शुक्रवार, 21 जून 2024

अनुज सीताराम तिवारी

 राष्ट्रपति पदक* विभूषित अनुज सीताराम तिवारी ,( P.H.Q सूबेदार सेवानिवृत्त )को

हार्दिक शुभकामनाएँ! आयुष्मान भव:!सदा सुखी भव:!

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आंतरिक सुंदरता पर ध्यान दें

 *`दूध` से भरे मिट्टी के बर्तन का दर्जा `विष` से भरे सोने के बर्तन से ऊँचा होता है...*

*इसी प्रकार मनुष्य की बाहरी सुंदरता से अधिक अंदरूदनी `संस्कारों` का मूल्य अधिक होता है...*
बाहरी सुंदरता को छोड़कर आंतरिक सुंदरता पर ध्यान दें...
खुश रहें और दूसरों को भी खुश रखें!

सोमवार, 17 जून 2024

चैतन्य की जागृत अवस्था

 पोस्ट अधिक लंबी नहीं है, परन्तु पैराग्राफ स्वरूप में लिखी गई है, इसलिये, लंबी दिखाई देती है। धन्यवाद।

🙏🩷🩷🩷 हमारे जीवन में तीन तरह की ऊर्जा काम करती है।
ऊर्जा नम्बर एक। इस ऊर्जा के होने से, हमारा शरीर स्वस्थ रहता है, और काम करता है।
ऊर्जा नंबर दो। यह ऊर्जा मन को प्रसन्न रखती है, शांत रखती है उत्साहित रखती है ऊर्जावान रखती है।
यह ऊर्जा किसी कारणवश उत्पन्न होती है। इस ऊर्जा के बनने के पीछे कोई कार्य कारण होता है, जैसे किसी ने हमारी तारीफ कर दी, किसी काम में हम सफल हुए, तो, यह ऊर्जा उत्पन्न होती है, और हमारे मन को गतिमान रखती है। और, यदि कोई कारण नहीं बना, तो, यह ऊर्जा नहीं बनती, और, हम उदास और दुखी रहते हैं। यानी, हमारी इस ऊर्जा का उत्पन्न होना और इस ऊर्जा से उत्पन्न होने वाली हमारी खुशी, हमेशा दूसरों पर निर्भर होती है, और, परिणामस्वरूप, हम दूसरों के गुलाम बने रहते हैं।
इन दो तरह की ऊर्जाओं का, हम सभी को अनुभव है। पहली बड़ी स्थूल ऊर्जा है, दूसरी थोड़ी सूक्ष्म ऊर्जा है।
🙏🩷🩷🩷 लेकिन, ऊर्जा नम्बर तीन, जिसे हम कहें आत्यंतिक जीवन, या कहें, हमारे जीवन का जो स्रोत है, जो स्वयं, अपने आप में ऊर्जा है, सूक्ष्मतम स्वरूप है ऊर्जा का, वह सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा है, हमारे जीवन के लिये।
इस ऊर्जा की, हमें सामान्य तौर पर, हमारे पूरे जीवन काल में, कोई अनुभव या अनुभूति नहीं मिल पाती। इस महत्वपूर्ण ऊर्जा के सूक्ष्मतम स्वरूप से, हमारा कोई परिचय नहीं हो पाता, और, हम इस तथाकथित जीवन से विदा ले लेते हैं।
यह ऊर्जा, हमारे लिए क्या कार्य करती है, सामान्यतः इस बात का भी हमें कोई ज्ञान नहीं हो पाता।
यही वह सूक्ष्मतम ऊर्जा है, जिससे, जब हमारा परिचय हो जाता है, अनुभूति हो जाती है, तब, यह हमें अकारण आनंद से भर देती है, अकारण प्रेम से भर देती है, अकारण श्रद्धा से भर देती है, अकारण करुणा से भर देती है, अकारण शांति से भर देती है, अकारण मस्ती से भर देती है, अकारण होश से भर देती है, अकारण उत्साह से भर देती है। अकारण होने से ये सारी अनुभूतियां हमारे अन्तरतम में सतत बनी रहती है।
लेकिन, यह सब, वह ऊर्जा, तभी कर पाती है, जब हम उसे जागृत करते हैं। जब यह सूक्ष्मतम ऊर्जा, हमारे अंदर सोई हुई अवस्था से निकलकर जागृत अवस्था में आती है, तब ही, हम सतत, अकारण आनंद, प्रेम, शांति, श्रद्धा, करुणा, मस्ती, होश, और उत्साह की अखंडित अवस्था को अनुभूत करते हैं, जीते हैं।
जब तक, यह ऊर्जा का सूक्ष्मतम स्वरूप जागृत नहीं किया जाता, तब तक, हम सर्वाधिक कीमती अनुभूतियों से अनजान रहते हुए ही, अपना पूरा तथाकथित जीवन बिता देते हैं, और, एक दिन दुखी अवस्था में ही इस शरीर से विदा ले लेते हैं।
ऊर्जा के, इस सूक्ष्मतम स्वरूप को ही हम चैतन्य के नाम से, चेतना के नाम से, आत्मा के नाम से, परमात्मा के नाम से, जानते हैं।
इस चैतन्य की जागृत अवस्था की अनुभूति के लिए ही, हम इस शरीर और इस पृथ्वी पर आए हैं, ना की स्कूल, कॉलेज, शादी, नौकरी, बिजनेस, बच्चे, परिवार, समाज, देश, दुनिया, के लिए। ये सारे घटक, सिर्फ सहयोगी घटक हैं, उस चैतन्य की अनुभूति में, मुख्य घटक, तो चैतन्य की अनुभूति ही है, और, उसी को भूल कर हम भलते ही चले जा रहे हैं। धन्यवाद।🙏🩷🩷🩷

