बुधवार, 23 अक्टूबर 2024

पता करो -आखिर गड़बड़ी कहाँ है ?*

 पता करो -आखिर गड़बड़ी कहाँ है ?*

*एक बहुत ब्रिलियंट लड़का था। सारी जिंदगी फर्स्ट आया। साइंस में हमेशा 100% स्कोर किया। अब ऐसे लड़के आम तौर पर इंजिनियर बनने चले जाते हैं, सो उसका भी सिलेक्शन IIT चेन्नई में हो गया।* *वहां से B Tech किया और वहां से आगे पढने अमेरिका चला गया और यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफ़ोर्निया से MBA किया।*
*अब इतना पढने के बाद तो वहां अच्छी नौकरी मिल ही जाती है। उसने वहां भी हमेशा टॉप ही किया। वहीं नौकरी करने लगा। 5 बेडरूम का घर रउसके पास। शादी यहाँ चेन्नई की ही एक बेहद* *खूबसूरत लड़की से हुई।*
*एक आदमी और क्या मांग सकता है अपने जीवन में ? पढ़ लिख के इंजिनियर बन गए,* *अमेरिका में सेटल हो गए, मोटी तनख्वाह की नौकरी, बीवी बच्चे, सुख ही सुख।*
*लेकिन दुर्भाग्यवश 7 साल पहले उसने वहीं अमेरिका में, सपरिवार आत्महत्या कर ली!अपनी पत्नी और बच्चों को गोली मार कर खुद को भी गोली मार ली। What went wrong? आखिर ऐसा क्या हुआ, गड़बड़ कहाँ हुई।*
*ये कदम उठाने से पहले उसने बाकायदा अपनी wife से discuss किया,फिर एक लम्बा suicide नोट लिखा और उसमें बाकायदा अपने इस कदम को* *justify किया और यहाँ तक लिखा कि यही सबसे श्रेष्ठ रास्ता था इन* *परिस्थितयों में।उनके इस केस को और उस suicide नोट को California Institute of Clinical* *Psychology ने ‘What went wrong'?
जानने के लिए study किया।*
*पहले कारण क्या था, suicide नोट से और मित्रों से पता किया। अमेरिका की आर्थिक मंदी में उसकी नौकरी चली गयी। बहुत दिन खाली बैठे रहे। नौकरियां ढूंढते रहे। फिर अपनी तनख्वाह कम करते गए और फिर भी जब नौकरी न मिली, मकान की किश्त जब टूट गयी, तो सड़क पर आने की नौबत आ गयी। कुछ दिन किसी पेट्रोल पम्प पर तेल भरा बताते हैं। साल भर ये सब बर्दाश्त किया और फिर पति पत्नी ने अंत में ख़ुदकुशी कर ली...*
*इस case study को ऐसे conclude किया है experts ने :This man was* *programmed for success but he was not trained, how to handle* *failure.यह व्यक्ति* *सफलता के लिए तो तैयार था,पर इसे जीवन में ये नहीं सिखाया गया कि असफलता का* *सामना कैसे किया जाए।*
*अब उसके जीवन पर शुरू से नज़र डालते हैं। पढने में बहुत तेज़ था, हमेशा फर्स्ट ही आया। ऐसे बहुत से Parents को मैं जानता हूँ जो यही चाहते हैं कि बस उनका बच्चा हमेशा फर्स्ट ही आये, कोई गलती न हो उस से। गलती करना तो यूँ मानो कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया और इसके लिए वो सब कुछ करते हैं, हमेशा फर्स्ट आने के लिए। फिर ऐसे बच्चे चूंकि पढ़ाकू कुछ ज्यादा होते हैं सो खेल कूद, घूमना फिरना, लड़ाई झगडा, मार पीट, ऐसे पंगों का मौका कम मिलता है बेचारों को, 12th कर के निकले तो इंजीनियरिंग कॉलेज का बोझ लद गया बेचारे पर, वहां से निकले तो MBA और अभी पढ़ ही रहे थे की मोटी तनख्वाह की नौकरी। .
अब मोटी तनख्वाह तो बड़ी जिम्मेवारी, यानी बड़े बड़े targets*
*कमबख्त ये दुनिया, बड़ी कठोर है और ये ज़िदगी,अलग से इम्तहान लेती है।* *आपकी कॉलेज की डिग्री और मार्कशीट से कोई मतलब नहीं उसे।* *वहां कितने नंबर लिए कोई फर्क नहीं पड़ता। ये ज़िदगी अपना अलग question paper सेट करती है। और सवाल, सब out ऑफ़ syllabus होते हैं, टेढ़े मेढ़े, ऊट पटाँग और रोज़ इम्तहान लेती है। कोई डेट sheet नहीं।*
*एक अंग्रेजी उपन्यास में एक किस्सा पढ़ा था। एक मेमना अपनी माँ से दूर निकल गया। आगे जा कर पहले तो भैंसों के झुण्ड से घिर गया। उनके पैरों तले कुचले जाने से बचा किसी तरह। अभी थोडा ही आगे बढ़ा था कि एक सियार उसकी तरफ झपटा। किसी तरह झाड़ियों में घुस के जान बचाई तो सामने से भेड़िये आते दिखे। बहुत देर वहीं झाड़ियों में दुबका रहा, किसी तरह माँ के पास वापस पहुंचा तो बोला, माँ, वहां तो बहुत खतरनाक जंगल है*
*इस खतरनाक जंगल में जिंदा बचे रहने की ट्रेनिंग बच्चों को अवश्य दीजिये।*
**विशेष -*बच्चों को बस किताबी कीडा मत बनाईये, बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ धार्मिक, समाजिक व संस्कार भी देना जरूरी है, हर परिस्थिति को ख़ुशी ख़ुशी धैर्य के साथ झेलने की क्षमता और उससे उबरने का ज्ञान और विवेक बच्चों में होना ज़रूरी है।*
*Don't make them machine with brain rather humans with emotions and feelings*
किसी पाश्चात्य दार्शनिक ने फरमाया है कि *बच्चे हमारे है, जान से प्यारे है।*
अर्थात बच्चों को सिर्फ पढ़ाना लिखाना ही पैरेंट्स का कर्तव्य नही है बल्कि उन्हें मॉरल वैुल्यूज और संवेदनाओं के स्तर पर भी बेहतर ढंग से विकसित किया जाना चाहिए! 20 -25 साल की उम्र तक यदि शारीरिक विकास > मानसिक विकास>आर्थिक विकास और आध्यात्मिकंंंंंंंं विकास में से कोई एक भी अधूरा रह गया,तो वह आजीवन अधूरा ही रहेगा, भले ही वह प्रधानमंत्री बन जाये या बिल गैट्स,अंबानी अडानी की तरह टॉप पूंजीपति !
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उल्हास दिनकर रानडे रानडे

