एक आधे अधूरे उजबक अपरिचित वामपंथी ने फेसबुक पर बेबजह मेरी एक पोस्ट पर लिखा- "तुम्हारे बाप भी वामपंथ को खत्म नही कर सकते।
आप सभी को साक्षी मानकर निम्नलिखित पंक्तियों के माध्यम से मैं अपने उस वामपंथी मित्र को कहता हूँ कि सनातन संस्कृति और सनातन धर्म को बर्बाद करने के लिए विगत एक हजार साल तक लाखों बर्बर विदेशी हमलावरों ने मार काट मचाई। लेकिन वे सभी कमीने दोजख की आग में जल रहे होंगे। इधर धरती पर फलता फूलता सनातन धर्म अपने अतीत के बलिदानों की गाथा सुना रहा है।
आजादी के बाद भारत में सनातन हिंदू धर्म को नष्ट करने के लिए वामपंथ ने भी खूब एड़ी- चोटी का जोर लगाया। घोर नास्तिक पैरियार का पिछवाड़ा धोने वाले DMK को छोड़कर वामपंथ ने कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों को पहले नास्तिकता का पाठ पढाया, फिर भाजपा विरोधी सभी दलों को सनातन बिरोधी बना डाला। इस तरह तमाम विपक्ष को श्रीराम बिरोधी बनाकर मंदिरों का बिरोध किया और संपूर्ण विपक्ष को हिंदू समाज की नजरों से गिराकर सत्ता से बाहर करवा दिया। वामपंथ ने यह सब इसलिए किया ताकि भाजपा के सामने केवल वामपंथ ही मैदान में रहे। और एक दिन "लाल किले पर लाल निशान " का सपना पूरा कर सकें। गैरभाजपा
ऐंसा सपना देखना कतई गलत नहीं,जैसा कि मार्क्स ने कहा था कि "मजहब अफीम है,उसे मिटाकर ही सर्वहारा क्रांति हो सकती है। " किंतु मार्क्स ने न तो सत्य सनातन धर्म पर कुछ लिखा और न कहा, फिर भी तमाम मूर्ख भारतीय कम्युनिस्ट नेता मजहबी आतंकवाद और मजहबों को तो खाद पानी देते रहे तथा सनातन हिंदू धर्म की जड़ों में मठ्ठा डालते रहे। धिक्कार है! छि:
फेसबुक पर मेरे बाप को याद करने वाले उस बिगडैल बैल को मालूम हो कि:-
" 45 साल तक मैंने भी यही पाप किया है! मेरे हाथों ने लाल झंडा थामें रखा, गनीमत है कि मैं कट्टर बामपंथी होकर भी सनातन का और पूंजीवाद का कुछ नहीं उखाड़ पाया। इसीलिए अंग्रेजी कहावत पर अमल कर चला
" If you can't defeat, then you join them."
इसलिए छोड़ दिया मैने सीपीएम को और थाम लिया सनातन का भगवा झंडा! अब जिससे जो बने सो उखाड़ लो। और हाँ मेरे बाप की जिसे ज्यादा याद आ रही हो और उनसे मिलने की तमन्ना रखता हो तो उसे परलोक जाना पड़ेगा।जहाँ वे 38 साल से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं।भगवान् से निवेदन है कि जल्दी ही तुम्हारी इच्छा पूर्ण करें।
जय श्रीराम
जय सनातन
वंदेमातरम 


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