मंगलवार, 25 दिसंबर 2012

श्रीराम तिवारी -षष्ठिपूर्ति एवं कविता संकलन '60 पन्ने ' का विमोचन समारोह




इंदौर दिनांक 22/12/2012
                                        मंच पर {बाएं से दायें }  श्रीराम   तिवारी ,श्री कैलाश विजयवर्गीय [उद्योग  टेक्नालोजी मंत्री,मध्यप्रदेश सरकार] श्री श्रीवर्धन त्रिवेदी[सनसनी स्टार],प्रो  मानसिंह  परमार [विभागाध्यक्ष -जर्नलिज्म एंड मॉस कम्युनिकेशन ,देवी अहिल्या विश्वविद्द्यालय,इंदौर]
  ' इंदौर प्रेस क्लब' सभागार में  देश के ,प्रदेश के और इंदौर शहर के गणमान्य नागरिकों,बुद्धिजीवियों ,कवियों,साहित्यकारों,ट्रेड  यूनियन नेताओं,तथा   वरिष्ठजनों के सानिध्य में कॉमरेड  श्रीराम  तिवारी का "षष्टिपूर्ति सम्मान समारोह" कार्यक्रम अभूतपूर्व गरिमा और उच्च सांस्कृतिक शालीनता के साथ मनाया गया।उनके 60 वें  जन्मोत्तसव  के अवसर पर इंदौर प्रेस क्लब में मीडिया के युवा -हस्ताक्षरों  ने  विशेष रूप से   साहित्य,कला,संगीत तथा सामाजिक सेवा क्षेत्र की खास हस्तियों को आमंत्रित किया था। सर्व श्री कल्याण जैन - पूर्व सांसद एवं  राष्ट्रीय अध्यक्ष ,अनुशाशन समिति-  सपा ,कामरेड कैलाश लिम्बोदिया -जिला सचिव सीपीएम ,श्री अनिल त्रिवेदी प्रख्यात समाजसेवी एवं अधिवक्ता, श्री प्रभु जोशी कवि -चित्रकार-कथाकार,स्माइल लहरी कार्टूनिस्ट,प्रदीप नवीन- कवि एवं व्यंगकार,श्री हरेराम वाजपेई कवि -बहुबिध संस्कृतिकर्मी,सदाशिव कौतुक-कवि  एवं साहित्यकार, श्याम सुन्दर यादव -राष्ट्रीय महासचिव -इंटक ,कामरेड  गौरी शंकर शर्मा -महासचिव -सीटू  जिला इंदौर, कामरेड सुधाकर  उर्ध्वारेषे -राष्ट्रीय उपाध्यक्ष -वीमा कर्मचारी महा संघ ,कामरेड अजीत केतकर -महासचिव-aiiea ,कामरेड आरबी बांके,-राष्ट्रीय पदाधिकारी-aibsnlea ,कामरेड सुन्दरलाल जी,कामरेड सीके जोशी - राष्ट्रीय संगठन सचिव-nftebsnl ,कामरेड कमल   टटवाड़े -उपाध्यक्ष -इंदौर मंडल डाक-तार सोसायटी [मर्यादित]इंदौर, कामरेड योगेन्द्र  चौहान -जिला सचिव aibsnlea ,कामरेड  एस के जोशी-जिला सचिव -snea ,इत्यादि क्रन्तिकारी साथियों के आलावा शहर की तमाम ट्रेड यूनियन  के प्रतिनिधि खास तौर  से वीमा,बैंक ,शिक्षा,पोस्टल तथा मीडिया क्षेत्र के वे  साथी इस अवसर पर सेकड़ों की तादाद में उपस्थित  रहे जो श्रीराम तिवारी की काव्यात्मक  और क्रांतिकारी वैचारिक प्रतिबद्धता से गौरवान्वित  हुआ करते हैं।नगर के अनेक साहित्यकार ,ट्रेड यूनियन लीडर और मीडिया के युवा हस्ताक्षर इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होकर अभिभूत हो गए।
                                         इस अवसर पर श्रीराम तिवारी  के  नए काव्य -संग्रह " साठ  पन्ने" का विमोचन भी  किया गया।  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय कैलाश विजयवर्गीय-उद्द्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ,मध्प्रदेश थे।कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि थे - श्री श्रीवर्धन जी त्रिवेदी-प्रख्यात मीडिया पर्सोनालिटी एवं सनसनी -सूत्रधार । इस भव्य एवं अनुपम कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफ़ेसर  मानसिंह परमार ने की।  श्री गणेश चन्द्र पाण्डेय -वरिष्ठ महाप्रबंधक -भारत संचार निगम  लिमिटेड  इंदौर  इस गरिमामय साहित्यिक-सांस्कृतिक युति के  विशेष अतिथि थे।
                                                        इस कार्यक्रम  के कई उल्लेखनीय और दिलचस्प पहलु थे :-

   [एक]-   पुस्तक के विमोचन पर ही पुस्तक के रचयिता को ज्ञात हुआ कि  यह उसीकी रचनाओं का संग्रह है  जो वो वर्षों से अपने ब्लॉग पर लिखता आया है। चिरंजीव प्रवीण ,चिरंजीव पुष्पेन्द्र, चिरंजीव  भरत , चिरंजीव श्रीवर्धन त्रिवेदी और सुश्री अर्चना तिवारी [एंकर-जी न्यूज़] ने 'पापा'[श्रीराम तिवारी] को उनके 60 वें जन्म दिन पर  सरप्राइज  देने  के उद्देश्य से  यह    शानदार तोहफा तैयार   किया जिसमें सुदेश तिवारी   का सहयोग सराहनीय रहा .
[दो] मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय जी 6 बजे ग्वालियर में थे और  साढ़े  सात बजे 'इंदौर प्रेस क्लब' में आ पहुंचे।
[तीन]श्री श्रीराम तिवारी को  मंच से एक शब्द नहीं बोलने दिया गया , जबकि सारा कार्यक्रम उनके लिए ही था ,उन्ही की पुस्तक का विमोचन था ,उन्ही  का 'षष्टिपूर्ति सम्मान समारोह' था और  सूत्रधार भी   उन्ही के  सुपुत्र डॉ  प्रवीण  तिवारी थे। श्री तिवारी जी को अपनी बात कहने या काव्य-पाठ करने का अवसर नहीं मिल पाने के   वावजूद कार्यक्रम की सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की।
[ चार ] कार्यक्रम में इतनी भीड़ हो गई  कि  200 कुर्सियों का हाल खचाखच भरा था  और सेकड़ों लोग बाहर-भीतर खड़े थे।हल्की -हल्की ठण्ड के वावजूद लोग कार्यक्रम की भव्यता और गरिमा देख दो घंटे  तक खड़े रहे।
 [पांच] श्रीराम तिवारी' षष्टिपूर्ति समारोह ' और ' साठ  पन्ने' के विमोचन कार्यक्रम को उपस्थित सम्माननीय साहित्यकारों और वुद्धिजीवियों  ने  समवेत स्वर में कहा "भूतो न भविष्यति"


