आम तौर पर दलित विमर्श के संदर्भ में भारतीय *एकता में अनेकता* सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, भारतीय सभ्यता और सस्कृति की घोर उपेक्षा की जाती रही है!सवर्ण विरोधी लेखन के पर निंदक न तो संस्कृत व्याकरण अथवा साहित्य के अध्येता रहे हैं न संस्कृत वांग्मय के बारे में जानते हैं! इसीलिए अतीत में कुछ दलित नेताओं ने सनातन धर्म के मूल्यों का सम्मान नही किया! अपने ही वास्तविक इतिहास से अनभिज्ञ वे हिंदू विरोधी लेखक *भारतीय स्वाधीनता संग्राम* के असली नायकों के साथ न्याय नहीं कर सके !
रविवार, 26 मार्च 2023
महान हुतात्मा सबके सब सवर्ण थे
पानी पी पी कर सवर्णों के खिलाफ विष बमन करने वाले तो भूल जाते हैं कि महान स्वाधीनता संग्राम सेनानी तात्या टोपे,रानी झाँसी,मंगल पांडे,चंद्रशेखर आजाद (तिवारी), पं रामप्रसाद 'बिस्मिल', चाफेकर बंधु ,आगरकर बंधु,स्वामी श्रद्धानंद,लाला लाजपत राय और शहीद भगत सिंह जैसे महान हुतात्मा सबके सब सवर्ण थे!इन तमाम शहीदों के मन में हमेशा दलित शोषित वंचित समाज के प्रति करुणा का भाव जाग्रत रहा। इन शहीदों के प्रति इस्लामिक शासकों और अंगरेजी शासकों का शत्रुतापूर्ण रुख तो समझ में आता है, किंतु दलित लेखकों और राजनीतिक नेताओं ने इन अमर शहीदों की घोर उपेक्षा की है! यह मेरी समझ से परे है!
स्वतंत्रता संग्राम में जो महान बलिदानी ब्रिटिश साम्राज्यवाद से लड़ते हुए शहीद हुए,उनमें से अधिकांश सवर्ण या ब्राह्मण जाति के हुआ करते थे! अब आजाद मुल्क में सवर्णों को छोड़कर विशेष रूप से निर्धन ब्राह्मणों को छोड़कर बाकी सब आरक्षण की मलाई के लिये मचलते रहते हैं!
इधर सवर्ण वर्ग या ब्राह्मण वर्ग ने अपना सर्वस्व मानवमात्र को अर्पित करते हुए भारतकी एकता- अखंडता, सभ्यता संस्कृति और सनातन धर्म को बचाने का ठेका ले रखा है! इसके अलावा 'गजवा ए हिंद', पीएफआई, चीन -पाकिस्तान से भारत को बचाने के लिए अधिकांश सवर्ण अपना बलिदान देने को तैयार हैं!
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राहुल गांधी की बयानबाजी ने रायता ढोल दिया!
राहुल गांधी भले ही 50 के होने जा रहे हैं,किंतु उनका दुर्भाग्य यथावत् जारी है! इससे पहले की कांग्रेस नेता *भारत जोड़ो यात्रा* की आंशिक सफलता के जोश को राजनैतिक लाभ में परिवर्तित कर पाते,राहुल गांधी की पूर्ववर्ती बयानबाजी ने रायता ढोल दिया! इधर अदालत ने दो साल की सजा सुनाई,उधर फटाफट संसद की सदस्यता छीन ली गई!
दरसल राहुल गांधी का पराभव और कांग्रेस की लगातार हो रही हार का कारण सिर्फ,उनकी गलत बयानी,परिवारवाद,जातिवाद और भ्रस्टाचार ही नही है! बल्कि अतीत में भारत सहित दुनिया भर में इस्लामिक आतंकवाद ने जो कहर बरपाया,उसी मजहबी उन्माद का परिणाम है कि भारत में बहुसंख्यक हिंदू समाज को झटका लगा कि इन हालात में भी कांग्रेस और वाम धर्मनिर्पेक्ष दल केवल अल्पसंख्यक हित की ही बात करते हैं!हिंदुओं को लगा कि कांग्रेस और वामपंथ की अपेक्षा भाजपा ही इस इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला कर सकती है! यही वजह है कि वामपंथ और कांग्रेस की लोकप्रियता में बहुत गिरावट दर्ज हुई है !