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

हमें ये सीख मिल गई कि

  अल्लाह के नाम पर “

ट्रेन से यात्रा करते समय एक भिखारी मेरे मित्र के पास आया और बोला.... "अल्लाह के नाम पर कुछ दे दो बाबा"
मित्र ने नजर उठा कर निर्विकार भाव से उसे देखा और बोला .... "मैं अल्लाह को नहीं मानता" तो क्यों दे दूँ ?
उसने घुरकर मेरे मित्र को देखा.. तो....उसके बाद मित्र ने उसे प्रस्ताव दिया कि....
तुम "भगवान राम" के नाम पर मांगो तो मैं तुम्हें 10 रुपया दूँगा!
इस पर वो मेरे मित्र का मुँह ताकने लगा और ट्रेन के आसपास के लोग भी कौतूहल से हमें देखने लगे.
फिर, मित्र ने अपने प्रस्ताव को और अधिक आकर्षक बनाते हुए कहा कि.... अगर वो भगवान राम के नाम पर मांगेगा तो मैं उसे "50 रुपया" दूँगा.
लेकिन, वो भिखारी इसके लिए तैयार नहीं हुआ और भुनभुनाते हुए चला गया
और, मेरा मित्र भी मन ही मन "उसकी कट्टरता को भांपकर, पेपर पढ़ने लगा.
लेकिन, इस घटना से हमें ये सीख मिल गई कि....
एक भिखारी जिसके पास खाने को कुछ नहीं है और भीख मांगकर अपना जीवन-यापन करता है, वो भी
"धन के कारण, अपने धर्म से समझौता"
नहीं करता है !
तो क्या हम हिन्दू एक भिखारी से भी ज्यादा गए-बीते हैं ?
.... जो अपने निजी स्वार्थ (धन अथवा पद) की लालच में अपने धर्म से गद्दारी करने व सेक्यूलर बनने को हमेशा एक पैर पर खड़े रहते हैं !
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Akshat Tiwari, Mukesh Choubey Mahabali and 10 others