      कार्यक्रम के अंतिम चरण में केक काटकर 60 वां जन्म दिन मनाते हुए कविवर और साहित्य मनीषी  श्रीराम तिवारी ने सर्व श्री-कल्याण जैन,अनिल त्रिवेदी,सुधाकर उर्ध्व्रेशे,अजीत केतकर,गौरी शंकर शर्मा,परेश टोकेकर,श्यामसुंदर यादव ,सुदेश तिवारी,नरेन्द्र चौवे,  अनुज बधू  किरण , भाई राजेन्द्र,रवीन्द्र  अवश्थी  जी   हाडा जी,धर्मपत्नी उर्मिला तिवारी,  पुत्री अनामिका  अंजना तिवारी  पंडित माधव उपाध्याय, पंडित मिलन तिवारी   पंडित श्री  कीर्तिवाल्लभ खर्कवाल,  श्रीमती  पुष्पा  खर्कवाल,   अग्रज पंडित  राम सहाय तिवारी पंडित ,नाथूराम चतुर्वेदी,अनुज परशुराम ,अनुज वधु मनोरमा ,  चिरंजीव -सिद्धार्थ,लवलीन  कार्तिक रोहित ,हिमांशु,रूपेश,निषध, रुपेंद्र्सिंह , शुभम, संजय, श्रीमती  रश्मि चौबे,श्रीमती रेखा -मुकेश गंगेले,बहिन फूला, पंडित हरिनारायण शुक्ल जी,पंडित लक्ष्मी कान्त चतुर्वेदी ,राजेंद् तिवारी ,राजेश तिवारी ,मिलन तिवारी,बंटी,अक्षत,और चेतन्य तिवारी इत्यादि का  आभार माना।
              इस महत और  नितांत  साहित्यिक /सांस्कृतिक  कार्यक्रम की विशेषता  यह थी की सुदूर भारत  से हजारों मील दूर अमेरिका से चिरंजीव आसुतोष ,आस्ट्रलिया से सुधीर,सिगापुर से शेलेश और देश  के कोने -कोने से सेकड़ों लोगों ने खाश  तौर  से भारत संचार निगम लिमिटेड के कर्मचारियों/अधिकारीयों  और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं / नेताओं ने अपने प्रिय कामरेड श्रीराम तिवारी को उनके  " षष्टिपूर्ति -सम्मान समरोह " और काव्य संग्रह विमोचान पर   क्रांतिकारी सन्देश प्रेषित किये।
                                                                                        
                                                                                                     संकलन:     डॉ ;प्रवीण श्रीराम तिवारी

                                                                                                                                          लाइव -इंडिया
                                                                                                                      1- मंदिर मार्ग ,न  यी दिल्ली।

                                                                          
                                                                                        

 सर्वश्री प्रभु जोशी,अनिल त्रिवेदी, हीरा बरुआ एवं अन्य [उपर के चित्र में]श्री श्रीराम तिवारी के 60 वें ज्न्मोत्त्सव पर पार बधाई देते हुए। नीचे के चित्र में मंच पर कैलाशजी,श्री वर्धन जी, प्रोफ़ेसर मानसिंग परमार जी ऒर श्री तिवारी मंच पर चढ़ते हुए।

श्रीराम तिवारी -षष्ठिपूर्ति एवं कविता संकलन '60 पन्ने ' का विमोचन समारोह

                     श्रीराम तिवारी -षष्ठिपूर्ति  एवं  कविता संकलन '60 पन्ने ' का  विमोचन समारोह 

रविवार, 2 दिसंबर 2012

वी वॉंट मोर योर हानर:

                                         इन दिनों  जबकि   सत्तासीन  राजनीतिक गठबंधन और विपक्ष के सभी दल देश की जनता  के कष्ट दूर करने के बजाय  उसके बहाने   एक-  दूसरे  पर कीचड   उछालने में लगे  हों , शाम-दाम -दंड-भेद से आगामी चुनाव जीतकर सत्ता में पहुँचने को बेकरार  हों  , लोकतंत्र के  तीन  प्रमुख स्तम्भ  लगभग लकवाग्रस्त हो चुके हों, सिद्धान्तहीनता और मूल्यहीनता चरम पर हो ,राष्ट्र असुरक्षित हो  तब    लोकतंत्र के एक मज़बूत स्तम्भ के रूप में      -न्यायपालिका का अवतरण    कुछ  इस तरह प्रतीत होता है जैसे  धर्म् भीरुओं को  श्रीमद भगवद गीता के इस श्लोक    में प्रतीत होता  है:-
  
       ' यदा -यदा  हि   धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत!
        अभ्युत्थानम अधर्मस्य तदात्मानं  सृजाम्यहम !!