दूसरी तरफ जातिवादी क्षेत्रीयतावादी व्यक्तिवादी दल,जो कि भ्रष्टाचार के दल दल में आकंठ डूबे हैं, वे केंद्र की मोदी सरकार का विरोध इसलिए कर रहे हैं कि मोदी सरकार को हटाकर केंद्र में ऐंसी कमजोर गठबंधन सरकार लाई जाए जो कि इन भ्रष्ट नेताओं और महाभ्रष्ट क्षेत्रीय दलों को अभयदान दे सके!
अतीत में भारत की निरीह अहिंसक बहुसंख्यक जनता ने मजहबी आतंकवाद का जो दंश भोगा है,कश्मीरी हिंदूओं का जो कत्लेआम हुआ है,एवं 'गजवा ए हिंद' का जो ऐलान दरपेश हुआ है और यूपी समेत पूरे भारत में विदेशी ऐजेंटों की करतूत से भारतीय समाज में जो अलगाववाद और वर्ण संघर्ष तेज हुआ है,उसी के परिणामस्वरूप हिंदु जनाक्रोष ने भाजपा को सत्ता में बिठाने का काम किया है!
इसके अलावा तीन तलाक,उज्जवला योजना, मुफ्त अनाज योजना,सहित सभी कल्याणकारी योजनाओं ने मुस्लिम महिलाओं और दलित आदिवासी गरीब वर्ग को मोदी का मुरीद बना दिया है! इसलिए बहरहाल राजनीतिक पटल पर कांग्रेस और वामपंथ का स्पेस अभी सिकुड़ता जा रहा है! इस हालात में राहुल गांधी, कांग्रेस और वामपंथ के सामने एक ही विकल्प है कि वे बहुसंख्यक हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करें और भाजपा की गलतियों को जनता के बीच पेश करते रहें!
यह सच है कि मनमोहन सिंह सरकार ने खूब काम किये थे,किंतु तब राहुल गांधी ने उनका साथ देने के बजाय अपमानित ही किया था! तब बाबा रामदेव,अन्ना हजारे के छद्म आंदोलन, संघ की अनवरत चुनावी तैयारी,रथयात्राएं, और *रामलला मंदिर* ये सब उपादान भाजपा की जीत के निमित्त रहेहैं! दरसल कांग्रेस और वामपंथ को हरवाने में इस्लामिक आतंकवाद और अल्पसंख्यक वर्ग की टैक्टिकल वोटिंग का विशेष हाथ रहा है ! बंगाल में वामपंथ ने अल्पसंख्यसकों के लिये क्या नही किया? किंतु वाम को छोड़ ममता के साथ हो लेना अल्पसंख्यक वर्ग की टैक्टिकल वोटिंग का जीवंत प्रमाण है! जय हिंद!#PMNarendramodi/राहुलगांधी/
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13LN Verma, Umesh Jain and 11 othersवास्तविक गरीब -अभी तक बंचित हैं,
मैं ऐंसे दर्जनों निर्धन परिवारों को जानता हूँ, जिनको न तो आरक्षण सुविधा प्राप्त है, न उनके पास BPL कार्ड है,न राशन कार्ड है और उनके खाते में सरकार की तरफ से आज तक एक धैला आया और न कभी आएगा! वह इसलिए क्योंकि अधिकांस राशन कार्ड,जॉब कार्ड,मनरेगा कार्ड,बीपीएल कार्ड उन दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के पास हैं जो राजनैतिक दल सत्ता में रहे हैं!