उन्हें देश की सुरक्षा,संप्रभुता,अखंडता की चिंता है !

 भारत की उच्च मध्यम वर्गीय युवा पीढ़ी पर्याप्त एडवांस और स्मार्ट है, उसे मेंहगाई, बेरोजगारी और रुपये के अवमूल्यन की फिक्र नहीं ! इस पीढ़ी में जो योग्य हैं, वे पद प्रतिष्ठा, धन मान अर्जित कर लेते हैं! अमेरिका, इंग्लैंड एडवांस मुल्कों और वे मल्टीनेशनल कंपनियों में छा रहे हैं !

किंतु निम्न वर्ग के जो अर्ध शिक्षित बेरोजगार हैं, अधुनातन तकनीकी में अकुशल हैं, उनमें से कुछ वे अपराध जगत ज्वाइन कर लेते हैं! कदाचित मोदीयुगीन भारत में भूखा कोई नही रहता !जगह जगह लंगर भंडारे चलते रहते हैं । तथाकथित 80 करोड़ *गरीब*मुफ्त का मलीदा जीम रहे हैं! यह सर्वहारा के शोषण और शोषित समाज वाले भारत में 'वर्ग संघर्ष'को भोंथरा कर रहे हैं ! अब LPG/PPP और वैश्विक अस्थिरता के दौर में चारों तरफ बाजारबाद फैल चुका है! आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( AI) के अवतरण से मेहनतकश जनता के हाथों का काम छिन जाने का खतरा मंडरा रहा है।
बहरहाल भारत की आधी आबादी आरक्षण के मजे ले रही है! आधी आबादी जो भाजपा के साथ है, भले ही इस कतार में नंगें भूखे हों किन्तु उनके लिये रोटी कपड़ा मकान महत्वपूर्ण नही,बल्कि उन्हें देश की सुरक्षा,संप्रभुता,अखंडता की चिंता है ! आधुनिक नव बुद्धिजीवियों को अहिंसा धर्म निरपेक्षता सदाचार पर अवलंबित हिंदुओं की फिक्र होने लगी है!
अपनी मौत से कुछ दिन पहले सुप्रसिद्घ लेखक और वामपंथी विचारक डॉ नामवरसिंह ने माननीय प्रधानमंत्री मोदीजी और गृहमंत्री श्री राजनाथसिंह से अपनी इस आत्म वेदना का इजहार किया था! कश्मीरी हिंदुओं और बांग्लादेश या पाकिस्तान में हिंदुओं के खात्मे से न केवल दक्षिणपंथी हिंदू बल्कि धर्मनिरपेक्ष वामपंथी भी बिचलित हैं!

रतन टाटा जी को हमारी श्रद्धांजलि।

 रतन टाटा जी के निधन की खबर सुनकर बहुत दुःख हुआ। वह एक महान उद्योगपति और समाज सेवी थे, जिन्होंने टाटा समूह को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका जीवन और कार्यकाल बहुत प्रेरणादायक था ¹।

रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने कॉर्नेल विश्वविद्यालय और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। वह 1991 में टाटा संस के अध्यक्ष बने और 21 वर्षों तक इस पद पर रहे। उनके नेतृत्व में टाटा समूह का राजस्व 40 गुना से अधिक बढ़ गया और लाभ 50 गुना से अधिक बढ़ गया ¹।
उन्होंने कई समाज सेवी कार्य भी किए, जैसे कि शिक्षा, चिकित्सा और ग्रामीण विकास में योगदान देना। उन्हें पद्म विभूषण और पद्म भूषण जैसे सम्मान भी मिले ¹।
रतन टाटा जी को हमारी श्रद्धांजलि। उनकी आत्मा को शांति मिले।
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Anamika Tiwari, Narendrakumar Dixit and 18 others

अपना परिचय दो।

 कालिदास बोले :- माते!पानी पिला दीजिए, बड़ा पुण्य होगा.