    तो    हम  सोचने पर मजबूर हो  जाते हैं कि शायद स्थितियां  उतनी बुरी नहीं हैं  जितनी कल्कि अवतार के लिए जरुरी हैं शायद पापियों के पापों का घड़ा अभी पूरा नहीं भरा। या नए दौर में इश्वर भी कोई नए रूप मे शोषित,दमित,छुधित,तृषित जनता -जनार्दन का उद्धार करेगा! शायद भारतीय  न्याय पालिका के किसी कोने से 'सत्य स्वरूप -मानव कल्याण स्वरूप' कोई  तेज़ पुंज   शक्ति अवतरित हो और इस वर्तमान दौर के कुहांसे को  दूर कर दे।
  यदि  वास्तव में स्थितियां इतनी बदतर हैं जितनी की  विपक्षी पार्टियां  ,स्वनामधन्य स्वयम्भू समाज सुधारक  या मीडिया का एक हिस्सा पेश कर रहा है, तो फिर 'भये  प्रगट  कृपाला ,दीनदयाला ......".का महाशंख्नाद तो कब का   हो जाना   चाहिए था और  प्रभु कल्कि रूप में अब तक महा पापियों को यम पुर भेज चुके होते।दरसल में  समसामयिक राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय चुनौतियों  का आकलन अपने-अपने वर्गीय चरित्र
और सोच पर आधारित है।अमीर और कार्पोरेट वर्ग  की  चिंता  हुआ करती  है   की सरकारें  हमेशा ऐंसी  हों जो   उनकी चाकरी   करें और  उनके मुनाफाखोरी वाले सिस्टम में दखल न दे। मध्यम  और बुर्जुआ वर्ग की चिंता रहती है कि रूसो ,वाल्टेयर उनका हुक्का भरें याने देश के करोड़ों नंगे भूंखे ,बेघर  ठण्ड में ठिठुरकर मरते रहें किन्तु उन्हें तो बस बोलने की ,लिखने की,हंसने की,रोने की आज़ादी चाहिए। याने उनकी कोई आर्थिक समस्याएं नहीं , सामाजिक राजनैतिक समस्या नहीं,अगर होगी तो  वे स्वयम सुलझा लेंगे याने सरमायेदारों से उनका कोई  स्थाई  अंतर्विरोध    नहीं वे तो सिर्फ  अपने अभिजात्य मूल्यों की परवाह करते हैं और  उसके लिए अपने ही वर्ग बंधुओं को  जेल  भिजवाने  को भी तैयार हैं।बात जब राष्ट्र के मूल्यों की ,क़ानून के राज्य की,सर्वसमावेशी जन-कल्याणकारी निजाम की आती है   तो वे अपने वर्गीय अंतर्विरोध भुलाकर तमाम झंझटों का ठीकरा देश की अवाम के सर फोड़ने के लिए भी  एकजुट हो जाते हैं।  दुनिया के तमाम राष्ट्रों में प्रकारांतर से वर्गीय द्वंदात्मकता का यही सिलसिला  जारी है।लेकिन उन राष्ट्रों के बारे में                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                            कुछनहींकहा जा सकता     जिन्होंने पूँजीवादी  निजाम को सिरे से नकार  दिया है और सामंतवाद को कुचल दिया है। ,लेकिन यह  जरुर उल्लेखित  किया       जा सकता है  कि  वहां के समाजों का मानवीयकरण संतोषप्रद  स्थिति में आ चूका है।इसके बरक्स पूंजीवादी ,अर्धसामंती,  अर्धपूंजीवादी और अमेरिका के पिछलगू राष्ट्रों में
   सभी जगह वेरोजगार,भूमिहीन मजदूर-किसान पर संकट आन पड़ा है। भारत में  नई  आर्थिक व्यवस्था ने बस इतना ही कमाल किया है कि पहले 49 अरबपति थे अब शायद 70 हो गए है और गाँव में  गरीब यदि 20 रुपया रोज कमाने वाला और शहर का गरीब 32 रुपया रोज कमाने वाला  माना जाए, जैसा  कि  सरकारी सर्वे की रिपोर्ट  बताती  हैं तो उनकी तादाद देश में 50 करोड़ से अधिक ही   है।इन 50 करोड़  नर-नारियों को ज़िंदा रहने के लिए रोटी कपड़ा मकान की जरुरत है।  उन्हें  किसी का कार्टून बनाने की या किसी  और तरह की अभिव्यक्ति की  स्वतंत्रता  के लिए  न तो समय है और न समझ है। इस देश में खंडित राजनैतिक जनादेश की तरह खंडित अभिरुचियाँ , खंडित मानसिकता   और खंडित आस्थाएं होने से  परिणाम भी खंड-खंड  मिल  रहे हैं। यही वजह है  कि   न केवल  क्रान्तिकारी  विचार छिन्न-भिन्न होते जा रहे हैं अपितु नैतिक मूल्य भी विखंडित  होते जा रहे हैं। चरमराती व्यवस्था में पैबंद  जरुर लग  रहे हैं और इन पैबंद  लगाने वालों  का सम्मान किया जाना चाहिए।
              फेसबुक पर टिप्पणी लिखने व उस  टिप्पणी को पसंद करने के आरोप में मुंबई की दो लडकियों की गिरफ्तारी पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी  गहरी नाराजी व्यक्त की है।मौजूदा चीफ जस्टिस श्रीमान  'अल्तमस कबीर साहब  की अगवाई में बड़ी बेंच ने अपनी कड़ी आपत्ति जाहिर की है कि  किसी ने भी इस मामले में जनहित याचिका दायर क्यों नहीं की। हालांकि कोर्ट स्वयम संज्ञान लेने ही वाला था कि दिल्ली की   श्रेया सिंघल  ने 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' के इस मसले को जन हित याचिका के रूप में पेश कर दिया और अब सभी दूर  इस बात की चर्चा चल रही है की फेसबुक पर निरापद टिप्पणी के निहतार्थ अब सूचना प्रौद्दोगिकी एक्ट में तब्दीली की किस मंजिल तक जायेंगे? मुंबई में कुछ तत्वों ने कसम खा  रखी  है कि  वे नहीं सुधरेंगे। उनके लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी, भारतीय  संविधान,लोकतंत्र  सब बकवाश है। मध्ययुगीन बर्बर डकेतों,हमलावरों और फासिस्टों का रक्त जिनकी शिराओं में बह रहा हो उनसे   उम्मीद नहीं  है की वे राष्ट्र की अस्मिता और  क़ानून  का सम्मान करेंगें।  सुप्रीम कोर्ट के इस अप्रत्याशित निर्णय से  देश में क़ानून का राज  न्यूनाधिक ही सही  कायम  कायम तो  हो सकेगा   -  जिन्होंने कल तक  मुंबई को बंधक बना रखा  था   और  पूरे देश को आँखे दिखा रहे थे अब वे देश और दुनिया के सामने  हतप्रभ हैं। ये रुग्न मानसिकता वाले  चाहे मुबई के नस्लवादी हों,चेन्नई के भाषावादी  हों , उत्तरपूर्व के अलगाववादी हों या उगे वाम पंथी  नक्सलवादी हों,  सभी को काबू में  करने का वक्त आ चूका है। यह सुअवसर सुप्रीम  कोर्ट ने देश को अनेक बार   उपलब्ध  करवाया है ,देश की जनता को यह अवसर खोना नहीं चाहिए। भारतीय संविधान ,भारतीय मूल्य और देश के करोड़ों मेहनतकशों  की श्रम शक्ति   की  अनदेखी करने वाले व्यक्ति,समूह या विचारधारा को निर्ममता से कुचल दिया जाना चाहिए। ताकि इस देश में  भाषा,नस्ल,मज़हब और क्षेत्रीयता की  बिना पर किसी शख्स का महिमा   मंडन  करने वाले   नादान  खुद  अपने कृत्य पर पर शर्मिंदा हों।
