शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

२८ फ़रवरी २०१२ को राष्ट्रीय श्रम शक्ति का प्रदर्शन.

               हमारे देश के  ११    केन्द्रीय श्रमिक संगठनों एवं स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक आह्वान पर दिनांक २८ फरवरी-२०१२ को राष्ट्र्वापी जंगी औद्दोय्गिक हड़ताल होने जा रही है.अखिल भारतीय संयुक अभियान समिति  का ऐलान -ऐ-जुंग होगा:-
  'जब दरिया झूम के उठ्ठेंगे ....तिनकों से न टेल जायेंगे.....
२८ फरवरी को विश्व व्यापी कार्पोरेट पूँजी की अमानवीय विभीषिका के खिलाफ भारत के १०  करोड़ मेहनतकशों का मोर्चा खुल चूका होगा.सर्व विदित है कि यु पी ऐ द्वतीय सरकार न केवल राष्ट्र की सुरक्षा करनेमें विफल रही , बल्कि देश कि ४६ करोड़  मेहनतकश  जनता के हितों की रक्षा करने में असफल रही है. निम्नांकित मुद्दों पर देश की सत्तासीन सभी राजनैतिक पार्टियों और केंद्र तथा राज्य सरकारों का रुख पूंजीपतियों के पक्ष में तथा आम जनता के खिलाफ रहा है.
१-भविष्य निधि पेंशन की न्यूनतम राशि गुजारे लायक[कम से कम-३००० रूपये] हो तथा भुगतान  की गारंटी हो.
२-ठेका मजदूरी प्रथा समाप्त हो ,सभी अस्थायी मजदूरों को स्थाई किया जावे.
३-बढ़ती हुई महंगाई पर रोक लगाओ,सार्वजनिक वितरण व्यवस्था विश्वसनीय और सुध्रुण करो.
४-न्यूनतम मजदूरी कानून में संशोधन  करो,न्यूनतम मजदूरी कम से कम १००००/ रुपया महिना  हो.
५-बोनस,प्रोवीडेंट फंडतथा ग्रेचुटी की न्यूनतम पावंदी हटाई जाए,ग्रेचुटी बढाई जाए.
६-ट्रेड यूनियन अधिकारों पर मालिकों और सरकार के हमले  नहीं चलेंगे.
७-श्रम कानूनों का पालन कराया जाये,उद्द्योगपतियों और प्रशाशनिक मशीनरी के दोहरे शोषण   को समाप्त करो.
८-देश के सार्वजनिक उपक्रमों-बैंक,बीमा ,बी एस एन एल और लाभ के अन्य सरकारी उद्द्य्मों को देशी -विदेशी पूंजीपतियों के हाथों न बेचा जाये.
९-आउट सोर्सिंग बंद करो ,स्थायी प्रुव्र्त्ति के कार्यों को स्थायी श्रमिक से कराया जाए.
१०-पूंजीपतियों के दवाव में आमआदमी  -किसान ,मजदूर के खिलाफ बेजा क़ानून बनाने  का दुस्साहस मत करो.

