मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

BSNL देश के हित में बहुत ज़रूरी है,

प्रायवेट कंपनियों द्वारा फ्री फंड की टेलिकाम सर्विस के नाटक का अंत !!!
सभी private operator ने एक ही दिन मे अपना tariff 40-50 % तक बढ़ा दिया है. 2016 से telecom मे कम से कम tariff होते जा रहा था. नई कम्पनी आयी थी लगा था कि अब तो सब कुछ फ्री ही फ्री. बहुत लोगों को लगा कि पहले की कम्पनी लूट रही थी कोई सुपरमेन बचाने आ गया है वो भी बैंक से लाखों करोड लोन लेके समाजिक सेवा करने के लिए. अब फ्री से सस्ता क्या होता competition खत्म होते गया और 2018 तक आते आते telecom कम्पनी 14 से 4 पर आ गयी. लोगों को data का लत लगा दिया गया कितनी नई नई विदेशी कम्पनी का जलवा हो गया जो youtube कभी देखे भी नहीं थे सारे दिन youtube से जुड गए tictok आदि का craze हो गया साथ मे सारा देश मोबाइल 📷 के नज़र मे आ गया. माने सब कुछ online हो गया. अब जब लगा कि अब तो लत लग चुकी और लोग चाहे कितना भी रेट बढाया जायेगा लोग recharge करेंगे ही तो अब रेट बढ़ने लगा. यही होना था.अब रेट तेजी से बढेगा. लोगों की आवश्यकता badal चुकी है आटा ना रहे तो चलेगा data रहनी चाहिए . एक virtual दुनिया से लोगों को ज़ोडा जा चुका है जहां संवेदना भी virtual है ज़िसे लाइक कमेंट और शेयर से ज़ोडा जाता है.
data क्रांति ज़रूरी थी लेकिन सही मायने मे. ऑनलाइन subidha ज्यादा से ज्यादा बढेगा ज़िससे की crupption पर रोक लगे. लेकिन ये एक ऐसा लत लगाया गया कि बेरोजगार अपने career से ज्यादा data limit खत्म करने पर ध्यान देने लगे. किस data content पर कितना data consume होता है उसकी study होनी ज़रूरी है एक स्वस्थ समाज के लिए.
tariff badhni ही थी क्योंकी सभी private कांपनी फयादे कमाने के लिए आयी है. अगर BSNL ना रहे तो ये सब एक दिन मे 40% तो क्या 400% बढ़ा दे. BSNL का मजबूत रहना देश हित मे बहुत ज़रूरी है. 2020 मे BSNL एक लाख से ज्यादा 4G SITES लगाने जा रही है और सबसे BEST NETWORK 📡 उपलब्ध करेगी.

दुनिया में स्वर्गीय चेयरमैन कॉ. माओत्से तुंग के करोड़ों समर्थक क्यों है?

एक बार बीजिंग शहर के एक मुहल्ले में एक युवती के साथ दुष्कर्म हुआ। जब यह खबर किसी तरह चेयरमैन क्रांतिकारी माओत्से तुंग तक पहुंची,तो वह खुद पीड़ित लड़की से मिले।
उन्होंने उस लड़की से पूछा "जब तुम्हारे साथ जबरदस्ती की जा रहा थी तब तुम मदद के लिये चिल्लाई थी ?"
लड़की ने हां में सर हिलाया।
चेयरमैन माओ ने उस लड़की के सर पर प्यार से हाथ रखा और नरमी से कहा "मेरी बच्ची! क्या तुम उसी ताक़त के साथ दोबारा चिल्ला सकती हो ?" लड़की ने कहा "जी हां।"
चेयरमैन माओ के आदेश पर कुछ सिपाहियों को आधे किलोमीटर के सर्कल में खड़ा कर दिया गया और उसके बाद लड़की से कहा कि अब तुम उसी ताक़त से चीखो। लड़की ने ऐसा ही किया माओ ने उन सिपाहियों को बुलाया और हर एक से पूछा गया कि लड़की की चीख सुनाई दी या नहीं ? सभी सिपाहियों ने कहा कि लड़की की चीख सुनाई दी गई।
चेयरमैन माओ ने अब सिपाहियों को आदेश दिया कि आधे किलोमीटर के उस इलाक़े के तमाम मर्दों को गिरफ्तार कर लिया जाये और तीस मिनट के अंदर अगर मुजरिम की पहचान न हो सके तो गिरफ्तार मर्दों को गोली मार दिया जाये।
फौरन आदेश का पालन हुआ और दिये गये मुहलत को बमुश्किल अभी दस मिनट ही हुए होंगे कि मुजरिम की पहचान हो गई और अगले बीस मिनट के अंदर-अंदर मुजरिम को पकड़कर चेयरमैन माओ के सामने लाया गया।
लड़की ने शिनाख़्त की, मौक़े पर फैसला हुआ और मुजरिम का भेजा उड़ा दिया गया।
जुर्म से सज़ा तक की अवधि लगभग तीन घंटे की रही होगी। इसे कहते हैं फौरन इंसाफ मिलना जिस कारण आज चीन हर क्षेत्र में प्रगति पर है।
काश कुछ ऐसा ही अपने देश में होता तो शायद बलात्कार की इतनी घटनाएं न होती। पर अपने यहां होता क्या है। अगर पीड़िता ज़िंदा है तो वर्षों तक अदालत का चक्कर और अगर जला दी गई तो उसके नाम पर केवल कैंडल मार्च।
काश चीन जैसा फैसला मेरे देश में भी होता..