                                 पौराणिक मिथकों  की  अंध श्रद्धा ने  कतिपय अकिंचनों को  इस कदर अँधा कर दिया  है  कि  प्रभु     लीला हो रही है किन्तु प्रज्ञा चक्षुओं के  अभाव  में  उसकी करनी को देख् नहीं  पा रहे हैं।  ,पापियों को तो  बाकायदा यमपुर भेजा जा रहा है, कभी किसी साम्प्रदायिक अहमक पापी  के मरने पर लाखों  लोगों को दिखावे का शोक करते  देखा जा सकता है।  ईश्वर की महिमा पर आस्था पर  और यकीन बढ़ता चला ही  जा रहा है।   निक्रष्ट परजीवी दिवंगत  जब तक जिए फ़ोकट की खाते रहे, कभी भाषा के नाम पर,कभी क्षेत्रीयता के नाम  पर,कभी क्रिकेट के नाम पर ,कभी फिल्म निर्माण में हस्तक्षेप के नाम पर कभी अपनी पारिवारिक दादागिरी के नाम पर  आजीवन  देश को ,सम्विधान को  और डरपोंक जनता को ठगते रहे . इनकी करतूतों को जानते हुए भी लोग उनके चरणों में दंडवत करते रहे।  जो व्यक्ति    मरणोपरांत  भी देश में झगडा- फसाद, रोड जाम ,शहर बंद कराने , अभिव्यक्ति पर पावंदी लगवाने   को उद्द्यत  हो, जो इतना स्वार्थी हो की अपने सगे  भतीजे को भी गैर मानता हो वो पूरे मराठी समाज का शुभचिंतक और हितचिन्तक कैसे हो सकता है? निसंदेह  उन्होंने अपने जीते जी कुछ देश भक्ति पूर्ण काम अवश्य किये होंगे। उनके अनुयाईयों की जिम्मेदारी है कि  उनके तथाकथित महान कार्यों  की सूची  देश और दुनिया के सामने रखें ताकि वे लोग जो उनके अंत्येष्टि संस्कार  के दरम्यान बेहद तकलीफ भोगते रहे,भयभीत होकर चुपचाप कष्ट उठाते रहे, वे भी  महसूस करें कि  उनकी तकलीफ उस महान पुरुष  के लिए श्रद्धा सुमन थी।  जो उन महात्मा के  महान बलिदानों के  सामने नगण्य  थी।   शहीद भगतसिंह ,शहीद चंद्रशेखर आज़ाद ,महात्मा गाँधी   की तरह लोग उनके अमर बलिदानों को भी   सदा याद  रखेंगे।
              जिनके  स्वर्गारोहण पर पूरा महानगर कई दिनों तक  जडवत रहा  उनकी असलियत क्या है?  यह इसलिए नहीं की  लोग उन पर जान छिड़कते थे  बल्कि इसलिए की कहीं किसी फसाद के शिकार न हो जाएँ   या दूकान न लुट जाए सो लोग डरे सहमे हुए थे। इस घटना को फेसबुक पर  महज एक सार्थक   टिप्पणी के रूप में   एक लड़की पेश करती है ,दूसरी   कोई सहेली उस टिप्पणी पर 'पसंद' क्लिक करती है और 'अख्खा मुंबई  मय  पुलिस गब्बरसिंह होवेला'''' न केवल मुंबई ,न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत में 'सुई पटक  सन्नाटा' धन्य हैं वे लोग जिन्होंने सहिष्णुता का ऐतिहासिक कीर्तीमान बना डाला।
  किस के  डर  से ?  इस  घटना   के बहाने  संविधान ,राष्ट्र और उसकी  अस्मिता में से कोई भी चीज साबुत नहीं छोड़ी गई।  कांग्रेस और भाजपा  अपने-अपने कर्मों से खुद ही असहज थे। कितु वामपंथ ने भी तो  इस प्रकरण में सिवाय बयानबाजी के कुछ खास नहीं किया। धन्य हैं पूर्व    जस्टिस  मार्कंडेय काटजू-अध्यक्ष  भारतीय प्रेस परिषद् . जिन्होंने खुलकर कहा कि  बाल ठाकरे  इस सम्मान के हकदार नहीं कि   उनके शव को तिरंगे  से विभूषित किया जाए या राजकीय सम्मान से नवाज़ा जाए। यदि यह सम्मान उन्हें दिया भी गया है तो उनके अनुयाईयों को हक़ नहीं की देश के क़ानून और नैतिक मूल्यों को ठेंगा दिखाएँ। अब भारत के महान सपूत सुप्रीम कोर्ट के  चीफ  जस्टिस  श्रीमान अल्तमस कबीर साहब       ने भी दिल्ली की श्रेया सिंघल की याचिका को आधार मानकर 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्र ' के साथ साथ   देश की अस्मिता  की रक्षार्थ  याने राजनैतिक गुंडागर्दी  पर नकेल कसने का बीड़ा  उठाया है। हमें उन पर   और  सुप्रीम  कोर्ट पर गर्व है। उधर बंगाल में  ममता बनर्जी  द्वारा    और  पोंडीचेरी  में चिदमरम पुत्र के बहाने वहां की पुलिस द्वारा  अभिव्यक्ति  का गला घोंटा जाने पर भी   जस्टिस  मार्कंडेय काटजू ने  सवालिया निशाँ लगाकर, पूरी  सत्यनिष्ठा और राष्ट्र्धर्मिता  के  साथ इस जर्जर -दिग्भ्रमित-भेडचाल वाले जन-मानस को जगाने का शानदार शंखनाद किया है उनका साधुवाद।सुप्रीम कोर्ट  का कोटिशः नमन।  हमें विश्वाश है कि जिस तरह से अतीत में जस्टिस  बी आर कृष्ण अय्यर   समेत महान न्यायविदों ने  न केवल भारत राष्ट्र के संविधान के नीति निर्देशक सिद्धांतों की रक्षा के लिए,न केवल प्रजातांत्रिक मूल्यों  की रक्षा के लिए,  न केवल फासिस्ट और साम्प्रदायिक तत्वों पर अंकुश लगाने के लिए,   बल्कि देश के अश्न्ख्य शोषित -पीड़ित,दमित जनों के  पक्ष में  अपनी मेघा शक्ति का  इस्तेमाल  किया था, न केवल उनके आदर्शों तक अपितु उनसे भी आगे जाकर वर्तमान दौर में देश पर लादी जा रही कार्पोरेट दादगिरी और पर राष्ट्र  परालाम्बिता  के खिलाफ   अपने बुद्धि  चातुर्य और  नितांत उच्च नैतिक मूल्यवत्ता  का प्रयोग  करेंगे।

