गुरुवार, 15 अगस्त 2019

नंगे भूँखों की कैसी आजादी?

आन बान सम्मान देश का, 
प्रतिपल होता क्षरण देश का।
सत्ता में जो डटे हुए हैं,
उन्हें नहीं भय नाम लेश का।। 
कारपोरेटकल्चर का चक्कर, 
सुपरमुनाफों के निवेश का।
सार्वजनिक उपक्रम खा डाले,
अठ्ठहास है निजी क्षेत्र का।।
बहुराष्ट्रीय निगमों ने फिर से,
भारत जन को ललकारा है।
अमन चैंन साझा हो सबका,
यह पावन ध्येय हमारा है।।
नंगे भूँखों की कैसी आजादी?
वे बोल रहे 'सारा जहाँ हमारा' है।

कश्मीर घाटी में इंटरनेट का दुरुपयोग.

हम मोदी जी की नीतियों को जरा भी पसंद नही करते ! हमारी नजर में भाजपा निहायत साम्प्रदायिक और पूँजीवादी पार्टी है! किंतु कश्मीर के संदर्भ में हम केंद्र सरकार और अपनी फौज के साथ हैं! क्योंकि हम देश के हर क्षेत्र में अलगाववादियों और आतंकियों के खिलाफ हैं! राष्ट्रीय अखंडता को संकट में डालने वालों को हम खुलकर खेलने का मौका कदापि नही देंगे! आदतन हर चीज़ का विरोध करने वाले अपरिपक्व और जड़ बुद्धि लोग केंद्र सरकार की कश्मीर नीति पर तो लगातार हंगामा कर रहे हैं, किंतु लाखों मजदूरों की छटनी और वेरोजगारी के सवाल पर केवल बयानों की रस्म अदायगी करने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं!
वे भूल जाते हैं कि आतंकी बुरहान बानी की मौत के बाद जब श्रीनगर 60 दिन तक कर्फ़्यू के साये में रहा और जब भारतीय सैनिकों को पत्थर मारे जा रहे थे,तब क्या लोकतंत्र खतरे में नहीं था?
धारा 370 और 35 A को हटाते वक्त केंद्र सरकार ने यदि कुछ दिनों के लिये इंटरनेट बन्द कर दिया,तो अब लोकतंत्र खतरे में आ गया!जबकि सबको यह अच्छी तरह मालूम है कि कश्मीर घाटी में इंटरनेट का दुरुपयोग पाकिस्तान पोषित अलगाववादियों और आतंकवादियों के कुटिल आकाओं द्वारा ही अधिकतर किया जाता रहा है! भाइयो बहिनों इस पर इतनी हाय तौबा क्यों?

शहीदों के सपनों का वेदना से मिलन हो गया!!

क्षण-क्षण आत्म गौरव के ,
दिव्यता से राष्ट्र को मिले !
हरी-भरी धरा खिल उठी,
और जन गण मन हो गया।।
आज मुक्ति संग्राम का लहू ,
जैसे फिर से जवां हो गया!
संघर्ष द्वन्द ग्रन्थ के सभी,
कई बार इस मुल्क ने पढ़े!!
भाग्य का विधान बन गया,
और भारत धन्य हो गया!
पड़ोसी शत्रू की कुचालों से,
मुल्क बार बार घायल हुआ ! !
धर्म जाति मजहब का,
मर्ज लाइलाज हो गया!
पूंजीवादी प्रचार तंत्र भी,
मुल्कका अभिशाप बन गया !!
जाति पाँति मजहब के
चुनाव में चलन बढ़ गये!
शनै: शनै: लोकतंत्र के,
स्तंभ चारों रुग्ण हो गये !!
बाजारवादी नीतियों से,
राष्ट्र हित नीलाम हो गया!
जैसे शहीदों के सपनों का
कत्ल खुले आम हो गया!!
सिद्धांतों के व्योम में हम ,
सदा प्रश्न बनकर घूमते रहे!
सभी क्रान्तियां अधूरी रहीं ,
संघर्ष सारा कुंद हो गया!!
बढ़ती आबादी- मंहगाई से,
यह मुल्क परेशान हो गया!
सिस्टम भृष्टाचार रिश्वत का,
व्यभिचार आम हो गया!
आज शहीदों के सपनों का ,
वेदना से मिलन हो गया!!
श्रीराम तिवारी-:

