- भृष्टाचार से लबालब ,मध्यप्रदेश भरपूर।
- लोकायुक्त की शक्ल भी,उनको नामंजूर।।
- नौकरशाही भृष्टतम,मध्यप्रदेश की आज।
- कार्यवाही कीअनुमति,देते नही शिवराज।।
- नमो-नमो सारे कहें,शिव-शिव कहे न कोय।
- जोवंदा शिव-शिव कहे,व्यापमकांडमें रोय।।
- बिल्डर माफिया हो गया,अरबपति धनवान।
- खनन माफिया ले रहा, निर्दोषों की जान!!
- मंत्री-अफसर कर रहे , सत्ता का दुरूपयोग।
- अच्छे दिन कब आयंगे,पूंछ रहे हैं लोग।।
- श्रीराम तिवारी
बुधवार, 4 जुलाई 2018
अच्छे दिन कब आयंगे,पूंछ रहे हैं लोग।।
द्वंदात्मक भौतिकवादी द्रष्टिकोंण
- वाद,प्रतिवाद और संवाद:-द्वंदात्मक भौतिकवादी द्रष्टिकोंण :हीगल के द्वंद्ववादी भाववादी विकास के अनुसार किसी द्रश्य,ध्वनि या अहसास से सर्वप्रथम मूलतः एक विचार प्रकट होता है,वह -वाद होता है।उस विचार के विरोध में एक दूसरा विचार आता है,वह- प्रतिवाद होता है।इस प्रतिवाद का भी विरोधी विचार आता है जिसमे वाद और प्रतिवाद दोनों के सकारात्मक गुण होते है,यह,,संवाद,,होता है।इसके आगे वह संवाद ही वाद बन जाता है!और फिर वाद ,प्रतिवाद,संवाद की अनंत कड़ियां बनती जुडती चली जाती हैं।और इस तरह सत्य क...ा विस्तार होता चला जाता है।यह प्रक्रिया न चक्रीयहै न सीधीहै अपितु सर्पीली या टेढ़े मेढ़े रास्ते से आगे बढ़ती है।मार्क्स के द्वंद्ववादी भौतिक वादी विकास मे भी यही तीन दशाएं होती हैं,किंतु उसका मूल 'विचार' नहीं है !वह पदार्थ या वस्तु या द्रव्य या ऊर्जा के नाम से भी जाना जाता है।यह वह सब है जो हमारे मन के बाहर स्वतन्त्र होकर भी हमारे मन को संवेदित करता है।वह कोई रंग शब्द या समाज की यथार्थ स्थिति भी हो सकती है।उदाहरण के लिए,,,गेहूं का दाना 'वाद' है।वह स्वयं को समाप्त कर पौधे को जन्म देता है।यह प्रतिवाद है।पौधा स्वयम को समाप्त कर अनेक दानों को जन्म देता है।यह संवाद है।फिर वे दाने वही क्रिया करते हैं और पहले से बहुत अधिक दाने पैदा करते हैं।यह अनंत विकास की संभावनाएं रखता है।यह दानों के मात्रात्मक और गुणात्मक विकास की गत्यात्मकता में द्वंद्वात्मक अध्ययन भी है।
शुक्रवार, 29 जून 2018
खेतो में भी cc tv कैमरे लगाकर तो देखो !
- ना मस्जिद की बात हो,न शिवालों की बात हो,*
*जो बेरोज़गार हैं पहले उनंके निवालों की बात हो.*
*मेरी नींद को दिक्कत, ना भजन से.है ना अज़ान से है,*
*मेरी नींद को दिक्कत, खुदकुशी करते किसान से है*
*किसी के बुझते चूल्हे को पुनह सुलगाकर देखो।*...
*किसी के पांव के छालों पर दवा लगाकर देखो।।*
*मजदूरों-किसानों की मेहनत पर गुलछर्रे उडानेवालों*
*समझ में आ जाएगा मूल्य श्रम का और फसलो का*
*जरा कभी खेतो में भी cc tv कैमरे लगाकर तो देखो *
फर्क न रहा जहाँ नीति -अनीति का.....!
- घर से तो निकले थे सारी खुशियाँ जुटाने,
लम्हा लम्हा उदास वीराने में आ गए हम।
होगा कबीलों में कभी जंगल का क़ानून, - किंतु उसी के मुहाने पर फिर आ गए हम।।
हांकते हैं कारवाँ सत्ता के प्यादे जिस दौरमें, - उस पतनशील दौर की जद में आ गए हम।
स्वार्थमें फर्क न रहा जहाँ नीति -अनीति का, - खरामाखरामा वो गली वो शहरआगए हम!!