    देश के अमर शहीदों से उत्प्रेरित होकर   देश के सर्वहारा वर्ग,मजदूर वर्ग और शोषित पीड़ित मेहनतकश जनता के हित में भी अपनी आवाज बुलंद  करेंगे। उन नीतियों पर भी प्रश्न चिन्ह लगाने की कृपा करेंगे  जिनसे अमीर और ज्यादा अमीर तथा गरीब और ज्यादा गरीब होते जा रहे हैं। आप महानुभाव वैसी ही कृपा दृष्टी बनाए रखें  जैसे की अभी 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ' पर सहज संज्ञान  लेकर  न केवल देश में  बढ़ती  असामाजिकता  पर रोक लगाने का काम किया अपितु  दुनिया के सामने भारत  का और भारतीय न्याय व्यवस्था का मान बढाया।

               श्रीराम तिवारी
   

मंगलवार, 13 नवंबर 2012

 Happy Deepawali.........
      


      देश और दुनिया  के तमाम मेहनतकश मजदूर-किसान,छात्र,नोजवान एकजुट हों।  वर्तमान व्यवस्था को बदलने  और वैकल्पिक  नीतियों को जनता के सामने पेश करें। वर्तमान वैश्विक आर्थिक- सामजिक  व्यवस्था में विज्ञान और प्रौद्दोगिकी की तरक्की  को  नए पंख जरुर  लग गए हैं ,  किन्तु मिडिल क्लास के एक हिस्से ने भृष्टाचार के बेंट बनकर  चंद मुनाफाखोरों और भूमि के भुन्खों को  जो  आसमान पर बिठा दिया  है  उससे असमानता  के कीर्तिमान  खंडित हो चुके हैं।   राष्ट्रों की सकल संपदा  का अधिकांस हिस्सा  कुछ लोगों के आधिपत्य में आ चुका  है, निर्धनता और  घटित क्रयक्षमता  की तादाद अरबों में है। सारी  दुनिया में इस असमानता का प्रभाव कमोवेश एक जैसा है .चीन ,वेनेज़ुएला,क्यूबा  की राह में भी इन ताकतों ने षड्यंत्रों के जाल   विछाने की कोशिश की है किन्तु यह एक सुखद और सकारात्मक स्थिति है की साम्राज्वाद और संघठित पूंजीवाद भी  इन 'क्रांति के दीपों 'को बुझा नहीं सकें हैं। अब उन राष्ट्रीयताओं और  जनगण  की जिम्मेदारी है की न केवल क्रांति की इन मिसालों को बुझने से बचाएं अपितु हर घर में हर खेत में हर देश में  हर 'पवित्र पूजा स्थल' में   इस तरह के अनगिन दीप जलाएं।
       
                       दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!!!
                     
              क्रांतिकारी अभिवादन सहित ,
                                                                  श्रीराम तिवारी।
 

सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

is vyvstha ko badal dalo.....

जिन्दगी में सबकी जरुरत पड़ती है सो उस हिसाब से सम्वाद बनाओ किन्तु ये मत सोचो कि  किसी की कमी से  कोई काम नहीं रुकता ,उसकी कमी कोई और पूरी कर देगा -ऐसा सोचने से उसकी कमी को पूरा नहीं किया जा सकता।जिन्दगी शतरंज के खेल की तरह है,जिसमें कोई भी प्यादा चाहे तो अंतिम पंक्ति में पहुंचकर - वजीर,हाथी,ऊंट,घोडा,बनकर  प्रत्स्पर्धी  के राजा को मात दे सकता है,किन्तु  किसी भी पक्ष का कोई भी मोहरा लाख चाहने पर भी किसी और की जगह नहीं ले सकता।प्यादे की भी जगह कोई नहीं ले सकता .जीवन में  सबको सबकी जरुरत है।सब को चाहिए की सभी की कद्र करें,फ़िक्र करें .यह प्रकारांतर से स्वयम की फ़िक्र का शानदार क्रियान्वन होगा।
                                              आजकल भारतीय  राजनीति में विश्वाश का संकट उत्पन्न हो गया है। सत्ता पक्ष [यूपीए] के नेता विपक्ष[खास तौर  से एनडीए] पर सच्चे-झूंठे आरोप लगा रहे हैं,मीडिया   भी अपने हितधारकों के मंशानुसार आरोप,प्रत्यारोप की चूहा-बिल्ली दौड़ में शामिल है।स्वनामधन्य कतिपय तथाकथित 'सिविल सोसायटी'वाले और राजनीती में शोषित वर्ग के पक्षधर भी इस कीचड उछाल वीभत्स खेल में शामिल हो गए हैं।न्याय पालिका और कतिपय वास्तविक ईमानदार समूह भी इस हवा के रुख के साथ चला जा रहा है।इस दौर में क्या वास्तव में कुछ भी ऐंसा नहीं जिस पर देश को नाज़ हो? क्या राजनीती में,कार्यपालिका में,न्याय पालिका में,व्यवस्थापिका में ऐसा कुछ नहीं बचा जो इस व्यवस्था की जीवन्तता का वाहक सिद्ध हो सके? यदि  कुछ नहीं बचा तो इस व्यवस्था को बदलने में क्या हर्ज़ है?