जो भूमिहीन हैं,मजदूर हैं, जिनके परिवार में अब तक किसी को कोई आरक्षण नही मिला,और यदि वे सरकारी सेवाओं की न्यूनतम् पात्रता रखते हैं,तो ऐंसे उन Sc/ST/OBC और निर्धन सवर्ण बंधुओं को दस साल तक आरक्षण जारी रखा जाए!
नोट:- साईंस एंड टेक्नालाजी,बायोकैम,विज्ञान अनुसंधान,बायोमेट्रिक,मेडिकल,फार्मासिस्ट, अंतरिक्ष विज्ञान, इसरो, ऐटामिक रिसर्च, आर्मस फोर्सस, उड्डयन, डिफेंस और ज्यूडिशियल क्षेत्र में केवल मेरिट को ही आधार माना जाए!
इस तरह केंद्र सरकारकी सिर्फ 50% सहायता राशि ही सही हाथों में पहुँच पाएगी! किंतु बाकी 50% सहायता राशि उन चोट्टों के हाथ में जाएगी जो पहले से ही मुफ्त खोरी कर रहे हैं!चुनावी राजनैतिक पक्षपात के कारण देश के जो करोड़ों वास्तविक गरीब -अभी तक बंचित हैं,जो कभी कोई सरकारी सहायता प्राप्त नही कर सके,उनके हाथ में इस दफे भी फूटी कौड़ी नही आनेवाली! जोर से बोलो-लोकतंत्र की -जय
हिंदू ट्राइब एंड कास्ट
(1800-1882, Part 1)
कुछ दिनों पूर्व हमारे डॉ भुपेन्द्र सिंह ने एक प्रश्न पूछा था कि वह कौन सा ऐसा 'समूह' है जो सबसे ज्यादा गाली सुनी है। उत्तर सबको पता था, लेकिन उनके वाल पर किसी ने भी प्रामाणिकता से शायद ही कोई उत्तर दे पाया हो। मैंने समूल स्तोत्र सहित प्रमाणिक एवं तथ्यों के साथ उत्तर देने का एक छोटा सा प्रयास किया है।
[यह थोड़ा जटिल एवं बड़ा विषय है। इसे समझने के लिए आपको 1850 के पहले तक भारत में क्या होता है। उसपर भी ध्यान देना पड़ेगा।]
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प्रश्न: सबसे पहले बैकवर्ड किसे कहा गया? आपस में बाँटने का नया आधार क्या था?
उत्तर: सर्वप्रथम, 1872 ई में, मुस्लिमों को 'बैकवर्ड क्लास विशेष प्रलोभन' (Social Inducements to Backward Class) की पहचान।
[यही से विक्टिमहुड की भावना भरना शुरुआत कर दी। ऐसा उन्होंने अफ्रीका में पहले ही कर चुके हैं]
सब कुछ पहले प्रयोग कर चुके थे। अब नया आधार बनाना ही था।
वह नया आधार क्या हो सकता है?
ब्रिटिश सरकार में नौकरी हेतु प्रतिनिधित्व!
ब्रिटिश सरकार में नौकरी हेतु, मुस्लिमों के लिए एक अलग शिक्षा व्यवस्था लागू की गई जिसके तहत स्पेशल उर्दू मीडियम में शिक्षा दिया जाने लगा। मुस्लिम शिक्षकों को नियुक्त किया गया। मद्रास यूनिवर्सिटी में पर्शिया और अरेबिक पढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किया गया। मुस्लिमों के लिए विशेष ग्रांट बनाई गई। उनकी स्कूल फीस आधी कर दी गई थी.[A]
[A] Source: Resolution No. 300 (Home Department, Education), dated 7 August 1871, paras 2–3, compared with Lord Mayo's Note.
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प्रश्न: मुसलमानों को तो अलग पहचान दे दी, लेकिन, हिन्दुओं के साथ क्या किया?