वह ऐसा पूंजीपति या ऐसा फ़क़ीर नहीं था जो देश को लूटे और झोला उठा कर चल दे।

पद्मश्री राहुल बजाज ने अमित शाह की मौजूदगी में मोदी सरकार की यह कहकर आलोचना की थी कि"सरकार के डर से लोग जरूरी प्रतिक्रिया व्यक्त नही करते,क्योंकि वे बुरे अंजाम से डरते हैं"
जो लोग राहुल बजाज के इस सत्य कथन को ट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं,उन्हें मालूम हो कि उनके पुरखे भी राहुल बजाज के पुरखों के कर्जदार हैं।
इन दिनों ऐसे पूंजीपति मालामाल हो रहे हैं जिनके पूर्वजों का आजादी की लड़ाई में रत्ती भर योगदान नहीं रहा,किंतु इन नव धनाड्यों पर मोदी सरकार 6 साल में देश के खजाने से 5.5 लाख करोड़ लुटा चुकी है।
जबकि इसी देश में एक ऐसा भी पूजीपति हुआ था जिसने आज़ादी आंदोलन में न सिर्फ अपनी कमाई दान कर दी, बल्कि तिलक,महात्मा गांधी और विनोबा भावे के साथ आजादी की जंग लड़ी और जेल भी गया।
नेहरू के जन्म के 10 दिन पहले राजस्थान के एक मारवाड़ी परिवार में एक और लड़का पैदा हुआ था जमनालाल बजाज। वह लड़का केवल चौथी कक्षा पास कर पाया जिसे अंग्रेजी नहीं आती थी। उन्हें वर्धा के एक धनी परिवार ने गोद ले लिया।
यह परिवार अपने धन वैभव का प्रदर्शन करने का शौकीन था। एक बार एक विवाह उत्सव में जाना था। जमना से कहा गया कि हीरे जवाहरात जड़े कपड़े पहनें। इस बात पर जमनालाल की अपने पिता से झगड़ा हुआ और उन्होंने घर छोड़ दिया। भागने के बाद जमना ने अपने पिता को एक कानूनी दस्तावेज भेजा जिसमे कहा कि मुझे धन का लोभ नहीं है। आपका धन्यवाद कि आपने मुझे उस जंगल से मुक्त कर दिया।
बाद में उन्हें खोजकर लाया गया, लेकिन जब उनके इस पिता की मृत्यु हुई तो जमनालाल ने उनकी सारी संपत्ति दान कर दी, क्योंकि वे इसे पहले ही त्याग चुके थे।
जमनालाल को बचपन मे किसी आध्यात्मिक गुरु की तलाश थी। सबसे पहले वे मदन मोहन मालवीय से मिले और कुछ दिनों तक उनके सानिध्य में रहे। इसके बाद में रबीन्द्रनाथ टैगोर से मिले, कई संतों से मिले लेकिन खोज पूरी नहीं हुई।
1906 में बाल गंगाधर तिलक ने अपने अखबार केसरी के लिए इश्तहार दिया तो जमनालाल ने अपनी जेब खर्च से 100 रुपये बचाये और दान किया। बाद में उन्होंने लिखा कि उस 100 रुपये के दान से जो खुशी मिली थी, वह बाद में लाखों के दान से नहीं मिल पाई।
उधर अफ्रीका में गांधी जी अंग्रेजी हुक़ूमत के अन्याय के खिलाफ चरस किये थे। इसकी खबरें पढ़कर जमना काफी प्रभावित हो रहे थे। गांधी जब भारत लौटे तो जमनालाल भी उनके साबरमती आश्रम पहुंच गए। गांधी की जीवन शैली देख कर जमनालाल को लगा कि बस गुरु, हमें तो अपना गुरु मिल गया।
इसके बाद गांधी और जमनालाल का साथ एक इतिहास बन गया। जमनालाल ने गांधी से वर्धा में आश्रम खोलने का अनुरोध किया। गांधी ने इसके लिए विनोबा को भेजा। विनोबा बजाज परिवार के गुरु की तरह वहां रहने लगे।