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

अरविन्द केजरीवाल को अपनी नीतियां घोषित करना चाहिए.

मेरे कतिपय समकालीन प्रगतिशील   मित्रों में आजकल एक विषय पर आम राय  है कि  वर्तमान वैश्विक चुनौतियां अब भारत में तीव्रगति से और अधिक  आक्रामक रूप से प्रविष्ट हो रही हैं। इन चुनौतियों में सबसे अव्वल है राज्य सत्ता का अमानवीयकरण। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में भले ही वो  पूंजीवादी ही क्यों न हो,आम जनता को ज़िंदा रहने के न्यूनतम संसाधनों का एक हिस्सा न्यूनतम ही सही - जन-कल्याण के रूप में -विगत  शताव्दी के अंतिम दशक तक सर्वत्र दिया जाता रहा है। सबको  शिक्षा,स्वास्थ्य,सुरक्षा,रोटी,कपडा,मकान और  सामाजिक सुरक्षा इत्यादि के लिए निरंतर संयुक्त संघर्ष चलाये  जाने पर शाशक वर्गों ने 'सोवियत पराभव'उपरान्त पश्चिमी पूंजीवादी आर्थिक माडल को अपनाने में देर नहीं की और जनता को मिलने वाली कमोवेश आवश्यक न्यूनतम  सेवा सुविधाएँ  धीरे-धीरे  छीन  ली गई .राजकोषीय घाटे के बहाने ,अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक अनुबंधों के बहाने खाद,बीज,तेल,गेस  शिक्षा  स्वास्थय  पर सरकारी इमदाद लगभग जीरो कर दी गई।सरकारी क्षेत्र का दायरा सीमित कर दिया गया।निजी क्षेत्र को  लूट की खुली  छूट दी गई।राज्यसत्ता में हितधारकों  को उपकृत करने हेतु एनजीओ बनाये गए .आर्थिक सुधारों के बहाने जनता को बाज़ार के हवाले कर दिया गया . इस अंधेरगर्दी के खिलाफ देश की संगठित ट्रेड यूनियनों ने अपनी-अपनी राजनैतिक विचारधारा से परे एकजुट होकर निरंतर  संघर्ष चलाया है।विगत 28 फरवरी -2012 ,20 सितम्बर-2012 और आगामी 21-22 फरवरी 2013 को राष्ट्रव्यापी हड़तालों का एलाने जंग इसी संघर्ष की छोटी सी कड़ी है। इस संघर्ष में साथ देने के बजाय कुछ लोग' विना सुर-ताल के अपनी  ढपली अपना राग' गा-बजा रहे हैं।अन्ना  एंड कम्पनी,रामदेव रविशंकर,और इन्ही के कल तक के हमसफर अरविन्द केजरीवाल  कुछ इस तरह से देश के तस्वीर दुनिया के सामने रख  रहे हैं कि  इस देश में 'सब कुछ बुरा ही बुरा है' ये कल तक अपने अपने एनजीओ चलाने  वाले अब देश का उद्धार करने के लिए अवतरित हो चुके हैं।
                                                                      सारी दुनिया जानती है की  किसी भी राष्ट्र की एकजुटता,शांति ,सुरक्षा और विकाश तभी संभव  है जब उस राष्ट्र के नागरिकों  की  राष्ट्रीय  चेतना  को  वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सोचने समझने  के अनुरूप ढाला जाए। आर्थिक नीतियों को राष्ट्र की मांग आपूर्ति और जनसंख्या अनुपात से तत्संगत किया जाए।आज जब देश में खुदरा व्यापार में  विदेशी  निवेश पर आपत्ति है, वायदा वाजार।सट्टा -बाज़ार ,निजीकरण, ठेकाकरण,कारखना बंदी पर आमजनता को संगठित कर संघर्ष की जरुरत है तब  देश में कुछ लोग जनता को धार्मिक अफीम खिला रहे है, चारों ओर धरम के नाम पर तिजारत करने वाले ढोंगी बाबाओं,मुल्लाओं,फादरों की भरमार है।जनता का एक हिस्सा इन बाबाओं -मुल्लाओं-फादरों की मीठी-मीठी  लुभावनी  बातों  में आकर  न केवल खुद का सतानाश कर लेता है अपितु देश को दुनिया भर में जग हंसाई का पात्र  बना देता है। धरम मज़हब का ये धंधा कुछ राजनीतिक पार्टियों को भी  पोषता है। ये धर्माडंबर  उन्हें आम चुनाव में  परोक्ष सहयोग देकर राष्ट्र को वास्तविक प्रजातांत्रिक रास्ते से भटकाता है।
 निरीह निर्दोष आम जनता अपने हकों की लूट को ईश्वर की इक्षा  समझती  है। इसी वजह से जब कभी देश के संगठित  मजदूर किसान  बढ़ती हुई महंगाई ,वेरोजगारी,शिक्षा,स्वास्थ्य ,पीने का पानी और आवश्यक जीवन संसाधनों के  लिए राष्ट्र व्यापी संघर्ष छेड़ते  हैं तो यह तथाकथित अंध श्रद्धालु वर्ग इन ढोंगी बाबाओं के चरणों में अपनी मुक्ति   ढूंड़ता  है।इतना ही नहीं ये एनजीओ चलाने वाले अन्ना  ,रामदेव ,केजरीवाल सबके सब सिर्फ  मीडिया के सामने ही  हीरो बनने की फितरत में रहते हैं। ये कभी कांग्रस  कभी भाजपा के नेताओं को भ्रष्ट बताकर समझते हैं  की इससे देश पाक साफ़ हो जाएगा?
          कौन कितना भृष्ट है यह जान लेने से क्या होगा? जब व्यवस्था ही लूट की है याने आर्थिक सुधारों की ,भूमंडलीकरण की,निजीकरण की या पूँजी के मार्फ़त राज्यसत्ता सञ्चालन की तब यह कैसे संभव है की रिश्वत ,घूंस, घोटाले नहीं होंगे ? गंदगी होगी तो मख्खियाँ भी होंगी। पूंजीवाद होगा ,अमेरिकी इच्छाओं का प्रधान  मंत्री होगा,देशी-विदेशी पूंजी का प्रवाह होगा, व्यापार और मुनाफे पर  सरकार उदार होगी तो जो सरकार में होंगे  उन्हें बिन मांगे  मोती  तो मिलना ही हैं। फिर सत्ता में चाहे यूपीए हो या एनडीए हो ऐ  राजा  हो या प्रमोद महाजन हो,रावर्ट वाड्रा हो या गडकरी हो खुर्शीद हों या लक्ष्मण बंगारू हों कलमाडी हों या जूदेव हों लूट  का ये सिलसिला जारी रहेगा   .अरविन्द केजरीवाल का इरादा यदि वाकई देश भक्ति पूर्ण है तो   वे पहले अपनी आर्थिक नीति घोषित करें . इतना ही काफी नहीं बल्कि व्यवस्था रुपी जिस कुएं में भंग पडी  उसी की साफ़ सफाई करते कराते रहेंगे या की नए कुएं के निर्माण पर देश के प्रगतिशील वैज्ञानिक विचारों से सलाह मशविरा करेंगे! सिर्फ हंगामा खड़ा करते रहने से आप चेर्चा में बने रह सकते हैं देश का कुछ भी भला इस हँगामा  नवाजी से नहीं होने वाला। यदि  नदी किनारे खड़े खड़े लहरों को कोसते रहोगे तो नदी रुकने वाली नहीं  और लहरें तो कभी भी नहीं।।।।
                                                             श्रीराम तिवारी 