उत्तर: बहुत भयानक आधार अपनाते हैं।
[B]. Source: Memorandum on the Census of British India 1871-72.
[D] Souce: Criminal Tribe Act 1871
[वैसे बतला देता हूँ कि माननीय डॉ अम्बेडकर जी ने अपने जीवन में कभी भी मनुस्मृति नहीं पढ़ा है, ऐसा उन्होंने स्वयं लिखा है।]
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प्रश्न: ब्रिटिश शिक्षा पद्धति एवं सरकारी नौकरी में सबसे ज्यादा कौन सा वर्ग था? इसके कारण क्या थे?
उत्तर: निश्चित रूप में ब्राह्मण या उनके समतुल्य अन्य कास्ट को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। इसमें कोई दो राय नहीं हो सकता। यह और अधिक प्रबल हो जाता है, जब “ईट इंडिया कंपनी” की पॉलिसी का भी मत ऐसा हो।
[इसके पहले १८१३ ई में ब्रिटिश पार्लियामेंट कानून बनाया था, जिसके अनुसार, वे भारतीय शिक्षा, विज्ञान एवं साहित्य को प्रोत्साहन देंगे उसके लिए आर्थिक सहायता भी देंगे।]
उदारहण स्वरूप:
[F] Source: Public Despatches from England to Fort William, 2 February 1831
[G] Source: Minute by the Hon'ble T. B. Macaulay, dated the 2nd February 1835,Point 34 and 33.
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प्रश्न: मैकाले के द्वारा 1835 ई में अंग्रेजी इसाई शिक्षा लागू करने से पहले, भारत की शिक्षा व्यवस्था कैसी थी? क्या शुद्रों को शिक्षा मिलती थी?
उत्तर: 1835 ई से पहले, गरुकुल द्वारा शिक्षा दिए जाते थे। ब्राह्मण शिक्षा दिया करते थे। शुद्रों की संख्या तो ब्रह्मणो की तुलना में चार गुना अधिक थी।
[H] Source: For details of report please see The Beautiful Tree by Dharmpal
[आप सबको यह प्रश्न पूछना चाहिए कि जब तक शिक्षा ब्राह्मणों के हाथ में थी, शुद्रों को पूर्ण रूप से शिक्षा मिलती थी। फिर अचानक से 1835 ई के मैकाले द्वारा इसाई शिक्षा लागू करने के बाद ऐसा क्या हुआ कि शुद्रों को शिक्षा नहीं मिलने लगा।]
क्या यह प्रश्न माननीय डॉ अम्बेडकर ने अपने जीवन में कभी पूछा? ख़ैर!
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प्रश्न: 1871 के भारत जनगणना में ब्राहम्ण वुरुद्ध तो कोई बात नहीं है। किसी को भी low caste नहीं कहा गया है? फिर अचानक से यह ब्राहम्ण विरुद्ध सुर कैसे उठने लगे? 1881 ई में Low caste और Low tribe कहाँ से जोड़ दिए गए?
उत्तर: अंग्रेज 1871 ई. में भारत में जनगणना कर रहे थे तो उन्हें "कास्ट" को समझने में बहुत समस्या हो रही थी। अतएव 1872 ई में ईसाई मिशनरी M A Sheering को यह कार्य सौंपा। उसने इस विषय पर विशेष अध्धयन कर, 1872 ई में "हिंदू ट्राइब एंड कास्ट (Hindu Tribe And Caste)" नमक "तीन वॉल्यूम'' की पुस्तके पब्लिश के थी। इसके अनुसार वह बहुत आश्चर्यचकित होता है कि आजतक क्यों किसी ने "कास्ट" के आधार पर इनको आपस में बांटने का प्रयास नहीं किया। यह वही है जो, मैक्स मुलर द्वारा 1847 ई में ब्राहम्ण को Arrian Tribe of White Caucasist Race की बातों को आगे बढ़ाता है। उसके अनुसार ब्राह्मण सबसे ऊपर, उसके नीचे क्षत्रिय, फिर उसके नीचे सभी down कास्ट आते हैं। दरसल यह सब बातें मैक्स मुलर ने भी 1847 ई में कही थी।[I]
[मैक्स मुलर के बाद, Down/Lower Caste का उपयोग M A Sherring किया। 1871 जनगणना के अनुसार कोई भी Lower कास्ट नहीं था]
[थोड़ा ध्यान दीजिए, डॉ भीमराव अम्बेडकर ने ऐसी ही एक पुस्तक लिखी थी, Annihilation of caste। साथ साथ मैक्स मुलर के अनुसार जो बौद्ध-ब्राह्मण की परिकाल्पनिक संघर्ष को वास्तविकता में परिवर्तित करते हैं। ]
[I] Source: M. A. Sherring, Hindu Tribes and Castes, 3 vols, 1872.