1920 में जमनालाल बजाज ने गांधी के सामने प्रस्ताव रखा कि वे गांधी को अपने पिता के रूप में गोद लेना चाहते हैं। गांधी इस अजीब प्रस्ताव को हैरान के साथ मान गए। गांधी उनको अपना पांचवां पुत्र मानते थे।
जब गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया तो जमनालाल ने अपने घर सारे विदेशी वस्त्रों को इकट्ठा करवाया और बैलगाड़ी पर लाद कर शहर के बीचोबीच जलवा दिया।
अंग्रेजों ने जमनालाल को राय बहादुर की पदवी दी थी जिसे उन्होंने त्याग दिया। उन्होंने अदालतों के बहिष्कार करते हुए अपने सारे मुकदमे वापस ले लिए। जिन वकीलों ने असहयोग में वकालत छोड़ दी उनकी आर्थिक मदद के लिए जमनालाल ने कांग्रेस के कोष में एक लाख दान दिया।
जमनालाल ने भारत में तब ट्रष्ट और फाउंडेशन की स्थापना की जब देश को इसके बारे में सोचने का वक्त नहीं था।
पंडों के विरोध के बावजूद जमनालाल ने विनोबा के साथ मिलकर दलितों का मंदिर में प्रवेश करवाया। अंग्रेजी हुक़ूमत के विरोध के लिए 1921 में जमनालाल और विनोबा भावे गिरफ्तार किए गए। विनोबा को एक महीने और जमना को डेढ़ साल की सजा हुई।
1937-38 के कांग्रेस अधिवेशन में उन्हें अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव आया जिसे उन्होंने अस्वीकार करते हुए सुभाष चंद्र बोस के नाम की सिफारिश की।
1924 में नागपुर में दंगे हुए तो जमना दंगे रोकने पहुंच गए। उनको चोट आई। इस पर गांधी ने कहा मुझे खुशी है। आप लोग डरपोक न बनें। अगर जमना की जान भी चली जाती तो मुझे दुख नहीं होता क्योंकि इससे हिन्दू धर्म की रक्षा होती।
जमनालाल बजाज ने ताउम्र तन, मन, धन से। आज़ादी आंदोलन और गांधी का साथ दिया। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी ने विनोबा के साथ भूदान आंदोलन में सक्रिय थीं।
गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत को जीने वालों में एक नाम जमनालाल बजाज का है। जमनालाल बजाज का 1942 में देहांत हुआ लेकिन उनका परिवार देश के लिए सक्रिय रहा और यथासंभव योगदान देता रहा।
गांधी जी ने खुद जमनालाल के बारे में काफी कुछ लिखा है। गांधी और विनोबा उनके पारिवारिक सदस्य जैसे थे। सब यहाँ लिखना संभव नहीं है। उन्हीं के पोते हैं राहुल बजाज जिनको भारत सरकार ने पद्मभूषण दिया है।
आज के इस कॉरपोरेट और राजनीति के गठबंधन के दौर में, जब राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राफेल लूट हो रही हो, तब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में कौन बताए कि इस देश में एक वैरागी पूंजीपति भी हुआ था, जिसने अपनी पूंजी देश की आज़ादी के लिए लुटाई। वह ऐसा पूंजीपति या ऐसा फ़क़ीर नहीं था जो देश को लूटे और झोला उठा कर चल दे।
लेकिन भारत में आज नमकहरामों की भरमार हो गई है जो गांधी से लेकर गौरी गणेश तक किसी को भी गरिया सकते हैं। इनपर आप सिर्फ तरस खा सकते हैं।