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

कविता- सारा जहाँ हमारा है....

  [1] डेंगू -मलेरिया-स्वाइन फ्ल्यू का बुखार ,  अस्पतालों में अव्यवस्था वेशुमार!
   महंगी दवाईयाँ, महँगे टेस्ट,महँगी  फीस, आम आदमी होता इलाज़ को लाचार!!
   निजी अस्पतालों में निर्धन का प्रवेश निषेध,सरकारी क्षेत्र  में लुटेरों की भरमार !
   पानी सर से ऊपर  गुजरने लगा,फिर भी लोगों को है किसी नायक का इंतज़ार!!
   लोग पूजा घरों में करते रहते  हैं बेसब्री से ,    कि प्रभु कब लोगे कल्कि अवतार !
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 [ 2] यत्र-तत्र-सर्वत्र हो रहा निरंतर धुंआधार, दृश्य-श्रव्य-पाठ्य मीडिया में प्रचार !
 कि  हो रहा भारत निर्माण , भारत के इस निर्माण में मेरा भी हक़ है यार!!
 विकाश की गंगा बह रही  उल्टी आज,श्रम के सागर से समृद्धि के शिखर पार!
  क्रांति  की चिंगारी बुझने  को है ,पतंगों को पता नहीं किसका है इंतज़ार!!
  देशी मर्ज़ विदेशी इलाज़ ;उधार का हलुआ , वतन को अब मंज़ूर नहीं सरकार!
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[3]    जात -पांत ,भाषा-मजहब के झगड़ों से, अपना वतन बचाना  साथी!
    समाजवाद,प्रजातंत्र,धर्मनिरपेक्षता,के   नाना  दीप  जलाना  साथी!!
    मिल जाए  आवश्यक  श्रम- फल ,रोजी-रोटी संसाधन जीवन का साथी!
    बोलो बच्चो चीख-चीख कर,  'सारे जहां से अच्छा' हिन्दोस्तान हमारा  है !!
   वर्ना नंगे  भूँखों  को तो 'सारा जहां हमारा है !

  [4] दुनिया भर के महाठगों ने नव -उदार चोला पहना!
 पहले गैरों ने लतियाया अब अपनों का क्या कहना!!
भूल हमारी हम पर भारी,शोषण को सहते रहना!
मीरजाफरों जयचंदों को हमने दिया सहारा है!!
देश हमारा नीति  विदेशी ,निजीकरण का नारा!
 वर्ना नंगे भूँखों  को तो सारा जहां हमारा है !!
सबको शिक्षा सबको काम' काम के  बदले  पूरे दाम!
मिलता रहे मजूरों को उनकी क्षमता से नित काम !1
यही तमन्ना भगत सिंह की यही पैगाम हमारा है!
 वर्ना नंगे भूंखे को तो 'सारा जहां हमारा है'!!
   
                                                                     श्रीराम तिवारी









  