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प्रश्न: 1872 ई में मुस्लिमों को बैकवर्ड पहचान बनाने के बाद, इस आधार का कहाँ और कैसे उपयोग किया?
उत्तर: 1872 ई. में इस तरह एक दिखावटी विशेष पहचान बनाने के पश्चात, दोनों, सरकार एवं क्रिश्चियन मिशनरीज के द्वारा, “शिक्षा एवं ब्रिटिश सरकारी नौकरी” को एक “पॉपुलर इंस्ट्रक्शन” (लोकप्रिय हथियार) के रूप में उपयोग किया जाने लगा भारत की जनता को और आपस में बाँटने के लिए.
[यही Chief and Noble लोग आज OBC में आते हैं। उदाहरण: आप ध्यान दीजिए, माधव राव सिन्धिया, राज परिवार से हैं, उनकी कास्ट कुर्मी है, वे आज OBC में आते हैं।]
1882 में इसाई प्रेरित Education Commision में, 'फुले' का योगदान ध्यान देने वाली है। दोनो जन अमेरिकन मिशनरी से जुड़े हुए थे।
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यह वही समय होता है। ब्रिटिश सरकार बहुत सारे सर्वे करवाती है। और हर एक सर्वे में ब्राह्मण वर्ग ज्यादातर ब्रिटिश क्लर्क या शिक्षा में अधिक पाए जाते हैं। यह सब बंगाल तमिलनाडु में करवाते हैं।
इसी समय ब्रिटिश सरकार का रिटायर सिविल ऑफिसर A O Hume, 1883 ई में Congress की स्थापना करता है। बस यहीं से फिर वास्तविक खेल शुरू होता है। समस्त तमिलनाडु में Arian Tribe को आर्यन रेस बताकर, मैक्समूलर की परिकल्पना वाली कहानी स्कूलों कॉलेज में पढ़ाना आरम्भ हो चुका होता है।
अगले दशक में शुरू होता है। आरक्षण का खेल।
अगले 30 वर्ष में 3 करोड़ भारतीयों की मृत्यु अन्न के अभाव एवं हैजा, प्लेग, फ्लू से होती है। [K]
[K]The case for India Will Durant, 1930, Page 34
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ब्राह्मण वर्ग इसलिए निशाने आए, चूंकि वे ही इसाई मिशनिंरी के कार्य में सबसे ज्यादा बाधक थे।
वे शिक्षक वर्ग से थे।
उनकी संख्या बहुत कम है। 8% भी नहीं। केरल, आंध्रप्रदेश में तो 2% भी नहीं है। आज के इस वोट बैंक में इनकी कोई वैल्यू नहीं है।
अकेडमिया में उनके विरुद्ध यही सब कूड़े पढ़ाए जा रहें हैं। इतिहास के नाम पर। रोमिला थापर इसमें सबसे प्रबल हैं जो यह कार्य की हैं।
उनकी मूर्ख श्रेष्ट बोधता भी एक कारण है।
आर्थिक इतिहास के बोध की कमी।
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