स्त्री बोली :- बेटा मैं तुम्हें जानती नहीं. अपना परिचय दो।
मैं अवश्य पानी पिला दूंगी।
कालिदास ने कहा :- मैं पथिक हूँ, कृपया पानी पिला दें।
स्त्री बोली :- तुम पथिक कैसे हो सकते हो, पथिक तो केवल दो ही हैं सूर्य व चन्द्रमा, जो कभी रुकते नहीं हमेशा चलते रहते। तुम इनमें से कौन हो सत्य बताओ।
कालिदास ने कहा :- मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दें।
स्त्री बोली :- तुम मेहमान कैसे हो सकते हो ? संसार में दो ही मेहमान हैं।
पहला धन और दूसरा यौवन। इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ कौन हो तुम ?
.
(अब तक के सारे तर्क से पराजित हताश तो हो ही चुके थे)
कालिदास बोले :- मैं सहनशील हूं। अब आप पानी पिला दें।
स्त्री ने कहा :- नहीं, सहनशील तो दो ही हैं। पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है। उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है, दूसरे पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं। सच बताओ तुम कौन हो ?
(कालिदास लगभग मूर्च्छा की स्थिति में आ गए और तर्क-वितर्क से झल्लाकर बोले)
कालिदास बोले :- मैं हठी हूँ ।
.
स्त्री बोली :- फिर असत्य. हठी तो दो ही हैं- पहला नख और दूसरे केश, कितना भी काटो बार-बार निकल आते हैं। सत्य कहें ब्राह्मण कौन हैं आप ?
(पूरी तरह अपमानित और पराजित हो चुके थे)
कालिदास ने कहा :- फिर तो मैं मूर्ख ही हूँ ।
.
स्त्री ने कहा :- नहीं तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो।
मूर्ख दो ही हैं। पहला राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है, और दूसरा दरबारी पंडित जो राजा को प्रसन्न करने के लिए ग़लत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।
(कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे)
वृद्धा ने कहा :- उठो वत्स ! (आवाज़ सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां खड़ी थी, कालिदास पुनः नतमस्तक हो गए)
माता ने कहा :- शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार । तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग करना पड़ा।
.
कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े।
शिक्षा :-
विद्वत्ता पर कभी घमण्ड न करें, यही घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है।
दो चीजों को कभी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए.....
अन्न के कण को
"और"

भारतीय संप्रदायों की गौरवमयी कहानी!

 एक प्रश्न यह उठता है कि भारतीय उपमहाद्वीप में जब इतने संप्रदाय थे। शिव, शक्ति, विष्णु, सूर्य गणेश इत्यादि सब की उपासना अलग-अलग होती थी, तो फिर आज सभी देवी देवता एक ही मंदिर में विराजमान क्यों दिखते हैं? इसका श्रेय जाता है, आदि शंकराचार्य को और उनके अद्वैतवाद को।

इसीलिए आज का हिंदुत्व अथवा सनातन धर्म उन्हीं को समर्पित है। इसमें किसी भी संप्रदाय के लिए पराये पन का कोई भाव नहीं है। आदि गुरु शंकराचार्य जी ने अद्वैत वेदांत से यात्रा आरंभ की थी। रामानुज,मध्वाचार्य,रामानंद,महर्षि अरविंद , रमण महर्षि और स्वामी विवेकानंद ने उस दर्शन को समृद्ध कर आज के हिंदुत्व याने सत्य सनातन धर्म (नव्य वेदांत) को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सभी भारतीय संप्रदायों की गौरवमयी कहानी में आज जानिए अद्वैत संप्रदाय की संपूर्ण गाथा जो कि एक पूर्ण संप्रदाय है और आज का सनातन धर्म इसी पर आधारित है।#PMNarendraModi