आओ शीश नवाएं उनको ,जो थे क्रांति वीर बलिदानी।।

भगतसिंह आजाद पुकारे,
जागो-जागो वीरो जागो।
आजादी है ध्येय हमारा ,
पीठ दिखाकर न तुम भागो।।
बांधो कफ़न शीश पर साथी,
रिपु रण में होगी आसानी।
स्वतन्त्रता की बलिवेदी पर ,
हंसते हंसते दो कुर्बानी।।
पुरुष सिंह थे वे हुतात्मा,
जिनने मर मिटने की ठानी।
आओ शीश नवाएं उनको ,
जो थे क्रांति वीर बलिदानी।।
जय हिंद...... जय भारत....
-श्रीराम तिवारी

आजादी के दीवानों ने, क्रांति ज्योति जलाई थी।

धूल धुअॉ धुंध से भरा राष्ट्र,
यह आँसुओं से भरा हुआ!
निर्धन ग्रामीण देखो गौर से,
हरेक चेहरा है बुझा हुआ!!
इन बड़े बड़े नगरों में देखो ,
जहां केवल भीड़ पसारा है।
भटक रही तरुणाई यहाँ की,
फिर भी सत्ता की पौबारा है।।
पूर्वजों आजादी के दीवानों ने,
एक क्रांति ज्योति जलाई थी।
होगा प्रजातंत्र -समाजवाद ,
सबने ऐंसी आस जगाई थी।।
जात पांत भाषा मज़हब की ,
उनने कटटरता ठुकराई थी।
आज़ादी के बाद अमन की ,
शहीदों ने राह दिखाई थी।।
अब भूँखे को रोटी मिल जाए,
निर्धन को मिले सहारा है ।
नंगे भूँखे की कैसी आजादी,
उसे तो सारा जहाँ हमारा है।।
-श्रीराम तिवारी

वर्ग संघर्ष का सिद्धांत क्या है?

वर्ग संघर्ष का सिद्धांत क्या है?
अधिकांस जन गण यह सोचते हैं कि कार्ल मार्क्स ने ही 'वर्ग संघर्ष' कराने कि शुरुआत की है!किन्तु यह सच नहीं है।वर्ग संघर्ष तो तब से चल रहा है,जब से मानव समाज का मुख्यत : दो परस्पर विरोधी वर्गों-श्रमजीवी और परजीवी वर्ग में विभाजन हुआ है!
'वर्ग संघर्ष' का अर्थ मात्र लड़ाई झगड़ा,मार पीट,तोड़ फोड़ ,हड़ताल,विरोध प्रदर्शन,नारे बाजी, हिंसा इत्यादि ही नहीं है। श्रमजीवी वर्ग का मन ही मन दुखी होना,शांतिपूर्ण ढंग से निवेदन करना-आदि भी वर्ग संघर्ष के ही प्रछन्न रूप हैं।
मार्क्स ने 1845 में अपनी 28 साल की उम्र में फायरबाख पर आधारित लेख में अपने पूर्ववर्ती सभी विचारकों के उस सिद्धांत को स्वीकार किया कि 'मनुष्य की भौतिक दशाएं उसके चरित्र का निर्माण करती हैं, किन्तु मार्क्स ने उसमें अपनी यह बात भी जोड़ दी कि वह मनुष्य ही है जो उन दशाओं का निर्माण करता है।इस संदर्भ में यह कहा कि शिक्षक को भी शिक्षण की जरूरत होती है।इसी लेख में मार्क्स का यह प्रसिद्ध कथन है कि 'दार्शनिकों ने अबतक ,दुनिया क्या है ?केवल इसकी व्याख्या की है, किंतु असली सवाल तो इस दुनिया को बदलने का ही है।
आमतौर पर यह माना जाता रहा है कि इतिहास रचने और उसे आगे बढ़ाने का काम अच्छे अच्छे विचार, विचारक, संत, महात्मा राजा,महाराजा,योद्धा इत्यादि ही करते हैं।
मार्क्स एंगेल्स ने मानव समाज और उसके इतिहास के वस्तुवादी अर्थात वैज्ञानिक विश्लेषण से इस बात को सिद्ध किया है कि इतिहास का निर्माण और उसका विकास श्रमजीवी समाज द्वारा अपने जीवन की अच्छी दशाओं के लिए किए जाने वाले सतत् संघर्षों के द्वारा हुआ है और होगा।

