों को पता चला कि मंत्रीजी की गाड़ी गाडरवारा नही रुकी! तब उन्होंने तुरंत एक्सचेंज से संपर्क किया, किंतु वहां से कोई जबाब नहीं मिला!क्योंकि मैं नया नया ही था और नियमों से अनभिज्ञ भी,इसलिये रात्रि वहीं एक्सचेंज के विश्रामगृह में सो गया! यद्दपि आपातकाल की उस छोटी सी भूल की मुझे कोई सजा नही दी गई ! सिर्फ एक लाइन की चेतावनी दी गई!'आइंदा सावधान रहें' उस एक लाइन से सबक सीखकर मैने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से 40 साल ड्युटी की! फिर किसी नेता मंत्री-अफसर से कभी डरा नही!इस सावधानी और अपनी शानदार क्रांतिकारी ट्रेड यूनियन में लोकल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संघर्ष की बदौलत आगे बढ़ता गया! पूरे 5 प्रमोशन भी प्राप्त किये ! हो सकता है कि किसी को आपातकाल में कुछ नुकसान हुआ हो! किंतु मेरी नजर में तो आपातकाल कुछ तु्र्टियों के बावजूद वास्तव में अनुशासनविहीन भारतके लिये एक जरुरी अनुशासन पर्व ही था!इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को भारतमें आपातकाल लगाया,बुरा किया! तत्कालीन विपक्ष ने 1977 में जनता पार्टी बनाई और जीते भी !किंतु संघ और जनता पार्टी की दोहरी सदस्यता के सवाल पर सभी घटक आपस में लड़ मरे,बहुत बुरा किया!! 1980 में देश की जनता ने इंदिरा गांधी को पुनः जिता दिया! याने उस जनादेश के मार्फत जनता ने इंदिरा जी का आपातकाल वाला अपराध क्षमा कर दिया! यही वजह रही कि आपातकाल के बाद भी केंद्र में कांग्रेस नीत गठबंधन की सरकारें लगातार सत्ता में बनी रही!अब जो लोग आपातकाल के बहाने कांग्रेस को कोस रहे हैं वे दोगले हैं!