महिलाओं और बहनों के साथ छेड़खानी करने लगे।

 एक दिन एक मुसलमान अपनी पत्नी और आठ बच्चों के साथ ग्राम प्रधान के पास आया और गाँव में रहने की भीख माँगने लगा।

रात में गांव की रखवाली करने वाले एक चौकीदार ने विरोध किया लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं मानी और मुस्लिम परिवार को गांव में रहने दिया.
दिन बीतते गए और मुस्लिम के आठ बच्चे बड़े हो गए और उनकी शादी की बारी आई, मुस्लिम ने सरपंच के पास जाकर कहा कि हुजूर के बच्चों की शादी होने वाली है और मेरे पास एक ही घर है, गांव वालों ने उसे एक बंजर जमीन दी और कहा कि तुम जाओ उस पर एक घर बनाओ।
इसके बाद मुसलमान बनिया के पास गया और उससे पैसे उधार लिए। कुछ समय बाद उन आठ बच्चों ने 74 बच्चों को जन्म दिया और करीब 30 साल में उस गांव में मुस्लिम आबादी बढ़कर 40% हो गई।
अब मुस्लिम लड़के अपनी आदत के अनुसार हिंदुओं से लड़ने लगे और उनकी महिलाओं और बहनों के साथ छेड़खानी करने लगे।
धीरे-धीरे प्रत्येक हिन्दू अपने परिवार सहित स्वेच्छा से गाँव छोड़ने लगा।
एक दिन मुसलमानों ने गाँव के मुख्य मंदिर को तोड़कर उस पर मस्जिद बनानी शुरू कर दी, फिर बाकी हिंदुओं ने उन्हें रोकना शुरू कर दिया, मुसलमानों ने कहा कि जो भी अल्लाह के काम में बाधा डालता है, उसे नष्ट कर दो।
बाकी हिंदुओं ने मुंह दिखाना उचित नहीं समझा और गांव छोड़ दिया और रास्ते में चौकीदार से कहा कि हमने तुम्हारी बात नहीं मानी और मुल्ला पर भरोसा किया, इसलिए आज हमें गांव छोड़ना पड़ा।
उस गांव का नाम पंचवटी से बदलकर रहीमाबाद कर दिया गया है।
यह गांव महाराष्ट्र के अमरावती जिले में स्थित है
टिप्पणी
ये कहानी नहीं सच्ची घटना है 🤨😕
लेकिन फिर भी हम में से कई लोग ऐसे हैं जो यह सब नहीं समझते हैं। वे गहरी नींद में हैं और जागना भी नहीं चाहते 😡

क्रांति किस चिड़िया का नाम है?

 'कम्युनिस्ट घोषणा' पत्र में जो कुछ भी कहा गया है,वह कम्युनिस्टों ने भले ही भुला दिया हो या ठीक से न पढ़ा हो,किंतु दूसरे महायुद्ध के बाद मार्क्सवादी दर्शन की विश्वव्यापी लोकप्रियता ने दुनिया भर के शासकों को मजबूर कर दिया था कि वे साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद तथा शोषणकारी अर्धसामंती -पूँजीवादी व्यवस्थाओं में जन कल्याणकारी सुधार करें अथवा खुद खत्म हो जाने को तैयार रहें!

