एक दिन मल्होत्रा जी निर्मल बाबा के पास गये और बाबा को नमन करते हुए अर्ज किया:- "बाबा कृपा नहीं हो रही है"!
सोमवार, 17 जुलाई 2023
पत्नी के हाथ से बने खाने की तारीफ करो
ईश्वर का वास कैसे होगा ?
एक सन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर आये | उन्होंने दुकान में अनेक छोटे-बड़े डिब्बे रखे देखे!
सरकारी सहायता का सही लाभ यदि आम जनता तक नही पहुँच पा रहा है,
गजब कंट्रोल व्यवस्था है मेरे देश में!एक गरीब मजदूर छुट्टी लेकर पाँव पैदल कंट्रोल की दुकान जाता है तो दुकान बंद मिलती है! हमारे काम करने वाली बाई बता रही थी कि यदि कदाचित "दुकान खुली भी है,तो कहा जाता है कि राशन खत्म! यदि किंचत राशन देने की नौबत आ ही जाए तो चावल सफेद कंकड़, गेहूं में लक्कड़ पत्थर सब मिलाकर तौल दिया जाता है!"
बरसाती गोबर की तरह हैं,न लीपने के न पाथने के!
मैं ऐंसे दर्जनों लोगों को जानता हूँ,जो सरकारी हाकिम हैं,जिनके यहाँ रिस्वत का पैसा खूब आता है,तीन तीन मकान हैं,क्रषि फार्म हैं और जो वेतन को हाथ भी नही लगाते ! इनमें कुछ तो बीपीएल धारक भी हैं!और कुछ आरक्षणधारी महानुभाव भी हैं!
नैतिकता ,अनुशासन, लोकतंत्र
यह सच है कि भारत में *स्थाई* होने के बाद *सरकारी अधिकारी/ कर्मचारी* का रवैया बदल जाता है! इसीलिये शायद आम जनता निजीकरण के खिलाफ आक्रोश नही जता रही! गोकि चीन, जापान,जर्मनी,फ्रांस से हम नई नई टैक्नालॉजी तो ला सकते हैं,किंतु नैतिकता या अनुशासन नही!
गुरुवार, 13 जुलाई 2023
आगामी कुछ दिनों बाद
आगामी कुछ दिनों बाद कॉल करते ही फोन पर आवाज सुनाई देगी .....
जो कोई मेहनत-मजदूरी से इंकार करे, वही काफिर है।
प्रश्न: इस्लाम क्या है? काफिर कौन?
सदुगुण ही धर्म के लक्षण हैं!
आमतौर पर संस्कृत के 'धर्म' शब्द का अनुवाद अरबी/फारसी के 'मजहब' और अंग्रेजी के रिलीजन शब्द से किया जाता है, यह अनुवाद पूर्णत: भ्रामक है!वास्तव में जितना फर्क पाश्चात्य दर्शन और भारतीय दर्शन में है,जितना फर्क भौतिकवादी और अध्यात्मवादी दर्शन में है! और जितना फर्क किसी प्रमेय के सिद्धांत और सूत्र में है,उतना ही फर्क मजहब और 'धर्म' में है! और उतना ही फर्क रिलीजन और धर्म में भी है!धर्म के बारे में संस्क्रत वांज्ञ्मय में अनेक परिभाषाएं हैं,उनमें से कोई भी रिलीजन या मजहब से मेल नहीं खाती!पाणिनी कहते हैं,- 'मनुज: सत्यम् धारयते इति धर्म:' और महावीर स्वामी का प्रसिद्ध सूत्रवाक्य है-"वस्तु स्वभावो धम्म:!"