- लगती रही हैं दाँवपर हमेशा जिधर पांचाली ,
- जाने कब दुर्योधन के उस शहर आ गए हम ।
- चर्चा नहीं किसी जनसंघर्ष क्रांति की जहां,
- ऐंसी बेजान महफ़िल में क्यों आ गए हम।।
और बोलो हर हर मोदी,,,,,,!
- 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान बाबा रामदेव, अण्णा हजारे,मोदीजी,केजरीवाल और संघ ब्रिगेड ने शिद्दत से यह प्रचारित किया था कि स्विस बैंकों में 4 लाख करोड़ रुपये काला धन जमा है! ये वही रकम है जिस मद में से 15-15 लाख जन घन खातों में जमा होने थे! वो सब तो जुमलेबाजी ही सावित हुआ किंतु ताजा खबर है कि यह आंकड़ा कपोल कल्पित था ! कुल रकम 7 हजार करोड़ ही जमा है!और इस रकम का आधा,याने साढे तीन करोड़ रु.विगत 3 साल में याने मोदीजी के राज में ही जमा किया गया है! मोदीजी की ताजपोशी से देश के गद्दारों को यह लाभ हुआ कि चार सालों में काली रकम डबल हो गई है!और बोलो हर हर मोदी! झूठों ने लोकतंत्र की खूब जड खोदी!कालेधन और स्पेक्ट्रम संबंधी झूंठे दुष्प्रचार का लाभ भाजपा को या 'आप' जैसे गैर जिम्मेदारों को हुआ! उम्मीद है कि बेचारे सीधे सरल डा. मनमोहनसिंह को झूंठमूंठ बदनाम करने वालों को देश की जनता एक दिन उनके गुनाहों की सजा जरूर देगी!
जनता की शामत आयेगी....!
- चालचरित्र चेहरे की कालिख,क्या साबुन से धुल पाएगी,
बड़बोले बकरों की अम्मा,कब तक खैर मनाएगी ?
खरदूषण निशिचर भगनी हों,राक्षस कुल की सूर्पनखायें ,
लोकतंत्र की पंचवटी में,अब मृगया काम न आयगी ।
छद्मवेश सत्ताधारी समझेंगे कब अपनी जन वैदेही को,
तनी हुई ये भृकुटि काल की,क्या लंकाकाण्ड करायेगी?
पूंजीवाद और धर्मान्धता दोनों हैं कुम्भकरण रावण जैसे ,
यदि अच्छे दिन आये इनके,तो जनता की शामत आयेगी! - जनता की शामत आयेगी....!
श्रीराम तिवारी
गुरुवार, 28 जून 2018
Modi ji ke 15 lakh,,,,!
- मरणासन्न पिता के पास दो भाई और एक बहन बैठी थी!
- पिता ने कहा- "मैंने जिनसे उधार लिया था, सबको चुका दिया है। जिनसे पैसे वापस लेने थे, उनसे ले भी चुका हूँ। सिर्फ एक जगह बड़ी रकम फंसी है। तुमलोग वसूल सको, तो आपस में बांट लेना।"
- तीनों संतान एक साथ बोली- "जी बाबूजी, जैसी आपकी आज्ञा। किससे कितने पैसे लेने हैं?"
- ...
- पिताजी बोले- "पता नहीं कब मेरे प्राण निकल जाएं, इसलिए मैंने घर के नीचे वाले कमरे की अलमारी में एक खत लिख कर रखा है। मेरी मृत्यु के बाद देख लेना।"
- थोड़ी देर बाद पिताजी ने अंतिम सांस ली। सब काम निपटाने के बाद बच्चों ने घर के कमरे में रखा खत निकाला। लिखा था-
- "2014 में मोदी ने 15 लाख देने का वादा किया था। मेरे हिस्से के रुपये मिल जाऐं तो तुम तीनों पांच-पांच लाख बांट लेना!"
# हरि ओम् #नमो नमो #
पांच वरदान !
- यदि अचानक कभी किसी दैवी शक्ति से अर्थात ब्रह्मतत्व से आपका भी युधिष्ठिर की तरह साक्षात्कार हो जाए,और वो पराशक्ति आपसे पांच मन वांछित वरदान मॉंगने को कहे,तो आप क्या वरदान मांगेंगे ?
- आपकी सुविधा के लिए बतौर उदाहरण मैं यहाँ अपनी च्वाइस बता देता हूँ !