   इस हड़ताल की घोषणा से पूर्व सभी प्रमुख श्रम संगठनों और स्वतंत्र फेडरेशनों ने देश की राजधानी दिल्ली में और उसके बाद सभी प्रादेशिक राजधानियों में संयुक कन्वेंशन आयोजित किये हैं.स्वतंत्र भारत के ६४ साल के इतिहास में पहली बार सभी केन्द्रीय श्रम संगठनों ने भारत सरकार और अन्य प्रादेशिक सरकारों की गलत आर्थिक एवं श्रमिक नीतियों के खिलाफ संघर्ष के लिए व्यापक एकता के लिए हाथ मिलाया है.जिन केन्द्रीय श्रम संगठनो ने २८ फरवरी २०१२ का आह्वान किया है उनमें -भारतीय मजदूर संघ,इन्टक,एटक,सीटू एवं एह एम् एस इत्यादी प्रमुख  हैं. माना जा रहा कि दुनिया के ट्रेड यूनियन आन्दोलन के इतिहास में यह सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन कार्यवाही होगी.
       हड़ताल का आह्वान करने वाले सभी प्रमुख संगठनों कि आम राय है कि वर्तमान आर्थिक नीतियाँ न तो देश के हित में हैं और न ही श्रमिक और किसानों कि हित-पोषक  हैं.सरकार के  नीति निर्धारकों को आये दिन न्यायलय  कि दुत्कार के वावजूद मेहनतकश जनता और समाज के कमजोर तबकों  कि कोई चिंता नहीं है.बेतहासा महंगाई  की वास्तविकता को नजर अंदाज कर थोक मूल्य सूचकांक  के आभाशी आंकड़ों में जनता को भरमाया जा रहा है.आर्थिक मंदी की आड़ में अय्याश  पूंजीपतियों को अरवों की मदद दी जा रही है.कार्पोरेट दिग्गजों को रियाय्य्तें दीं जा रहीं हैं. कामगार ,किसानों और श्रमिक सर्वहारा वर्ग पर संकट धकेला जा रहा है. देश की जनता की अमानत के जीवंत-प्रमाण केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में सौंप ने की भरसक  कोशिशें जारी हैं.देश की नई नौजवान पीढी का एक बहुत बड़ा और सुशिक्षित वर्ग, असंगठित  और अस्थायी किस्म  की जिन्दगी का हिस्सा बन चुका है.
                  प्रस्तुत हड़ताल केवल वेतन,भत्ते या पूँजी और श्रम के बीच की रस्साकसी मात्र नहीं है, बल्कि वित्तीय पूँजी को उसकी अमानवीयता के लिए कठघरे में खड़ा   करने का ऐलान करती  हुई मजदूर वर्ग के संघर्षों  में एक और  शानदार  मील  का पत्थर  तराशने में कामयाब होगी.
                           
         श्रीराम तिवारी   

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

वसंत; कल-आज-कल

किसी रीतिकालीन विरही कवि के सूफियाना अंदाज़ को स्मरण करते हुए            मैं अपने सभी प्रशंसकों,सुह्रुदयजनों,पाठकों,सपरिजनों एवं ब्लोगिंग की दुनिया के सहचरों को मोद्प्रिय,माधुर्य्मय
   ऋतुराज वसंत के  शुभागमन की शुभकामनायें निम्न चार पंक्तियों के माध्यम से  प्रेषित करता हूँ.
    नहीं पावस एहिं देसरा,ना हेमंत वसंत!
    ना कोयल ना पपीहरा ,जेहिं सुनी आवे कंत!!
          आज के भूमंडलीकरण के अति उन्नत सूचना प्रोद्दौगिकी  के दौर में  हमाराआधुनिकतम  मुक्तक पेश है;....
        याद करना और याद आने में बड़ा  फर्क होता है!
        याद हम  उसे  करते हैं जो हमारे मस्तिष्क में  होता है!!
       याद हम उन्हें आते हैं जो हमारे दिल में होते हैं!
        बड़ा खुशनसीब है वो जो किसी का कुछ तो होता है!
        आजकल एस एम् एस  ,फेस बुक के माध्यम से ,
       वे मोसम भी पावस-हेमंत और वसंत होता है!!
          जो    प्यार -प्रेम के बीज बो देता है!!!
              पद्माकर के शब्दों में ;-\

      कूलन में केलि में  कछारण में कुंजन में,
      क्यारण में कलित कलीन किल्कांत है!
     कहें पद्माकर, परागन में पौन में ,
    पाकन  में पिक में पलाशन  पगंत है!!
    द्वार में दिशान में दूनी देश -देशन में,
    देखों  दीप दीपन में दीपत दिगंत है!
      बेलि में बितान ब्रज  बेलन -नबेलन में ,
     बनन में बागन में बगरो वसंत है!!
       
                   मेरी सद्द स्वरचित पंक्तियाँ....
 
पुरवा  गाती रहे पछुआ गुन-गुन करे,
 बीती जाए शिशिर की जवानी हो!
   बीतें पतझड़ के दौर झूमें आमों में बौर,
   कूंके कुंजन में कोयलिया कारी हो!!
    यमुना कल-कल करे गंगा निर्मल बहे,
  कभी रीते न रेवा का पानी हो!
    फलें फूलें दिगंत गाता आये वसंत
  हर सवेरा नया और संध्या सुहानी हो!१



      श्रीराम तिवारी
        





          
    
     
     
             

शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

AWAKENING INDIA ON DD NATIONAL

AWAKENING INDIA ON DD NATIONAL

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शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

