मंगलवार, 10 मार्च 2015

अमर शहीद-भगतसिंह -राजगुरु -सुखदेव की शहादत को चिरस्मरणीय बनाते हुए- काव्यात्मक श्रद्धाँजलि !







         मुक्ति  संग्राम में मेरा ,अपने  इष्ट से मिलन  हो गया।।

         पग शहीदों ने आगे धरा  ,वो युग का चलन हो गया।


          गुलामी के फंद  काटने , जब  जवानियाँ  मचलने  लगीं ,

         तब  क्रांति यज्ञ वेदी  पर , शहादत  का  हवन   हो गया।,,,,,[मुक्ति संग्राम में मेरा ……… ]


         कालकोठरी में एक-एक क्षण , विप्लव के संग हम जिए,

          जन -जन हुंकार जब उठी ,अरुण  तब लाल  हो गया।।


         मानव   इतिहास ने  सभी ,ग्रन्थ रचे  दासता भरे ,

        स्वतंत्रता अहम  हो चली , संघर्ष जब  वयम  हो गया।,,,,,,,,,[मुक्ति संग्राम में मेरा ,,,,,,,,,]


         धुंध भरे  व्योम में  हम , धूमकेतु  जब बन  गए ,

         गुलामी  को चीरकर तब , राष्ट्र  कुंद इंदु हो गया।।


         कालजयी क्रांतियों के ,पृष्ठ  कुछ हम भी लिख चले ,

         विचारों के नीड में परम ,सत्य से  मिलन हो गया।,,,,,,,,,,,,,[मुक्ति संग्राम में मेरा ……]


         अंजुली में अर्ध्य को  लिए, 'इंकलाब ' गुनगुना चले ,

         छंदों के क्षीर सिंधु में , श्रेष्ठ  महा मंत्र  हो गया।।


        जुल्म की सुनामियों के , क्रूर दिन जब  लद चले ,

         मुल्क  की आजादी का , हमको  इल्हाम हो गया।,,,,,[मुक्ति संग्राम में मेरा ....]


        संघर्ष सिंधु मंथन का ,गरल  कंठ हमने धरा  ,

        चूमा फांसी के फंदे को , मानों मीत से मिलन हो गया।।


      सींच अपने लहू से हम ,नए वतन का सृजन  कर चले ,

      क्रांति का परचम लिए , धन्य अपना गमन हो  गया।


     मुक्ति संग्राम में मेरा , अपने इष्ट से मिलन हो गया।।



                                                : -श्रीराम तिवारी:-

  

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