- पहला वर :-हे प्रभु ! यदि बाकई पुनर्जन्म होता है,तो मेरा हर जन्म भारत भूमिपर ही हो!जिस घर में जन्म हो वहाँ विवेकानंद, भगतसिंह ,चेगुवेरा,मुस्तफा कमाल अतातुर्क के विचारोंऔरआदर्शों का सम्मान होता हो!
- ...
- दूसरा वर :-जो लोग भारत में पैदा हुए,यहाँ की खाते हैं,यही जिनकी मातृभूमि है ,वे सभी अपने धर्म,मजहब और जाति से ऊपर उठकर भारत देश को ही अव्वल माने !प्रभु !
- तीसरा वर :-जो दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी तत्व सत्ता में आकर पूँजीपतियों की चरण वंदना करते हैं,मजदूरों,किसानों और वामपंथ को गाली देते हैं,उन्हें थोडी सद्बुद्धि देना प्रभु !
- चौथा वर :-जो लोग भारतभूमि पर हिंदू, सिख,जैन,बौद्ध,ईसाई और मुसलमानों को बरगलाते हैं ,जातिवाद के नाम पर सत्ता हथियाते हैं, देश भक्ति के नाम पर विपक्ष को खत्म करने के सपने देखते हैं,उन दुष्टों का सत्यानाश हो प्रभु !
- पाँचवाँ वर :-जो लोग स्वयंभू देशभक्त हैं ,वे भारत के दलितों,कम्युनिस्टों, मुसलमानों पर अनावश्यक संदेह न करें हैं,उन्हें आतंकी न समझें,हे ईश्वर उन्हें सही दॄष्टि प्रदान करो !
पापी पेटका ही सवाल है!
चूंकि प्रतिक्रियावाद और साम्प्रदायिकता इस देश के आधुनिक पूँजीपतियों की जुडवा पसंद हैं, इसलिए अधिकांस न्यूज चैनल या तो मंदिर मंदिर चिल्ला रहे हैं या मोदी मोदी रटते रहते हैं! उनके पास वे ही सूचनायें हैं जो गोदी मीडिया उपलब्ध कराता है! और वे वही बोलते हैं जो उनके आका बुलवाते हैं! क्योंकि इधर भी पापी पेटका ही सवाल है!
अंबानी,अडानी के उपकार मोदीजी भला कैसे भूल सकते हैं?उन्ही के दम पर तो उन्होंने पहले अपने गुरूवर आडवानी जैसे दिग्गजों को और बाद में कांग्रेस सहित पूरे देश को पछाड़ा है! अब तो झक मारकर वही करना पड़ेगा जो धन्ना सेठ और बाबा लोग कहेंगे !
अंबानी,अडानी के उपकार मोदीजी भला कैसे भूल सकते हैं?उन्ही के दम पर तो उन्होंने पहले अपने गुरूवर आडवानी जैसे दिग्गजों को और बाद में कांग्रेस सहित पूरे देश को पछाड़ा है! अब तो झक मारकर वही करना पड़ेगा जो धन्ना सेठ और बाबा लोग कहेंगे !
पाकिस्तान कोई बालू की लकीर नही है!
भारत -पाकिस्तान के कुछ मूर्ख लोग शगूफा छोड़ रहे हैं कि 2019 में यदि मोदी जी फिर से जीत गये तो पाकिस्तान खत्म हो जायेगा!वेशक भारतीय आवाम मोदी और भाजपा से बेहद नाराज है,किंतु भाजपा को हरा पाने की विपक्ष की ही अभी कोई तैयारी नही है! माया,ममता,शिवसेना और आप जैसे क्षेत्रीय दल जबतक कांग्रेसऔर वामपंथ से दूरी नही मिटाते तब तक भाजपा की बल्ले बल्ले है! इसलिये मोदी और भाजपा को सीटें भले ही कम मिलें,किंतु 2019 में सरकार एन डी ए की ही बनेगी!जहां तक पाकिस्तान का प्रश्न है तो वह कोई बालू की लकीर नही है कि हवा के झोंके से मिट जायेगा! वहां भी तो मजदूर हैं, दलित-अल्पसंख्यक हैं,वामपंथी हैं और भारत से दोस्ती चाहने वाले लाखों हैं! यदि पाकिस्तान के खिलाफ जंग लडने का किसी को शौक है तो खुद जाकर लड़ मरे! भारत पाकिस्तान को जंग में धकेलकर पूरे दक्षेस को बर्बाद करने का मंत्र जपने वाले सावधान -'नमो नमो' सिर्फ मन में ही जपा करो! पालिटिक्स में 'नमो नमो'मत पढ़ो!
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