सोमवार, 2 दिसंबर 2019

"You Start Dying Slowly" का हिन्दी अनुवाद...*नोबेल पुरस्कार विजेता ब्राजीली कवियत्री 'मार्था मेरिडोस' की कविता-


"You Start Dying Slowly"

का हिन्दी अनुवाद...*
*आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं,
यदि आप:-
- करते नहीं कोई यात्रा,
- पढ़ते नहीं कोई किताब,
- सुनते नहीं जीवन की ध्वनियाँ,
- करते नहीं किसी की तारीफ़।
*आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं,
जब आप:-
- मार डालते हैं अपना स्वाभिमान,
- नहीं करने देते मदद अपनी और
न ही करते हैं मदद दूसरों की।
*आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं
जब आप:-
- बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के,
- चलते हैं रोज़ उन्हीं रोज़ वाले रास्तों पे,
- नहीं बदलते हैं अपना दैनिक नियम और व्यवहार,
- नहीं पहनते हैं अलग-अलग रंग के कपड़े और
- बात नहीं करते आप उनसे जो अजनबी हैं, अनजान हैं।
*आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं,
यदि आप:-
- नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को,
और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को,
वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें,
और करती हों तेज़ आपकी धड़कनों को।
*आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं,
अगर आप:-
- नहीं बदल सकते हों अपनी ज़िन्दगी को, जब हों आप असंतुष्ट अपने काम और परिणाम से,
- अग़र आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हों निश्चित को,
- अगर आप नहीं करते हों पीछा किसी स्वप्न का,
- अगर आप नहीं देते हों इजाज़त खुद को, अपने जीवन में कम से कम एक बार,
किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की...।
*तब आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं...!!*
*इसी कविता के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।*

आटा ना रहे तो चलेगा data रहनी चाहिए .

BSNL देश के हित में बहुत ज़रूरी है,प्रायवेट कंपनियों द्वारा फ्री फंड की टेलिकाम सर्विस के नाटक का अंत !!!
सभी private operator ने एक ही दिन मे अपना tariff 40-50 % तक बढ़ा दिया है. 2016 से telecom मे कम से कम tariff होते जा रहा था. नई कम्पनी आयी थी लगा था कि अब तो सब कुछ फ्री ही फ्री. बहुत लोगों को लगा कि पहले की कम्पनी लूट रही थी कोई सुपरमेन बचाने आ गया है वो भी बैंक से लाखों करोड लोन लेके समाजिक सेवा करने के लिए. अब फ्री से सस्ता क्या होता competition खत्म होते गया और 2018 तक आते आते telecom कम्पनी 14 से 4 पर आ गयी. लोगों को data का लत लगा दिया गया कितनी नई नई विदेशी कम्पनी का जलवा हो गया जो youtube कभी देखे भी नहीं थे सारे दिन youtube से जुड गए tictok आदि का craze हो गया साथ मे सारा देश मोबाइल 📷 के नज़र मे आ गया. माने सब कुछ online हो गया. अब जब लगा कि अब तो लत लग चुकी और लोग चाहे कितना भी रेट बढाया जायेगा लोग recharge करेंगे ही तो अब रेट बढ़ने लगा. यही होना था.अब रेट तेजी से बढेगा. लोगों की आवश्यकता badal चुकी है आटा ना रहे तो चलेगा data रहनी चाहिए . एक virtual दुनिया से लोगों को ज़ोडा जा चुका है जहां संवेदना भी virtual है ज़िसे लाइक कमेंट और शेयर से ज़ोडा जाता है.
data क्रांति ज़रूरी थी लेकिन सही मायने मे. ऑनलाइन subidha ज्यादा से ज्यादा बढेगा ज़िससे की crupption पर रोक लगे. लेकिन ये एक ऐसा लत लगाया गया कि बेरोजगार अपने career से ज्यादा data limit खत्म करने पर ध्यान देने लगे. किस data content पर कितना data consume होता है उसकी study होनी ज़रूरी है एक स्वस्थ समाज के लिए.
tariff badhni ही थी क्योंकी सभी private कांपनी फयादे कमाने के लिए आयी है. अगर BSNL ना रहे तो ये सब एक दिन मे 40% तो क्या 400% बढ़ा दे. BSNL का मजबूत रहना देश हित मे बहुत ज़रूरी है. 2020 मे BSNL एक लाख से ज्यादा 4G SITES लगाने जा रही है और सबसे BEST NETWORK 📡 उपलब्ध करेगी.