सोमवार, 12 अगस्त 2019

बहक जाता है आदमी।

मिलता है जब सत्ता पॉवर,
तो बहक जाता है आदमी।
सच बोलने पर भी अक्सर
उलझ जाता है आदमी।।
नेताओं के बोल बचन हों,
निकृष्टतम और चलताऊ,
चुनाव में उमड़ती है-भीड़,
तो बहक जाता है आदमी।
औरोंकी मेहनत पर मौज करे,
धू्त कृतज्ञता का स्वांग भरे,
ऊँचे पद पर प्रतिष्ठित होकर,
कितना गिर जाता हैआदमी।।
चमचों की तमन्ना है कि कोई ,
और चमत्कार हो जाये मुल्क में,
इसीलिये पाखंड की गिरफ्त में,
खुद फजीहत कराता है आदमी
श्रीराम तिवारी

सच्चाई और न्याय के रास्ते पर भीड़ नहीं होती !

"सच्चाई और न्याय के रास्ते पर भीड़ नहीं होती !"
वेशक, सचऔर ईमानदारी के रास्तेपर चलने के अनेक फायदे हैं। जैसे कि बार-बार झूंठ नहीं बोलना पड़ता। सदैव सशंकित भी नहीं रहना पड़ता।भाववादी होकर भी सत्पथ पर अग्रसर मानव को-किसी व्यक्ति,संगठन,धर्म- मजहब और ईश्वर जैसी पराशक्ति की दासता का भय नहीं रहता। देवता तो क्या शैतान की भी हैसियत नहीं कि ऐंसे सत्यानुरागी का बाल -बाँका कर सके । इस रास्ते पर चलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इस रास्ते पर ज्यादा भीड़ भी नहीं होती। जो मूर्ख असत्य आचरण में लिप्त हैं,उन्हें यह पथ डरावना और कंटकाकीर्ण नजर आता है,किन्तु न्याय -समानता -मानवता और सच्चाई से लेस सत्यनिष्ठ का पथ अति सुगम,मनोरम और खुशनुमा हरी-भरी वादियों से गुजरते हुए तथाकथित 'स्वर्गारोहण'जैसा दिखता है। जिसे यकीन न हो आजमा कर देख ले!जब तक भावजगत की यह उटोपियाई यात्रा पूरी नही हो जाती तबतक 'द्वंदात्मक भौतिकवाद' की ओर अग्रसर होना असंभव है!
श्रीराम तिवारी

इमरान भाई, आपको भारत के आंतरिक मामले में बोलने का हक नही है.

