गुरुवार, 29 सितंबर 2016

क्या मुसर्रफ या शरीफ द्वय भारत के मित्र हैं ?

 आम तौर पर राजनीति की किसी भी  स्थिति में कोई नेता या दल का पूर्णतः परफेक्ट होना सम्भव नहीं। जोकुछ  भी सामने है, वो केवल सापेक्ष सत्य है। अरब ,इजरायल ,फ़्रांस ,जर्मनी, इंग्लैंड जैसे किसी खास कौम वाले या एक - भाषा-एक 'राष्ट्रीयता'वाले  देशभी जब घोर 'मतैक्य' के शिकार हैं ,तब भारत जैसे बहुभाषी,बहुजातीय, बहुधर्मी , बहुसभ्यता -संस्कृति वाले देश  में मतैक्य'का होना कोई अचरज की बात नहीं है।भारतीय संविधान निर्माताओं ने 'अभिव्यक्ति की आजादी' का अधिकार अक्षुण रखा है।  प्रधानमंत्री की आलोचना ,सतारूढ़ दल की आलोचना , और शासन-प्रशासन की आलोचना जब इंग्लैंड ,अमेरिका और रूस में जायज है तब भारत तो विश्व बड़ा लोकतंत्र है  इसलिए स्वाभाविकरूप से यहाँ 'अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता 'पर कोई पहरा सम्भव नहीं । कार्टूनिस्ट हों ,फ़िल्मी कलाकर हों या मिमिक्री वाले हों ,यदि वे अपने देश भारत के प्रति बफादार हैं ,यदि वे अनुशासित हैं , यदि वे भृष्ट नहीं हैं और यदि वे देश की सभ्यता संस्कृति से प्यार करते हैं तो  संवैधानिक दायरे में रहकर वे किसी भी तुर्रमखां की 'स्वस्थ'आलोचना  कर सकते हैं। ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक को किसी से भी डरने की जरूरत नहीं। वह  हर उस शख्स की आलोचना कर सकता है ,जो जनता के प्रति उत्तरदाई है।

इस दौर में भारतीय प्रधान मंत्री की देश -विदेश में काफी तारीफ हो रही है। हालाँकि कहीं-कहीं आलोचना और निंदा भी हो रही है। अपने प्रधान मन्त्रित्व  कार्यकाल में मोदी जी ने केवल  'जुमलेबाजी' और 'मन की बातें 'ही कीं हैं। किन्तु पाकिस्तानने भाजपा ,'संघ परिवार' और मोदीजी पर बहुत उपकार किया है कि भारत की सीमाओं पर निरन्तर परोक्ष हमले करते हुए मोदीजी की लोकप्रियता में दुगना इजाफा किया है, उनकी स्वीकार्यता को मजबूत किया है। वैसे तो  मोदीजी जब गुजरातके मुख्यमंत्री थे तब  उन्होंने  दंगाग्रस्त गुजरात में 'अटलजीके 'राजधर्म' का पालन नहीं कियाथा ,तभीसे मोदीजी देश और दुनिया के बुद्धिजीवियों की आलोचना के केंद्रमें रहे हैं। मोदीजी की व्यक्तिगत खामियों और उनकी पार्टी की आर्थिक-सामाजिक और वैदेशिक नीतियों की आलोचना के लिए हमारे भारतीय विपक्षी दल पूर्णतः सक्षम हैं। लेकिन सूप बोले सो बोले छलनी क्यों बोले ? पाकिस्तानके भूतपूर्व और महा - पागल फौजी तानाशाह परवेज मुसर्रफ ने मोदी जी की घटिया आलोचना की है, जो नाकाबिले बर्दास्त है और यहां लिखने लायक नहीं है। भारत के तमाम विपक्षी दलों को ,बुद्धिजीवियों को और प्रगितिशील राजनितिज्ञों को मुसर्रफ की इस हरकत का उचित जबबाब देना चाहिए।

 मुसर्रफ को बताया जाए कि जो लोग भारत के खिलाफ हैं ,जो लोग भारत में आतंकवाद और सम्प्रदायवाद और नकली मुद्रा भेज रहे हैं ,उन्हें भारत के प्रधान मंत्री की आलोचना का अधिकार नहीं है। चूँकि परवेज मुसर्रफ खुद अटलजीके समय भारतके प्रति निरंतर शत्रतापूर्ण कार्यवाहियों के अलम्बरदार हुआ करते थे ,उन्होंने ही आगरा संधि पर तुषारापात भी किया था। अब यदि वे मोदी जी को पाकिस्तान का दुश्मन बता रहे हैं तो क्या मुसर्रफ या शरीफ द्वय  भारत के मित्र हैं ?


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