जीवन के अनमोल सूत्र -२

[१] बड़ा आदमी होना अच्छी बात है लेकिन अच्छा आदमी होना "बड़ी"बात है.
[२]जिन्दगी में टंटे-झंटे बहुत हैं,तनाव और कुंठा बहुत है,अवरोध और आकांक्षाएं बहुत है फिर भी जिनके चेहरे पर सौम्यता और ओंठों पर मुस्कान है वे ही जीवन का अर्थ जान पाते है.
[३]यदि लोग सिर्फ जरुरत पढने पर आपको याद करते है तो इसमें बुरा क्या है?यह तो आपके लिए आत्म गौरव जैसा है ,क्योंकि आप उस मोमवत्ती की तरह  तब याद किये जाते हैं जब किसी की जिन्दगी का उजास  नदारत होता है.
[४]कहते हैं कि जब कोई किसी को याद करता है तो  एक तारा टूटकर गिरता है  और इस तरह सारा आसमान एक दिन खाली हो जाना चाहिए किन्तु खगोलीय वेत्ता तो नित नए तारों की संख्या बढ़ाते जा रहे हैं.
[५]प्र्तेयेक क्षण ,सेकंड,मिनिट,घंटा,दिन और रात अति महत्व के हैं सुबह हमको आशाओं से अभिप्रेरित करती है,प्र्तेयेक दोपहर  से हम विश्वशनीयता  का सबक सीख सकते हैं ,प्रत्येक सुहानी शाम से हमें प्रेम  की प्रेरणा मिलती है प्रत्येक रात्रि से हमें विश्राम का सहज सन्देश मिल जाया करता है.
               संकलन: श्रीराम तिवारी 

बुधवार, 25 जनवरी 2012

गणतंत्र दिवस पर शक्ति प्रदर्शन का औचित्य क्या है?

   आजादी के  लगभग तीन साल बाद भारत राष्ट्र के तत्कालीन सुविग्य्जनों और कानूनविदों ने भारतीय संविधान को अंगीकृत करते हुए उसकी प्रस्तावना में कहा था "हम भारत के लोग एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतंत्रात्मक ,धर्मनिरपेक्ष,समाजवादी गणतंत्र स्थापित करने; आर्थिक,राजनैतिक,सामाजिक ,न्याय,विचार-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता औरअवसरों की  समानता स्थापित करने के निमित्त ........के लिए दिनांक २६ जनवरी .......को एतद द्वारा अंगीकृत  और आत्मार्पित करते हैं" यह देश के तत्कालीन करोड़ों निरक्षरों के लिए तब भी अबूझ था और आज़ादी के ६५ साल बाद देश की अधिसंख्य जनता{भले ही वे साक्षर ही  क्यों न हों} को आज भी  इसकी   कोई खास  अनुगूंज महसूस नहीं हो सकी है.तत्कालीन समीक्षकों ने तो यहाँ तक भविष्य वाणी कर डाली थी कि ये तो वकीलों के चोंचले हैं ;आम जनता के पल्ले कुछ नहीं पड़ने वाला.पवित्र संविधान के लागु होने को ६२ वर्ष हो चुके हैं किन्तु कोई भी किसी भी दिशा में संतुष्ट नहीं है.परिणाम स्वरूप  विप्लवी उथल-पुथल जारी है.
        ऐंसे कितने नर-नारी होंगे जो ये जानते हैं कि संविधान हमें क्या-क्या देता है और हमसे क्या-क्या माँगता है?हम भारत के जन-गणों ने संविधान की उक्त प्रस्तावना को अपनाया जिसमें वे तमाम सूत्र मौजूद हैं जो देश के विकाश हेतु कारगर हो सकते थे.हासिये पर खड़े प्रत्येक भारतीय को विकाश की मुख्य धारा का पयपान कराया जा सकता किन्तु शोषित जनों  की   वर्तमान बदरंग तस्वीर  को अनदेखा करकेहर  २६ जनवरी के उत्सवी माहौल में सचाई को छुपाया जाता रहा है.
                            सामंतयुग में    जब लोकतंत्र नहीं था तब शायद राजे-रजवाड़े  अश्त्र-शश्त्र  और रणकौशल का प्रदर्शन किया करते थे.यत्र-तत्र शक्ति प्रदर्शन और जुलुस इत्यादि के माध्यम से अपनी रियासत कि जनता को डराकर  रखते थे.आजादी  के बाद अब हम किसे डराना चाहते हैं?कि हर गणतंत्र  दिवस पर न केवल सुसज्जित  सैन्यबलों  की परेड बल्कि तमाम अश्त्र-शस्त्र का जुलुस निकालते हैं.हमारी ताकत और हथियारों की क्षमता को हम जो दुनिया को दिखाते हैं वो ऐंसा ही है जैसे घर फूंक कर तापना. हमारी सेनाओं के बारे में,हमारी अश्त्र-शस्त्र क्षमताओं के बारे मे सूचनाएँ  एकत्रित करने में  दुश्मन राष्ट्रों के जासूसों को कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ती क्योंकि हम तो खुद सब कुछ बता देने को उतावले हैं.जब दुनिया जानती है कि हम युद्ध कला में बेमिसाल हैं,हमने १९६५,१९७१ और कारगिल युद्ध में सावित कर दिया है कि भारत अजेय है.
           गणतंत्र के रोज शक्ति प्रदर्शन करने के बजाय हमें अपने गणतांत्रिक मूल्यों,तौर-तरीकों,संवैधानिक नीति निर्देशक सिद्धांतों की मीमांसा करनी चाहिए.सैन्य बलों,आयुध भंडारों को तो गुप्त ही रखना चाहिए ताकि शत्रुता रखने बाले देशों को तदनुरूप तैयारी का मौका नहीं मिले.हर साल करोड़ों रूपये खर्च कर  निरर्थक सैन्यपथ संचलन  प्रयोजन करने से संविधान प्रदत्त अधिकारों या तदनुरूप कर्तब्यों के प्रति जनता -जनार्दन की आस्था नहीं बढ़ेगी.मुल्क और आवाम की तरक्की के लिए कानून में आस्था ,कर्तव्य परायणता,राष्ट्र निष्ठां बहुत जरुरी है.इन मूल्यों की स्थापना के लिए सर्व साधारण को संविधान से जोड़ना लाजमी होगा.सिर्फ वकीलों ,पैसे वालों या रुत्वे वालों की  पहुँच में जब तक संविधान सीमित रहेगा तब तक आम जनता का बड़ा हिस्सा आजादी के लिए लालायित   रहेगा.
                                                            श्रीराम तिवारी