शनिवार, 30 नवंबर 2019

महाराष्ट्र में लोकतंत्र के चीरहरण कांड पर प्रासंगिक रचना:-


तुम बिल्‍कुल हम जैसे निकले,
अब तक कहाँ छिपे थे भाई?
वो मूरखता, वो घामड़पन
जिसमें हमने सदी गंवाई!
आखिर पहुँची द्वार तुम्‍हारे
अरे बधाई, बहुत बधाई!!
प्रेत धर्म का नाच रहा है,
कायम हिंदू राज करोगे ?
सारे उल्‍टे काज करोगे !
अपना चमन ताराज़ करोगे !!
हम दैसा तुमने भी सोचा,
और पूरी है वैसी तैयारी!
कौन है हिंदू, कौन नहीं है,
तुम भी करोगे फ़तवे जारी!!
होगा कठिन वहाँ भी जीना!
दाँतों आ जाएगा पसीना!!
जैसी तैसी कटा करेगी,
वहाँ भी सब की साँस घुटेगी!
माथे पर सिंदूर की रेखा,
कुछ भी नहीं पड़ोस से सीखा!!
क्‍या हमने दुर्दशा बनाई,
क्या कुछ तुमको नजर न आयी?
कल दुख से सोचा करती थी,
सोच के बहुत हँसी आज आयी!!
तुम भी बिल्‍कुल हम जैसे निकले,
हम दो कौम नहीं थे भाई।
मश्‍क करो तुम, आ जाएगा,
उल्‍टे पाँव चलते जाना!!
ध्‍यान न मन में दूजा आए,
बस पीछे ही नजर जमाना!
भाड़ में जाए शिक्षा-विक्षा,
अब जाहिलपन के गुन गाना!!
आगे गड्ढा है यह मत देखो,
लाओ वापस, गया ज़माना!
एक जाप सा करते जाओ,
बारम्बार यही दोहराओ!!
कैसा वीर महान था भारत!
कैसा आलीशान था-भारत !!
फिर तुम लोग पहुँच जाओगे!
बस परलोक पहुँच जाओगे!!
हम तो हैं पहले से वहाँ पर,
तुम भी समय निकालते रहना !
अब जिस नरक में जाओ वहाँ से
चिट्ठी-विठ्ठी डालते रहना!!

हाऊस वॉईफ की सैलरी*


विगत 2-3 साल से श्रीमती जी को ब्रॉकल अस्थमा की क्राऩिक बीमारी की वजह से डॉक्टरों के निर्देशानुसार किचन में जाना बंद हो गया !वैसे तो झाड़ू पोछा,बर्तन और कपड़े धोने के लिये दो-दो बाइयां पहले से लगा रखीं थीं ,किंतु श्रीमती जी ने खाना बनाने के लिये एक 'रोटी वाली बाई' भी रख ली!
उन्होंने रोटी वाली को काम दैने से पहले उसका इंटरव्यू लिया और पूछा -
- खाली रोटी बनाने का क्या लेती हो ?
रोटी वाली ने पलटकर पूरी प्रश्नावली पेश कर दी!
-आप कितने सदस्य हैं ?
-रोटियाँ एक समय या दोनों समय चाहिये ?
- कितनी रोटियां बनवाएंगी ?
श्रीमती जी से सारी जानकारी लेने के बाद रोटी वाली ने कुछ शर्तो के साथ जवाब दिया-
'बारह रोटी का 17 सौ रूपया'
सुनकर श्रीमती जी चौंक गई.......
उन्होंने मन ही मन हिसाब लगाया तो उन्हें पता चला कि इस दर से तो वे पिछले 45 साल में 8-10 लाख रूपयों की सिर्फ रोटियां ही बेल चुकी हैं!
😂😂😂😂😂😂😂
जब कभी महिलाओं के श्रम का इतिहास लिखा जायेगा, एक बहुत बड़ा घोटाला उजागर होगा.....
😂😂😂😂😂😂

