चौमासा :- [कविता] श्रीराम तिवारी
पुरवा गाती रहे, पछुआ गुन गुन करे, मानसून की सदा मेहरबानी हो.
सावन सूखा न हो ,भादों रीता ना हो,नाचे वन वन में मोर मीठी बानी हो..
दाएं कच्छ का रण ,बाएं अरुणांचल, ह्रदय गोदावरी कृष्णा कावेरी हो,
यमुना कल कल करे,गंगा निर्मल बहे ,कभी रीते ना रेवा का पानी हो..
माँ की तस्वीर हो,माथे कश्मीर हो,धोये चरणों को सागरका पानी हो.
उपवन खिलते रहें ,वन महकते रहें,खेतों खलिहानों में हरियाली हो..
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