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

जीवन के अनमोल सूत्र भाग -एक

[१]जो लोग दिल से भले होते हैं  अक्सर उनकी वाणी में उजड्डता और फूहड़पन झलकता है ये लोग बातों की मृगतृष्णा के बजाय   वक्त आने पर ऐसे मनुष्य मानव मात्र के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार  रहते हैं.
[२] सपनों को आँखों में न बसाइए,क्योंकि आँखों से बहने वाले आंसू उन सपनों को कभी भी बहाकर ले जा सकते हैं.सपनों को ह्रदय में स्थान दीजिये ताकि जब तक रहेगी जिन्दगी वो सपनों को पूरा करने में प्रेरणा स्त्रोत अवश्य बना रहेगा.
[3]  सब इंसान एक जैसे हैं ;फर्क सिर्फ इतना है की कुछ जख्म देते हैं,कुछ जख्म भरते हैं.हम सफ़र सब हैं फर्क सिर्फ इतना है किकुछ साथ देते हैं ;कुछ छोड़ दिया करते हैं.प्यार मोहब्बत सब करते हैं,फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ जान दे  देते हैं; कुछ जान ले  लेते हैं.दोस्ती,  मित्रता ,यारी सब करते हैं फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ तो निभाते रहते हैं,कुछ आजमाते रहते हैं.
[४] कोई भी इस जहां में पूर्ण और विशुद्ध नहीं है,यदि तुम इसलिए किसी आदमी  से दूर रहते हो कि वह  बुरा है ,तो तुम अकेले पड़ जाओगे . तुम्हारी भलाई इसी में है कि छिदान्वेशन से दूर रहो और सभी को खुद और खुदा के समान समझकर प्यार करो.
[५]  यदि आप मिलनसार और खुश मिज़ाज  किस्म के इंसान हैं और किसी को कुछ देना चाहते हैं तो उसे  सबसे अनमोल चीज दीजिये.वह अनमोल वस्तु है वक्त;जो आपके  पास ताजिंदगी है और किसी को दो या न दो खर्च तो अपने आप भी होता जाता है.यह आपकी  ओर से आपकी जिन्दगी का बेहतरीन तोहफा आपके निजानंद में योगदान अवश्य करेगा.
                                                                       श्रीराम तिवारी