बुधवार, 10 अक्टूबर 2012

कामरेड ह्यूगो शावेज को -लाल सलाम।




 लगातार तीसरी बार वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर कामरेड ह्यूगो शावेज और वेनेज़ुएला के तमाम  क्रांतिकारी मतदाताओं का  क्रांतिकारी अभिवादन  .अभिनंदन।। शानदार- इंकलाबी- एकजुटता का वैश्विक समर्थन।।।
                       जो लोग वैश्विक राजनैतिक,सामाजिक,आर्थिक और भौगोलिक अज्ञानता के शिकार हैं उन्हें यदि ये नहीं मालूम कि  वेनेजुएला कहाँ है? ह्यूगो शावेज कौन हैं?समाजवादी व्यवस्था क्या है?  तो उनका इसमें कोई कसूर नहीं, हर किसी को हरेक चीज की जानकारी हो ये जरुरी नहीं,  किन्तु यदि एक जीवंत राष्ट्र के रूप में अमेरिकन साम्राज्य की नाक के सामने पूंजीवादी विश्व विनाशक नीतियों के सामने कोई जन-कल्याणकारी समतामूलक वैकल्पिक व्यवस्था प्रस्तुत करने वाला हो  और सारे संसार में उसकी चर्चा हो किन्तु भारतीय मीडिया में उसे चार पंक्तियाँ भी नसीब न हों  तो दो ही कारण समझे जा सकते हैं।एक-यह कि सूचना उपलब्ध नहीं दो-की भारत का  मीडिया अमेरिकी सूचनाओं की खुरचन पर  जिन्दा है।
                               मैं जिस शहर में रहता हूँ वहां आधा दर्जन राष्ट्रीय  एक दर्जन आंचलिक और सेकड़ों नगरीय समाचार पत्र ,टीवी चेनल्स और सूचना संसाधन उपलब्ध हैं ,देश के महानगरों से प्रदेश के राजधानियों से देश की राजधानी से निकलने वाले अखवारों ,टीवी चेनलों और रेडिओ संचार माध्यमों में भी  वो सब कुछ है जो  या तो सबको पहले से ही मालूम है [इन्टरनेट,मोबाइल एस एम् एस  इत्यादि से] या जो जनता के लिए  नितांत अनचाहे परोसा जाने वाला  पत्नोंमुखी  पूंजीवादी  वासी दुर्गंधित कचरा हो। इन माध्यमों में वो सब कुछ है जो विश्व बैंक ,विश्व व्यपार संगठन,अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और 'यूरो-पोंड-डालर ' के कर्ता-धर्ताओं को सुहाता हो। भारत के तथाकथित मुख्य धारा के मीडिया को भी शायद वेनेज़ुएला ,के आम चुनाव से ज्यादा मिस्टर ओबामा और मिस्टर मिट रोमनी के बीच चल रही आगामी इलेक्ट्रोरल प्रक्रिया में ज्यादा अभिरुचि  है और इस सन्दर्भ में भारत का प्रिंट,दृश्य,श्रव्य मीडिया वास्तव में तेजी से अधोगति की ओर अग्रसर है।
                                                    किस हिरोइन ने किस हीरो से डेटिंग की  कौन कहाँ अपनी ऐसी-तैसी करवा रहा है, कितने बलात्कार,कितनी हत्याएं और कितने महा भ्रष्ट्र हैं हम भारत के जन -गण  इसे पूरे आठ पेज में छपने  का गौरव हासिल है किन्तु वेनेज़ुएला में ह्यूगो शावेज तीसरी बार शानदार चुनाव जीते वो भी अमेरिकी हथकंडों  और वैश्विक पूंजीवादी ताकतों के खिलाफ  इसे छापने ,प्रकाशित करने की ,इस पर समीक्षा करने की किसी भी संपादक,एंकर या खबर नाबीस को फुर्सत नहीं मिली। क्यों? क्योंकि ये खबर मीडिया मालिकों में दहशत पैदा करती है।उनके विदेशी निवेशक आकाओं और देशी  प्रभु वर्ग को असहज करती प्रतीत होती है।क्योंकि  ये खबर कि ' वेनेजुएला में कामरेड ह्यूगो  शावेज तीसरी बार  भारी  बहुमत से जीते' वर्तमान सड़ी गली व्यवस्था को ललकारती प्रतीत होती हैं।
                                          वेनेज़ुएला के वर्तमान राष्ट्रपति कॉम  ह्यूगो शावेज विगत 8 अक्तूबर-2012 को पुन:तीसरी बार राष्ट्रपति का चुनाव जीत गए।वे "21 वीं शताब्दी का समाजवाद"परियोजना को आगे बढाने का  जनादेश हासिल करने में  सफल रहे। जैसा कि  सुविदित है की  कॉम  शावेज ने वेनेज़ुएला में तमाम राष्ट्रीय संपदाओं और उद्द्य्मो का राष्ट्रीयकरण पहले ही कर दिया है। दुनिया के तेल उत्पादक देशों में वेनेज़ुएला का स्थान अग्रिम पंक्ति में है।उस पर अमेरिका समेत पूरे पूंजीवादी मुनाफाखोरों की टेडी नज़र बनी हुई है। इस चुनाव   में कॉम  ह्यूगो शावेज को 54.42% वोट मिले है।नेशनल इलेक्ट्रोरल कौंसिल के अनुसार शावेज के प्रतिद्वंदी -डेमोक्रेटिक यूनिटी रौंड़ताब्ले गठबंधन को मात्र 40%और अन्य को दहाई के अंक तक पहुचने में असफलता हाथ लगी वेनेज़ुएला के 1.10 करोड़ मतदाताओं में से 90% ने अपने मताधिकार का  प्रयोग  किया।
        पांच घरेलु निरीक्षण समूह और कई अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण एजेंसियों की निगरानी में ये चुनाव सम्पन्न किये गए। इन सभी ने और खास  तौर  से यु एन ओ के निरीक्षकों ने बड़े बेमन से अपना बोरिया बिस्तर बांधकर 'काराकस' छोड़ा . हुगो शावेज ने इस एतिहासिक हेट्रिक जीत का श्रेय   महान स्वाधीनता सेनानी ' साइमन बोलिबार' को  समर्पित किया। कॉम  ह्यूगो शावेज विगत 14 वर्ष से वेनेजुएला के राष्ट्रपति है और उन्होंने अपने कार्यकाल में न केवल वेनेज़ुएला का बल्कि विश्व के तमाम निर्धन ,अविकसित और आर्थिक संकट से जूझ रहे   राष्ट्रों का पथ प्रदर्शन किया है।वे आधुनिक विश्व में विश्व सर्वहारा के वास्तविक हीरो हैं।
        उनकी महाविजय पर दुनिया के  मेहनतकशों में शोषण उत्पीडन के खिलाफ संघर्ष की चेतना का  संचार हुआ है। विश्व में आज पूंजीवादी व्यवस्था अपने चरम पर है और इस व्यवस्था में महंगाई,बेरोजगारी,नाइंसाफी,असमानता लूट और भयानक  भृष्टाचार का सर्वत्र बोलबाला है। इस व्यवस्था को ख़त्म किया जा सकता है और विश्व को एक वैकल्पिक व्यवस्था का शानदार माडल उपलब्ध है ,वेनेजुएला के रूप में।कामरेड   ह्यूगो शावेज के नेतृत्व में।
                                                                               श्रीराम तिवारी 

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

Wellwishers are like beautiful steeet lamps they can not make the distance shorter but they can lighten your path &make the journey easier ....like bapu yaane mahtma gandhi......