गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

2030 में आप ऊपर चले जाओगे।*

 विगत सप्ताह एक दिन दोपहर के बाद  वातावरण में ठंडक बढ़ चली थी ,कमरे का तापमान लगातार नीचे लुढ़कने  लगा था  और बाहर की सुखद सहनीय धूप ने मानों आसपास के वातावरण को उन्मादी बना दिया हो।  दिन  का तापमान खुशनुमा हो चला था । मानों कवि सेनापति कह रहे हों कि  

 "शिशिर में शशि को सरूप पावे सविताहु ,घामहुँ में चांदनी की दुति दमकत है"।

कभी मोबाईल पर चल रही ग्लोबल ख़बरों पर, कभी अपनी कलाई पर बंधी स्मार्ट वॉच पर नजर डालते हुए मैं अपरान्ह ५ बजे के दरम्यान घर के  नजदीक  नगर के सर्वश्रेष्ठ गार्डन में वॉकिंग करने जा पहुंचा । चलते -चलते जब थक गया तब एक मानव संचालित  झूले पर पैर लटकाकर पैगें भरने लगा । स्मार्ट फोन को ब्लू टूथ से कनेक्ट कर रूस यूक्रेन युद्ध,भारत और अमरीका के बीच तनाव  जिओ पॉलिटिक्स पर तीखी बहस सुन  रहा था। गार्डन में इक्का-दुक्का स्त्री पुरुष पथ संचलन कर रहे थे। छोटे छोटे सुंदर बच्चे निर्दोष सौंदर्य के मामले में गार्डन के फूलों से स्पर्धा कर रहे थे। 

मैं झूला झूलते हुए मोबाईल पर कभी राजनीति,कभी दर्शन,कभी आध्यात्म,कभी पुराने फ़िल्मी गीत  इत्यादि  विषयों का भी आनंद  ले रहा था।तभी अचानक मुझे पैरों में हल्की सी गुदगुदी महसूस हुई। मैनें हड़बड़ाकर पैरों की ओर देखा। किसी अनहोनी  की आशंका से घबराकर  मैनें देखा एक पाँच वर्षीय सूंदर गौरवर्ण बालक  ने  मेरे चरण स्पर्श करते हुए  माथा टेककर  कहा -प्रणाम दादाजी !

 सुखद आश्चर्य से आल्हादित, मैंने पुछा - बेटा  मेरे पोते तो दिल्ली में हैं,आप मेरे पोते कैसे हुए? 

वह अपने रत्नारे नयनों को गोल गोल घुमाकर मंद  मंद  मुस्कराकर, मेरे  प्रश्नों के जबाब न देकर मेरी अधीरतापूर्ण  किंकर्तव्यपूर्ण  स्थिति के मजे ले रहा था। 

प्रश्न का उत्तर न पाकर मैंने उसका नाम पूछा -उसने अपना नाम बताया -आरव ! उसकी खीसें निपोरने की अदा यथावत थी। मैंने अवसर की दुरूह स्थिति का सामान्यीकरण करने के उद्देश्य से बातचीत जारी  रखी। किन्तु उसका हर बात में अस्पष्ट जबाब और स्मित मुखड़ा मेरे लिए कठिन पहेली बनता जा था था। 

मैंने स्थिति को उसके पक्ष में जाता देख नया दाव चलाऔर पूछा -तुम्हारे मम्मी  डैडी कहाँ हैं ?

पापा आर्मी में हैं और "ईस्टर्न फ्रंट की चाइना बार्डर" पर तैनात हैं ! फिर उसने अपने हाथ की तर्जनी उठाकर इशारा किया कि  वो जो गार्डेन की बेंच पर बैठी है। मैनें देखा एक सिम्पल सी लड़की जींस टॉप पहने है और किसी कालेज गर्ल की तरह मोबाईल पर बात कर रही है। वहीं उसके सामने गार्डेन की हरी  घास पर एक कुत्ता लोट  पोट हो रहा था। 

मैनें अपनी स्मार्ट बाच पर नजर डाली और झूले को पैरों के ब्रेक से रोका।और छ्ड़ी उठाकर वॉकिंग के लिए चलने को उद्दत हुआ। तभी हमारे नवआगंतुक नए नवेले  पौत्र श्री आरवजी* बोल पड़े -दादाजी एक बात कहूं ,बुरा तो नहीं मानोगे ?मैंने तनिक हिचक साथ कहा - ठीक है नहीं मानूंगा। 

उसने कुछ झेंपते हुए कुटिल हास्य के साथ पूछा -दादाजी अभी कौन सा सन चल रहा है ?मैं कोई उत्तर देता उससे पहले ही उसने अपने सवाल का उत्तर दिया और कहा की -2025  है न ! मैंने कहा हाँ ! फिर वह अकस्मात् मंद स्वर में बोला -दादाजी -आप 2030 में नहीं रहोगे  इससे पहले की मैं आशय समझ पाता ,उस बालक रुपी पोते ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि *2030 में आप ऊपर चले जाओगे।* 

ज्योतिषरुपी नवागन्तुक की मर्मघाती भविष्यवाणी से आक्रांत होने के बजाय,मैं हर्षित मन कबीरदास जी  का एक दोहा गुनगुनाता हुआ गार्डेन मैं वॉकिंग पर निकल पड़ा। 


"जिस मरने से जग डरे, मेरे मन आनंद !  