अत: अंतर्राष्ट्रीय जन दबाव के चलते,दुनिया भर की सरकारों ने जनकल्याणकारी चोला पहिन लिया! शीतयदुद्ध के दौरान सोवियत शिविर को कमजोर करने के लिये साम्राज्य वादियों ने खुद कम्युनिस्ट मेनीफेस्टो के तीन चौथाई ऐजेंडे को शनै:शनै: लागू कर डाला !
आज के नव्य उदारवादी और वैश्विक बाजार आधारित भूमंडलीक्रत दौर में भी दुनिया का ऐंसा कोई कोना नही बचा जहाँ जनगण की इच्छाओं का समादर किसी राज्यसत्ता द्वारा पूरा न किया जाता हो! इस नजरिये से देखें तो ट्रंप,मोदी,शिंजो आबे और दूसरे तमाम् प्रतिक्रियावादी सरकारोंके मुखिया मार्क्सिस्ट ही हैं। और जो मार्क्स के सच्चे उत्तराधिकारी हैं, वेशक वे बहुत अच्छे खिलाड़ी हो सकते हैं,किंतु यदि वैश्विक पूँजीवाद रूपी क्रिकेट के मैदान में उन्हें खेलने का अवसर ही नही मिलेगा तो वे क्रांति रूपी विजयी शतक कैसे लगायेंगे? जब आवाम को रोटी मुफ्त,पानी मुफ्त,तीर्थयात्रा मुफ्त,शौचालय मुफ्त,और गैस तथा मकान भी मुफ्त मिलने लगेंगे तो संघर्ष के लिये कोई दायरा ही नही बचेगा!
जो लोग पूंजीवादी साम्राज्यवाद के पैरोकार रहो,दक्षिणपंथी पत्रकार और बुद्धिजीवी रहे, जो कभी मार्क्स,एंगैल्स को गालियां दिया करते थे,वे भी अब मार्क्सवादी बघारने को आतुर हैं!
लेनिन ने अपनी प्रसिद्ध रचना ,,राज्य और क्रांति,, के प्रारंभ में ही ऐसे लोगों को आगाह किया था कि क्रांति को विफल करने में पूँजीवाद कौन कौन से हथकंडे अपना सकता है! वेशक बिखरे वामपंथ को भारत में अपेक्षित सफलता नही मिली,किंतु यह सिर्फ दक्षिण एसिया और भारत की ही नही बल्कि अफ्रीका और लातीनी अमेरिका और अरब देशों की भी यही कहानी है,कि जनता फिलहाल कोई विप्लव खुद नही चाहती! जनता नही चाहती कि कोई अचानक एक मुस्त हिंसक बदलाव की नौबत आये !
बाजारबाद और आधुनिक उन्नत साइंस & टैक्नॉलॉजी पर पूर्णत: निर्भर उच्च वर्ग सिर्फ मुनाफे का फिक्रमंद है!जबकि मध्यम वर्ग धीरे धीरे जनोन्मुखी परिवर्तन स्वीकार करने में यकीन रखता है,और पूँजीवादी मीडिया और उन्नत सूचना तंत्र की कलाबाजी से अनजान सर्वहारा को नहीं मालूम कि क्रांति किस चिड़िया का नाम है!वह चुनाव के दौरान सिर्फ मतदाता है,नेता के भाषणों का श्रोता है और साम्प्रदायिक दंगों का कच्चा माल है! मंदिर,मस्जिद,गुरूद्वारे,चर्च,होली, ईद,इत्यादि उसकी आस्था के स्त्रोत हैं और पूँजीवादी दलों द्वारा चुनाव में बांटी गई रेबड़ियां ही उसका आर्थिक विकास है,इन हालात में 100% सर्वहारा क्रांति के लिये जब जनता ही तैयार नही,तो लोक सभा या विधान सभा चुनावों में लैफ्ट पार्टियों की हार के लिये वामपंथी दलों और जुझारू कामरेडों को दोषी ठहराना,मूर्खता है!

विश्व के महानतम् नेता, नरेन्द्र मोदी हैं

 विश्व के महानतम् नेता, नरेन्द्र मोदी हैं "

:-जार्जिया मेलोनी (इटली की प्रधानमंत्री)
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You and Ramashish Thakur
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