प्रति,
जनाब इमरान खान साहब,
बजीरे आजम पाकिस्तान,
हाल मुकाम-इस्लामबाद,
पाकिस्तान!
अस्लामवालेगुम!
*ईद मुबारक*
इमरान साहब आपने फर्माया है कि "RSS जर्मनी के नाजीवादी 'फासिस्टों'जैसा संगठन है और नरेंद्र मोदी 'हिटलर' हैं,जिन्होंने संघ के दबाव में कश्मीर को गेस्टापो के हवाले कर दिया है"
इमरान भाई, यद्यपि आपको भारत के आंतरिक मामले में बोलने का हक नही है,फिर भी शुभचिंतक के नाते हम आपके विचारों का संज्ञान लेते हुए याद दिला दें कि भारत की बर्बादी का मंसूबा लेकर आपके यहां सक्रिय महानीच हत्यारे दाऊद,हाफिज सईद,अजहर मसूद जैसे लाखों हैं!आप और आपकी ISI अच्छी तरह जानते हैं,कि RSS वाले उतने दमदार या जंग खोर नही, जितने नाजी जर्मन थे या आपके जनरल जिया उल हक या परवेज मुशर्रफ हुआ करते थे!
संघ वाले वंदे मातरम् और भारत माता की जय के नारे लगाकर राष्ट्रवादकी बात अवश्य करते हैं, किंतु जब किसी संघर्ष की बात आती है तो वे निरीह जनताको धर्मांध बलबों में धकेलकर खुद दड़बों में छुप जाते हैं और यदि किसी ताकतवर से सामना हुआ तो सावरकर,देवरस की तरह शांति स्थापित करने के बहाने माफ़ीनामा लिखकर दे देते हैं! अत:आपने संघ,भाजपा को नाजी और मोदी को हिटलर बताकर अपनी ही खिल्ली उड़ाई है!क्योंकि आपके आरोप बेबुनियाद हैं!
चूँकि आपके आरोपों से मिलते जुलते आरोप यहां भारत में करोड़ों लोग लगाते हैं, अत: आपको कष्ट उठाने की जरूरत ही नही! संघ के साथ बमुश्किल 10 करोड़ हिंदू ही हौंगे,जबकि उसके विरोध में 100 करोड़ हिंदू हैं! तमाम गैर भाजपाई संगठन और दल वामपंथी,कांग्रेसी,क्षेत्रीय दल -ममता,सपा, बसपा,राजद,डीएमके तेलुगू देशम्, तमाम हिंदु विरोधी और भारत विरोधी लोग भी ऐंसे ही आरोप लगाते रहते हैं! जो कौम और देश पाकिस्तान और उसके आतंकियों से आक्रांत रहा है,उसे दवा देने के बजाय जहर तो न दीजिये!
वेशक भारत में संघ का विरोध संगठित नही है और यह विरोध चुनाव में विपक्ष के काम नही आता!क्योंकि सीबीआई, ईडी, EVM और जात पांत के समीकरण बिठाकर मात्र 35% वोट पाकर भाजपा /एनडीए वाले प्रचंड बहुमत पा जाते हैं! और 65% वोट पाकर भी भारतीय विपक्ष आईसीयू में पड़ा है! इसकी वजह शायद यह हो सकती है कि हिंदुओंमें अब अपमान सहने की ताकत नहीं बची!
किंतु इमरान साहब आपने तीर में तुक्का तो चला दिया,गच्चा खा गये!आप अपने शब्द वापिस लें और माफी मांगें ! और वैसे भी आपका काम करने के लिये कश्मीरी गुलाम
गिलानी,मेहबूबा,पीडीपी,जेकेएलएफ और हुरियत कांन्फेंस क्या कम है ? इस अभागे वतन भारत के खिलाफ बोलने वाले इस भारत भूमि में करोड़ों हैं! आप हमें हमारे हाल पर छोड़ दें,चीन अमेरिकाकी फिक्र करें और हो सके तो पाकिस्तान की बदहाली पर गौर करें! आमीन!

न गहर-गहर बरसात गहरावै है !

गांव के गरीबों का चूल्हा नहीं सुलगा,
घन गहर-गहर बरसात गहरावै है !
जलाऊ लकड़ी,एलपीजी गैस नहीं,
बाढ़ में बचाव दल पहुँच न पावै है!!
गरीबी में गीला आटा,सब्जियां महँगी,
गुजारे लायक मजूरी मजूर नहि पावै है!
बाढ़ में बुहर गए टूटे-फूटे ठीकरे -चींथड़े,
बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों पै मौत मँडरावै है!!
नगरीय अभिजात्य कोठियों की कामिनी,
गार्डन के झूले पै मेघ मल्हार गावै है।
सत्ताधारी नेताओं के लंबे -चौड़े वादे.
भ्रस्टों की कृपा से नया पुल बह जावै है!!