मरने से ही पाऐंगे ,पूरन  परमानंद।" {कबीरदास}  











































शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

[कठोपनिषद ,द्व्तीय वल्ली ]

 यदि  कोई मारने  वाला यह समझता है कि मैं मार रहा हूँ, यदि कोई यह समझता है किमैं मर रहा हूँ ,तो समझ लीजिये कि वे दोंनो ही नहीं जानते ,क्योंकि न यह मरता है और  न वः मारता  हैं।  [कठोपनिषद ,द्व्तीय वल्ली ]


''ब्रहम तथा आत्मा ''--ब्रह्माण्ड तथा पिंड का वर्णन करने  के उपरा'त इनके आपस के संबंध आचार्य कहते हैं कि जीवात्मा अणु है ,सूक्छम है. परमात्मा अणु  से भी अणु है ,सुक्खं से भी सुक्खं से सूखम है। परन्तु इसका मतलब यह नहीं कि वह अति सूकमतर  है।वास्तव में वह महान से भी महान है। वः गुफा में रहता है किन्तु पहाड़ की गुफा में नहीं। वह तो इस जीव रुपी जंतु की  गुफा में छिपा बैठा हैं। 


उसे कर्मों के जाल में ,दुनिया के गोरखधंधों में फ,सा हुआ वयक्ति  नहीं देख सकता।  परमात्मा की महिमा को उस संसार को धारण करने वाला ,उस प्रभु की कृपा से ही जानi   जा सकता है.. 

''हन्ता चेन्मन्यन्ते। .....    नायं  हन्ति न हन्यते ;' 

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

नचिकेता का दूसरा वर

 इस प्रकार  जब ब्रह्मचारी  दोनों आश्रमों के बीच की संधि से गुजरता है ,जब ग्रहस्थि वानप्रस्थ में  प्रवेशब करता है तब वह गृहस्थ और वानप्रस्थ की संधि से होकर गुजरता है तब ओह वानप्रस्थ तथा संन्यास की समृद्धि से गुजरता है। इस प्रकार तीनो अग्नियों को नचिकेत अग्नि कहा जाता है।   

नचिकेता का दूसरा वर

 नचिकेता  का दूसरा वर :  स्वर्गसाधक अग्नि क्या है ? अब नचिकेता दूसरा वर मांगता है। 

स्वर्गलोक में किसी प्रकार का भय नहीं है।  न वहां तूँ  है  और न इन दो से ही तो मनुष्य डरता है। वहां मृत्यु से  भी भय नहीं।  यहां  बृद्धावस्था  से भी भय नहीं। इस प्रकार यमाचार्य ने नचिकेता को लोक की अर्थात स्वर्गलोक की साधक उस आदि अग्नि का उपदेष दिया। 

किसी की आरज़ू में लाजिमी है बेबसी होना।

 तड़प दिल में जरूरी है आंखों में नमी होना,

किसी की आरज़ू में लाजिमी है बेबसी होना।
अब समझ आया कि बेखौफ सच क्यों बोलो?
नहीं चाहिए अब इसमें ज़रा सी भी कमी होना।
अंधेरी रात उस पर भी घुमड़ आयी काली घटा,
जरूरी है अब भयानक बिजलियों का कोंधना।
चिरागों को खबर कर दो ये आंधियों का दौर है,
कोई मतलब नहीं बिना आंखों रोशनी का होना ।
हिंदुओ एक हो जाओ कि अभी भी वक्त बाकी है
जरूरी है इतिहास से सबक सीखकर सजग होना।
जिनके जुल्म से अतीत में बहते रहे दरिया लहू के,
किसीभी हालमें बाजिब नहीं विश्वास उनपर करना
नहीं तुम पोंछ सकते गर किसी की आंख के आंसू,
गले मिल साथ में रो लो यही है ज़िन्दगी का होना।
लिखा था 'आहत*' होना मेरी तक़दीर में शायद,
बहुत मुश्किल हुआ है आदमी का आदमी होना।
*श्रीराम तिवारी