मंगलवार, 26 नवंबर 2019

प्रेम

आँखे बन्द करके जो प्रेम करे वो प्रेमिका' है।
*आँखे खोल के जो प्रेम करे वो *'दोस्त' है।
*आँखे दिखाके जो प्रेम करे वो *'पत्नी'है।
*अपनी आँखे बंद होने तक जो प्रेम करे वो माँ है।
*आँखों में दिखावा न करते हुये जो प्रेम करे वो "पिता"है

शनिवार, 23 नवंबर 2019

हम बिना पौधा रोपे ही गड्ढे भर रहे हैं

सड़क किनारे दो मजदूर पौधा रोपण कर रहे थे। एक मजदूर गढ्ढे खोदे जा रहा था और दूसरा मजदूर बिना पौधा लगाए ही गढ्ढों को वापिस भरता जा रहा था। कौतूहलवश किसी राहगीर ने पूँछा - भाई यह क्या कर रहे हो ? मजदूरों का जबाब मिला - पौधा रोपण कर रहे हैं। राहगीर ने फिर पूंछा -किन्तु पौधे तो कहीं भी नजर नहीं आ रहे ?
पहले वाले मजदूर ने बताया-नगरनिगम ने सड़क किनारे पौधा रोपण की योजना चलाई है। ओवरसियर साहब ने इस साईट पर तीन मजदूरों को काम पर भेजा है । पौधा रोपण की जिम्मेदारी जिस मजदूर को दी गयी है , उसे आज बड़े साहब [चीफ इंजीनियर] की मेडम ने बंगले पर साफ़-सफाई के लिए बुलाया लिया है। मेरा काम सिर्फ गड्ढा खोदना है ,सो मैं खोदे जा रहा हूँ। मेरे इस दूसरे साथी का काम गड्ढे भरना है अतः बिना पौधा रोपे ही ये गड्ढे भरे जा रहा है। हम तीनों को जो अलग-अलग काम दिया गया है, यदि हम उसमें कुछ फेर-बदल करते हैं तो 'साहब लोग' हमें सस्सपेंड कर देंगे ! हम  

गुरुवार, 21 नवंबर 2019

सड़क दुर्घटना में घायल का इलाज किसी बेहतर अस्पताल में सरकार की ओर से अवश्य होना चाहिये!

माननीय कमलनाथ जी,
लोकप्रिय-मुख्यमंत्री,मध्यप्रदेश
नमस्कार!
मान्यवर,
आपको भलीभाँति विदित है कि इन दिनों सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों/बुरी तरह घायल होने वालों की संख्या चरम पर है!आजकल तमाम सड़कों पर पशुओं का डेरा है ! यूपी की तरह ही हमारा मध्यप्रदेश भी सड़क दुर्घटनाओं की भयावह स्थिति में पहुँच चुका है!
यदि किसी शहर की सड़कों पर फुटपाथ नही है,तो इसके लिये सरकार और स्थानीय निकाय ही जिम्मेदार हैं!यदि कहीं फुटपाथ हैं भी तो वे अतिक्रमित हो चुके है,इस स्थिति के लिये प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारें जिम्मेदार हैं!पर्यावरण को ध्यान में रखकर आज कोई बंदा यदि सड़क पर पैदल चलना भी चाहे तो सवाल उठता है कि वह क्या करे कहाँ चले?
इन हालात् में मेरा विनम्र सुझाव है कि यदि कोई तेज गति वाहन पद यात्री को कुचल जाता है,तो फौरन दिवंगत के परिवार की मदद सरकार को करना चाहिये !दिवंगत के आश्रितों को मदद और सड़क दुर्घटना में घायल का 100% इलाज किसी बेहतर अस्पताल में सरकार की ओर से अवश्य होना चाहिये!
यह जबाबदेही भी तय की जाए कि फुटपाथ अतिक्रमण होने के लिये और फुटपाथ नही होने के लिये और सकरी सड़कों के लिये कौन कसूरवार है?
पुनश्च जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ,
आपका शुभेच्छु
श्रीराम तिवारी,इंदौर मध्यप्रदेश