गुरुवार, 6 अगस्त 2026

डकैती जो आस्तीन के सांप वाली होती है!

 संसद के समक्ष संत समाज का मजाक बनाने वाले बरसों पहले बिहार में एक बदनाम गुंडा मर्डरर हुआ करता था,पप्पू कहीं तू वही तो नहीं जिसने सीपीएम के कई बेकसूर कामरेडों की हत्या की है? अबे हत्यारे पप्पू यादव! तू यदुनंदन नहीं हो सकता ! अवश्य ही गर्दभनंदन होगा। तेरे जैसे गुंडे को मंदिर और संत समाज से क्या वास्ता? जो लोग मंदिर में चोरी के लिए छाती पीट रहे हैं, वे दरसल कुंठित या मनोरोगी हैं, जिन्हें अभी तक मंदिर प्रवेश नसीब नहीं हुआ।

एक बालक बुद्धि भी जानता है कि जहाँ मीठा होगा वहाँ चींटे भी पहुंच ही जाया करते हैं। इसी तरह देश दुनिया का कोई भी बिना हिसाब किताब का वित्तीय संस्थान हो या चंदे पर चलने वाला मठ,मंदिर,मस्जिद चर्च,हो, वहाँ दो प्रकार से डाकेजनी पड़ती ही है। एक तो डाकुओं की वो सेंधमारी वाली डकैती, जिसे जान जोखिम में डाल कर की जाती है।जो कानूनन जुर्म है।
दूसरी वाली डकैती वह जो आस्तीन के सांप वाली होती है। ऐंसे चोट्टे बैंक,वीमा, कोआपरेटिव सोसायटी ग्राम पंचायत से लेकर कोर्ट कचहरी तक हर उस जगह मौजूद हैं जहाँ मुद्रा और स्वार्थ का विनिमय संभव है
मुगलों के आगमन उपरांत भारत में इसका चलन प्रारंभ हुआ,अंग्रेजी राज में यह भ्रष्टाचार परवान चढ़ा और आजादी के बाद करुणानिधि,लालू, मुलायम,रेड्डी अखिलेश यादव, मायावती के राज में भ्रष्टाचार चरम पर जा पहुंचा।
अयोध्या रामलला मंदिर के चढ़ावे में अखिलेश यादव की चवन्नी भी नहीं गई । बल्कि चंदा चोर तो अखिलेश के दूरके रिश्तेदार निकले। मंदिर में अरबों खरबों का धन देखकर उन हरामखोरों की नियत डोल गई होगी। चूंकि चोरों के बारे में चोर ही ज्यादा जानते हैं। अत: जिनने चोरी की उन्हीं ने अखिलेश के गुर्गो को खबर दी और उन्ही ने छापे में कबूला भी।लेकिन मजेदार तथ्य यह है कि जितने मंदिर निर्माण बिरोधी थे,वही अखिलेश यादव,पप्पू यादव और देश का सबसे बड़ा गद्दार परिवार संसद भवन के सम्मुख चंदा चोरी का स्वांग रच रहे हैं।

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