रविवार, 10 अगस्त 2025

जागो हिन्दुओ जागो

 जो निश्च्छल निडर,सत्यनिष्ठ और सच्चे सनातनी हैं, वे नर - नारी आदरणीय अनिरुद्ध आचार्य जी से सहमत होंगे।क्योंकि अनिरुद्ध आचार्य जी ने हिंदू समाज के लड़के और लड़की दोनों के बारे बोला है । लेकिन ये हमारे हिन्दू समाज की विडम्बना है कि सज्जन संतों महंतों द्वारा कथा बाचन के दौरान जो सही बात कही जाती है,उसे चालाक और धूर्त नर - नारी तोड़ मरोड़ कर सनातन धर्म का मजाक उड़ाते हैं।

अनिरुद्ध आचार्य जी के कथन में जो कटू सत्य कहा गया है, वह अपवित्र मानसिकता के शिकार असामाजिक तत्वो को रास नहीं आ रहा है। इस संदर्भ में असलियत न तो उन्मुक्त इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने दिखाई और न किसी छप्य मीडिया ने। जबकि हकीकत यह है कि किसी भी कथा बाचक या आचार्य ने यह कभी नहीं बोला कि 100 में 100 लड़किंया गलत हैं । दरसल हिन्दू समाज की सुसभ्य सुशील और सत्यनिष्ठ युवतियों को आचार्य अनिरुद्ध से कोई शिकायत नही है। किंतु हिंदी मीडिया की चंद सनातन संस्कृति विरोधी वारांगनाएं अवश्य आचार्य अनिरुद्ध पर कुपित हैं ।
सनातन संस्कृति विरोधी उन्मुक्त युवक युवतियों को ज्ञात हो कि इंदौर की नवविवाहिता सोनम ने हनीमून के बहाने शिलांग ले जाकर अपने पति राजा रघुवंशी को अपने प्रेमी के साथ मिलकर षडयंत्र करके मार डाला। घटिया फिल्मों, समाज बिरोधी तत्वों और ढपोरशंखी मीडिया के कुप्रभाव से भारतीय समाज में राजा रघुवंशी मर्डर जैसी घटनाओं की बाढ़ आ गई है।सोनम जैसी पति हत्यारनियों से भारतीय जेलों भरी पड़ी हैं।
दरसल आचार्य अनिरुद्ध ने बोला था कि 100 में से 95 युवतियां और युवक मर्यादित हैं। यह कटु सत्य है,जो हम सबको पता है तथा सारी दुनिया को भी पता है । लेकिन सत्य हमेशा बुरे बक्त में सो जाया करता है। केवल झूठ फरेब, कदाचार जाग्रत रहता है।हमेशा की तरह सनातन धर्म को टारगेट किया जा रहा है ।किसी भी विदुषी महिला या पत्रकार में इतनी दम नहीं कि हिंसक बर्बर कौमौ के वीभत्स आचरण पर उंगली उठा सके। सनातन बिरोधी निकृष्ट तत्वों को सनातन समाज के सभ्य आदर्श रास नहीं आते।
🙏इसीलिए जागो हिन्दुओ जागो 🙏और आचार्य अनिरुद्ध की कटू सत्य एवं समसामयिक चेतावनी पर ध्यान दो। जय सनातन। जय हिंद।
See insights
Create ad

बुधवार, 11 जून 2025

अमिय हलाहल मद भरे

 "अमिय हलाहल  मद भरे  ,श्वेत स्याम रतनार। 

जियत मरत झुकि-झुकि परत,जेहिं चितवत इक बार।।"


रीतिकालीन कवि:- रसलीन 

  

रविवार, 8 जून 2025

जननी जन्मभूमिश्च................

 "अपि स्वर्णमयी  लंका न मे लक्ष्मण रोचते !

जननी जन्मभूमिश्च  स्वर्गादपि गरीयसी !!"

शनिवार, 24 मई 2025

मैं ही भारतवर्ष हूँ

 मेरी वास्तविक आत्मा सारे भारतवर्ष की आत्मा है। जब में श्वांस  लेता हूँ तो अनुभव करता हूँ की सारा  भारत श्वांस ले रहा है। जब में बोलता हूँ तो मानकर चलता हूँ कि सारा भारत बोल रहा है। लगता है कि मैं ही भारतवर्ष हूँ ,मैं ही शंकर हूँ. यही मेरी  देशभक्ति का अति उच्च अनुभव है  और यही व्यवहारिक वेदांत दर्शन है। :-स्वामी रामतीर्थ 

 हिन्दू के नाते मैं यह अनुभव करता हूँ की मेरे देश के साथ किया गया अन्याय,ईश्वर का अपमान है.  मेरे देश का कार्य ,भगवान राम का कार्य है। वतन की सेवा ही श्रीकृष्ण की सेवा है। वतन के निर्बल जनों  की सेवा ही शिव आराधना है।  शहीद मदनलाल धींगरा