संसद में राहुल गाँधी,अखिलेश यादव और अधिकांश विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार UGC rollback को तैयार है। और कांग्रेस ऐसा होने नहीं देगी। इस आरोप के जबाब में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा हम UGC वापस नहीं लैंगे और न कांग्रेस को SC/ST/OBC के खिलाफ सवर्णों को लामबद्ध करने दैंगे।
इस आरोप प्रत्यारोप का अभिप्राय क्या है? सभी सवर्ण जन ध्यान दीजिये! जो ब्राह्मण हैं, क्षत्रिय वैश्य हैं वे शायद इस मुगालते में हैं कि भाजपा तो अब SC/ST/OBC के लिए पूरी तरह समर्पित हो चुकी है,अत : क्यों न हम सवर्ण जन कांग्रेस/ सपा और अन्य विपक्षी दलों को आजमाएं ? गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हम ST/SC /OBC पर किसी तरह जुल्म ज्यादती नहीं होने देंगे।
सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों द्वारा संसद में की गई इस बयानबाजी का मतलब क्या है? मतलब सवर्णों को समझना होगा कि UGC को हल्के में न लें। सभी राजनैतिक दल और नेता सवर्णों के वोट तो चाहते हैं,लेकिन सवर्णों पर हो रहे अमानवीय हमलों को रोकने की मंशा किसी की नहीं है।
अब तमाम सवर्णों को चाहिए की अपनी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम खुद करें। या तो बहिन मायावती से बात करो, वे ही सवर्णों को सुरक्षा की गारंटी दे सकती हैं।बाकी किसी भी पार्टी को वोट देने का मतलब है खत्म हो जाने के लिए विनाश को निमंत्रण देना!
दूसरी तरफ नोटा की व्यवस्था नकारात्मक तरफदारी करने जैसा है अर्थात संघर्ष से दूर भागने जैसा है । कृपया नोटा की पैरवी कतई न करें ! इससे बेहतर है कि बहिन जी को एक मौका देना अथवा अपनों (संघ परिवार) के राजनैतिक खेल का खिलौना बनते रहना।अर्थात आरक्षण की बैशाखी पर भारत राष्ट्र के विकास के सपने देखना और जातीयता की वैशाखी के हाथों सवर्ण इंसान की काबिलियत का बेमौत मर जाना। 
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें