शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

आस्तिक दर्शनों में सब कुछ ईश्वर पर आश्रित है !

 सत्य सिर्फ वह नही है,जो हम देखते हैं, जो हम मानते हैं! गोकि अस्तित्व के विस्तार ने सत्य का ठेका किसी एक को नही दिया है ! जिस तरह कोई पक्षी कभी इस पेड़ पर कभी उस पेड़ पर,कभी इस डाल पर, कभी उस डाल पर बैठ जाता है, इसी तरह मानव इतिहास में सत्य रूपी पक्षी कभी *भारतीय आस्तिक दर्शन रूपी वटवृक्ष* पर कभी नास्तिक चार्वाकीय कटीली झाड़ियों पर और कभी अनीश्वरवादी सांख्य,योग, श्रमण दर्शनों की भदेश किंतु मजबूत शाखाओं पर विश्राम करता रहा,विहार करता रहा!

ऐंसा भी नही है कि सत्य का ठेका सिर्फ भारतीय दर्शनों की बपौती रहा हो! दरसल मार्क्स के भौतिकवादी दर्शन को छोड़कर दुनिया के बाकी सभी दर्शन ईश्वरीय सत्ता को स्वीकार करते हैं! इसीलिये जिन आस्तिक दर्शनों में प्रभू की मर्जी के बिना पत्ता नही डुलता,वे तमाम वैज्ञानिक आविष्कारों और लोकतंत्रात्मक विकास में फिसड्डी रहे! क्योंकि आस्तिक दर्शनों में सब कुछ ईश्वर पर आश्रित है !
जबकि यूनानी और परिवर्ती हीगेलियन इत्यादि पाश्चात्य दर्शनों का मनुष्य या तो ईश्वर से स्वतंत्र रहा है या मानव को समाज के अमानवीय बंधनों से छुटकारा पाना था!इसी बजह से सुकरात,प्लेटो,अरस्तु, एपिक्युरस,यूक्लिड पाइथागोरस,गेलीलियो कोपरनिक्स,नीत्से,फ्रांसीसी क्रांति के जनक रूसो और ग्रेट ब्रिटेन के मेग्नाकार्टा बनाने वालों को किसी गॉड, ईश्वर या उसके ऐजेंट्स पोप की मदद का इंतजार नही करना पड़ा!
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मन नाम की कोई (सत्य) वस्तु नही है!

 "मानसं तु किं मार्गणे कृते,नैव मानसं मार्ग आर्जबात !

वृत्तयस्त्वहं वृत्तिमाश्रिता:वृत्तयो मनो विद्धयहं मन:!!"
अर्थ:-यह मन क्या है? इस प्रकार विचार करने पर यह ज्ञात होता है कि मन नाम की कोई (सत्य) वस्तु नही है! केवल वृत्तियों का प्रवाह ही मन है! सारी वृत्तियां एक अहंवृत्ति पर आश्रित होती हैं,इसलिये इस अहं वृत्ति को ही *मन* जानों!
:-महर्षि अरविंद : भाष्य ( कठोपनिषद आधारित

चित्त में सत्य की ही बोनी करनी चाहिए। क्यों कि*मन से ज्यादा उपजाऊ और कुछ नहीं है! यहां जो कुछ बोया जाए,वो बढ़ता जरूर है!फिर चाहे वो बैर हो,प्रीत हो या सुंदर सार्थक विचार हो!"
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All reactजिन कारणों से मनुष्य स्वार्थी हुआ और प्रकृति का बिनाशक बना, जिन आविष्कारों से प्राणिमात्र के अस्तित्व को खतरा हुआ,जिन वीभत्स वैज्ञानिक अनुसंधानों से धरती की जीवन्तता को खतरा बढ़ा, जिन-जिन कारणों से जल-जंगल -जमीन का क्षरण हुआ,जिन कारणों से सामाजिक विषमता और निर्धनता बढ़ी, जिन कारणों से एक ताकतवर -बदमाश व्यक्ति दूसरे कमजोर और सचरित्र मनुष्य का शोषण-उत्पीड़न करता है,जिन कारणों से इस दुनिया में महायुद्ध और तथाकथित धर्मयुध्द लड़े जाते रहे हैं,जिस वजह से भाई-भाई में भी बैरभाव उत्पन्न हो जाता है ,उसे सनातन परंपरा में नरक का द्वार याने लोभ -लालच,अज्ञान और भोगलिप्सा कहते हैं!
पाश्चात्य अकादमिक विद्वान लोग इसे विज्ञान का क्रमिक विकास कहते हैं, जबकि प्रकृति प्रेमी और सनातन धर्म मानने वाले लोग इसे विनाश कहते हैं।जय हिन्द,जय भारत, जय जगत!

सोमवार, 30 सितंबर 2024

 हिंदुत्व की महिमा और मंदिरों की गरिमा पुन: स्थापित करने के संघर्ष की बदोलत भाजपा ने विगत हर चुनाव में खूब वोट हासिल किये!किंतु जब मंदिर बन गया तब जन समर्थन घट गया, बताओ क्यों? मेरे सवाल का जबाब कौन माई का लाल देगा?#PMNarendraModi

लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा औ रखाद्य पदार्थों में मिलावट

 सिर्फ घी या मंदिर के प्रसाद में मिलावट पर हाय तौबा मचाने से देश की आवाम की खैर नहीं।हर खाद्य पदार्थ की ईमानदारी से जांच जरूरी हैसिर्फ घी या मंदिर के प्रसाद में मिलावट पर हाय तौबा मचाने से देश की आवाम की खैर नहीं होगी। हर खाद्य पदार्थ की ईमानदारी से जांच जरूरी है ताकि लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

आजकल बाजार में उपलब्ध अधिकांश खाद्य पदार्थों में मिलावट का संशय बना रहता है, जैसे कि दालें, अनाज, दूध, मसाले, घी और सब्जियां ¹। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए हमें एक साथ आना होगा और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए काम करना होगा।
इसके लिए हमें अपने खाद्य पदार्थों का सावधानी से चयन करना चाहिए और उनकी गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए। साथ ही, हमें अपने आसपास के लोगों को भी इस समस्या के बारे में जागरूक करना चाहिए ताकि हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें।
*स्वस्थ खाद्य पदार्थों का चयन कैसे करें?*
- ताजे फल और सब्जियां खरीदें
- अनाज और दालों की गुणवत्ता की जांच करें
- दूध और दूध से बने उत्पादों की शुद्धता की जांच करें
- मसालों की गुणवत्ता की जांच करें
*स्वस्थ खाद्य पदार्थों के फायदे*
- स्वस्थ शरीर का निर्माण
- बीमारियों से बचाव
- ऊर्जा और ताजगी का अनुभव
- स्वस्थ मन और शरीर का विकास
आइए हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण करने के लिए एक साथ आएं और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए काम करें ।।कुछ लोगों की वाणी में वजन होता है,पढ़ सुनकर कातर मन को शकुन मिलता है,दुख निवारण का ज्ञान मिलता है ! किंतु अन्याय के खिलाफ कुछ लोगों की खामोशी नाकाबिले बरदास्त है !#PMNarendramodi
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LN Verma and Akshat Tiwari
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